‘पुष्पा झुकेगा नहीं’ कहने वाले जहांगीर खान को ‘सिंघम’ पुलिस ने दबोचा, नेपाल भाग रहे थे… STF ने बॉर्डर से फिल्मी स्टाइल में किया गिरफ्तार

TMC Leader Jahangir Khan Arrested : पश्चिम बंगाल में सत्ता पलटने के बाद से ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में नेताओं की गिरफ्तारियों का सिलसिला तेज हो गया है। सोमवार को पुलिस ने टीएमसी के वरिष्ठ नेता जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें बंगाली स्पेशल टास्क फोर्स ने नेपाल सीमा से पकड़ा है।
बता दें कि टीएमसी जहांगीर खान ने चुनाव के दौरान खुद को पुष्पा बताया था और कहा था कि पुष्पा झुकेगा नहीं, पर मतदान से पहले ही जहांगीर ने अपना नाम चुनावी मैदान से वापस ले लिया था, जिसके बाद वह चर्चा में आ गए थे। फिलहाल वह फालता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे।
चुनाव के दौरान उनके विवादित बयानों ने खूब चर्चा बटोरी थी। खासतौर पर यूपी के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और जहांगीर के बीच का विवाद सुर्खियों में रहा। वहीं, खुद को “पुष्पा” कहकर जनता के बीच अपनी जिद और जज्बे का परिचय देने वाले जहांगीर ने कहा था कि वह कभी झुकने वाले नहीं हैं।
गिरफ्तारी से पहले के घटनाक्रम में, कलकत्ता हाई कोर्ट ने जहांगीर की सुरक्षा बढ़ाने से इनकार कर दिया था। 4 मई को चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद, पुलिस ने उनके खिलाफ पांच मामले दर्ज किए थे। पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में खड़े जहांगीर खान को पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह नेपाल के रास्ते फरार होने का प्रयास कर रहा था। गुप्त सूचना मिलने पर एसटीएफ की टीम ने उसे दबोच लिया। अब उसे कोलकाता लाया जा रहा है।
यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब चुनाव से 48 घंटे पहले, जहांगीर खान ने पत्रकार वार्ता कर चुनाव लड़ने से हटने की घोषणा की थी। हालांकि, समय सीमा समाप्त हो जाने के कारण उनका नाम ईवीएम में तृणमूल के प्रत्याशी के रूप में बना रहा। 24 मई को घोषित चुनाव परिणाम में भाजपा ने एक लाख नौ हजार से अधिक वोटों का भारी अंतर से जीत हासिल की, जबकि जहांगीर खान केवल 7783 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहे। परिणाम आने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे।
हाई कोर्ट ने पहले सुरक्षा कवच वापस लिया
जहांगीर के खिलाफ पहले से ही कई मामले दर्ज हैं। उन पर मतदाताओं को धमकाने का भी आरोप है। अदालत से उन्हें कानूनी संरक्षण भी मिला था। उपचुनाव से पहले, उन्हें राहत मिली थी, लेकिन 26 मई को कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनके सभी सुरक्षा कवच वापस ले लिए। इसके बाद, उनकी गिरफ्तारी में कोई कानूनी बाधा नहीं बची थी।
गौरतलब है कि, विधानसभा चुनाव के दौरान फलता क्षेत्र के कई बूथों पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। ईवीएम में छेड़छाड़ की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने वहां पुनर्मतदान कराने का फैसला किया था। इन घटनाक्रमों के बीच, जहांगीर खान का नाम लगातार सुर्खियों में बना रहा।
खुद को “पुष्पा” कहकर जानी जाने वाली शख्सियत
यही नहीं, चुनाव के दौरान उनका नाम “पुष्पा” से जुड़ा था। उस समय, जब निर्वाचन आयोग ने दक्षिण 24 परगना में तैनात विशेष पुलिस पर्यवेक्षक एवं यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा ने उन्हें कानून-व्यवस्था बिगाड़ने पर चेतावनी दी थी। खुद को “सिंघम” की तरह सख्त पुलिस अधिकारी बताने वाले अजय पाल शर्मा के जवाब में, जहांगीर खान ने कहा था कि वह भी “पुष्पा” हैं और कभी झुकेंगे नहीं। इस बयान के बाद से ही वह “सिंघम बनाम पुष्पा” के नाम से चर्चित हो गए।
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