हर हिमाचली पर 1.20 लाख की देनदारी

राज्य पर वित्तीय देनदारी का बोझ बढक़र हो गया है 1,07,230 करोड़
हिमाचल सरकार हर साल बजट से पिछले दिन आर्थिक सर्वेक्षण जारी करती है। इस सर्वे में प्रति व्यक्ति आय को दर्शाया जाता है, जो इस वर्ष के लिए 2,35,199 रुपए है। यह आंकड़ा बेशक आम लोगों को समझ न आता हो, लेकिन प्रति व्यक्ति देनदारी जरूर समझ आएगी। यदि 16वें वित्त आयोग के सामने राज्य सरकार द्वारा रखे गए आंकड़ों को देखें, तो हिमाचल में हर व्यक्ति पर 1.20 लाख रुपए की देनदारी है। इसमें 90 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा सिर्फ लोन का ही है। चिंता की बात यह है कि 16वें वित्त आयोग की अवधि में वर्ष 2026 से 2031 तक यह देनदारी 56,847 करोड़ और बढ़ जाएगी। यदि फायनांस कमीशन ने राज्य सरकार के खर्चों और कमाई में आकलन को राज्य के चश्मे से न देखा, तो स्थिति और खराब हो जाएगी। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2022-23 में राज्य की कुल वित्तीय देनदारी 86,590 करोड़ थी, जबकि इस वर्ष राज्य का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी 1,91,728 करोड़ थी। राज्य की जीडीपी के मुकाबले यह वित्तीय दायित्व 45 फीसदी रहे हैं, जो वित्त वर्ष 2018-19 में सिर्फ 37 फीसदी थे।
यानी साल दर साल राज्य की जीडीपी के मुकाबले लोन में ग्रोथ ज्यादा है। इस अवधि में राज्य की आबादी 74.53 लाख आंकी गई है, जबकि प्रति व्यक्ति वित्तीय दायित्व 1,16,180 करोड़ रुपए है। यदि वित्त वर्ष 2023-24 की बात करें तो वित्तीय दायित्व बढक़र 1,07,223 करोड़ हो गए हैं। जबकि जीडीपी 2,07,430 करोड़ आंकी गई है। ऐसे में प्रति व्यक्ति वित्तीय दायित्व 1.20 लाख रुपए के आसपास पहुंच गए हैं। इन वित्तीय देनदारियों में ओपन मार्केट से लिए जाने वाले लोन, कंपेनसेशन, बिजली बोर्ड के लिए उदय स्कीम के तहत लिए गए बांड, वित्तीय संस्थानों से लिया ऋण, एनएसएसएफ के लोन, राज्य सरकार के लोन और एडवांसिज के साथ जनरल प्रोविडेंट फंड और विभागों का रिजर्व या डिपॉजिट फंड शामिल हैं। (एचडीएम)
2010 से 2015 तक मुश्किल वक्त झेल चुका है हिमाचल
राजस्व घाटा अनुदान के गलत आकलन के कारण 13वें वित्त आयोग की अवधि में वर्ष 2010 से 2015 तक हिमाचल बुरा वक्त देख चुका है। इस दौरान भारत सरकार से मिली लिमिट से ज्यादा लोन भी उठाए गए। इससे पहले 2004 में जीडीपी के मुकाबले देनदारियां 69 फीसदी भी हो गई थी, लेकिन उसके बाद स्थितियां सुधरीं। वित्त वर्ष 2019-20 में उदय स्कीम के तहत बिजली बोर्ड की देनदारियां सरकार को लेनी पड़ी। उससे पहले 2016-17 में मंदी और 2020 के बाद कोविड के कारण देनदारी बढक़र 43 फीसदी तक पहुंच गई। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में जीएसटी कंपनसेशन बंद होने के कारण भी दो फीसदी इजाफा हुआ।
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