26 लाख स्मार्ट मीटर खरीदेगा बिजली बोर्ड

2000 करोड़ के टेंडर खोलने को निदेशक मंडल ने दी मंजूरी, आचार संहिता के बाद शुरू होगी प्रक्रिया
शकील कुरैशी — शिमला
हिमाचल प्रदेश के 28 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं के घरों में अब स्मार्ट बिजली मीटर ही लगेंगे। सरकार से इजाजत मिलने के बाद बुधवार को बिजली बोर्ड के निदेशक मंडल ने इसे मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार की रीवेंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रेंथनिंग स्कीम (आरडीएसएस ) के तहत इन मीटरों की खरीद होगी और करीब 26 लाख स्मार्ट मीटर लिए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार आदर्श चुनाव आचार संहिता के खत्म होते ही टेंडर खोल दिए जाएंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। तीन जोन के लिए टेंडर हुए हैं, जिससे पहले साउथ जोन के लिए मीटरों की खरीद पहले ही की जा चुकी है। इन मीटरों की खरीद और ट्रांसफार्मर के साथ अन्य सामान की खरीद पर करीब 2000 करोड़ रुपए का खर्च होगा।
अभी तक स्मार्ट मीटर शिमला और धर्मशाला में ही लगाए गए हैं, लेकिन अब पूरे प्रदेश में हर घर में स्मार्ट मीटर ही लगेगा। हालांकि इसका विरोध लंबे समय से चल रहा है, मगर हिमाचल में सरकार को इसे लागू करना ही होगा। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो यह केंद्र सरकार के साथ हुए समझौते के विरुद्ध होगा और तब उस सूरत में हिमाचल को केंद्र सरकार से बिजली क्षेत्र में ग्रांट नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार की आरडीएसएस स्कीम लगभग 3500 करोड़ रुपए की है और इस योजना को यहां पर पूरी तरह से लागू किया जाना है। केंद्र सरकार के उदय प्रोजेक्ट में हिमाचल बिजली बोर्ड ने समझौता कर रखा है, जिसके बाद ही प्रदेश को आरडीएसएस जैसी योजना मिली। बुधवार को बिजली बोर्ड के निदेशक मंडल की बैठक चेयरमैन संजय गुप्ता की अध्यक्षता में हुई है। इसमें सभी निदेशक थे, केवल एमडी मौजूद नहीं थे। इन दिनों बिजली बोर्ड के एमडी हरिकेश मीणा अवकाश पर गए हैं, जबकि सरकार ने एचआरटीसी के एमडी रोहन चंद ठाकुर को अतिरिक्त कार्यभार दे रखा है। बता दें है कि वह भी बिजली बोर्ड के निदेशक मंडल की बैठक में शामिल नहीं हुए। वर्तमान सुक्खू सरकार ने पूर्व सरकार के समय में आरडीएसएस योजना के तहत किए गए टेंडर सभी रोक दिए थे। इसके बाद दोबारा से टेंडर करने के आदेश हुए।
स्मार्ट मीटरों के फायदे
तीन जोन के लिए लगभग 26 लाख स्मार्ट मीटरों की जरूरत रहेगी। साउथ जोन के लिए पहले ही दो से अढ़ाई लाख मीटर खरीदे व लगाए जा चुके हैं। इन मीटरों का सबसे अधिक फायदा इंडस्ट्रियल एरिया में होगा, जहां पर बिजली की हानियां पूरी तरह से रुक जाएंगी और उद्योगों से एक्चुअल बिलिंग हो पाएगी। इससे बिजली बोर्ड की कमाई में इजाफा होना तय है। उद्योगों के साथ कई तरह के पुराने विवाद भी चल रहे हैं, जो भविष्य में नहीं हो पाएंगे।
कर्मचारी कर रहे विरोध
हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटरों का विरोध न केवल उपभोक्ता कर रहे हैं, बल्कि बिजली बोर्ड के कर्मचारी भी इसके विरोध में हैं। वह इसलिए क्योंकि इन मीटरों के लगने के बाद बिजली बोर्ड में बिलिंग आदि के लिए कर्मचारियों की जरूरत नहीं रहेगी। मीटर ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ जाते हैं और उपभोक्ताओं को ऑनलाइन ही उनका बिल आ जाता है। शिमला और धर्मशाला में इस तरह की व्यवस्था काफी ज्यादा सफल मानी जा रही है।
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