बरसात में सुरक्षित सफर के लिए बरतें एहतियात
-सभी चालकों को रोड़ सेफ्टी सेल की हिदायत
-भारी बारिश में जरूरी होने पर ही करें लंबा सफर
-सडक़ मार्गों की स्थिति जानने के बाद उठाएं कदम
पहाड़ी प्रदेश में बरसात हर साल कहर बरपाती है। बरसात के दिनों में प्रदेश में सडक़ दुर्घटनाएं भी काफी ज्यादा रहती हैं। माना जाता है कि साल में उतनी सडक़ दुर्घटनाएं सामने नहीं आती जितनी ज्यादा बरसात के दिनों में होती हैं। ऐसे में वाहन चालकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। परिवहन विभाग का रोड़ सेफ्टी सेल चालकों को जागरूक करने की दिशा में लगातार प्रयास करता है। क्योंकि अब बरसात शुरू हो चुकी है इसलिए उनके प्रयास भी तेज हो गए हैं। रोड़ सेफ्ट सेल की ओर से वाहन चालकों को हर बार हिदायतें दी जाती है। क्योंकि यह पहाड़ी प्रदेश है लिहाजा बरसात में सबसे अधिक खतरा पहाडिय़ों के दरकने का रहता है। जगह-जगह लैंड स्लाइड होते हैं जो किसी की भी जान के लिए जोखिम रहता है।
सफर करते समय कभी भी पहाड़ी से पत्थर गिर जाता है या फिर पेड़ गिर जाते हैं तो इससे कोई भी हादसा हो सकता है। भू स्खलन के कारण सडक़ मार्ग जगह-जगह पर क्षतिग्रस्त हुए रहते हैं। ऐसे में इन सर्पीली सडक़ों पर सफर पूरी सतर्कता के साथ करना बेहद ज्यादा जरूरी है। रोड़ सेफ्टी सेल का कहना है कि वाहन चालकों को सुरक्षित सफर के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। पहले तो भारी बारिश के दौरान लंबा सफर करने से बचना चाहिए। यदि जरूरी हो तो सफर करें लेकिन उससे पहले सडक़ मार्ग के बारे में उन्हें जान लेना चाहिए कि कहीं पर मार्ग क्षतिग्रस्त न हो। मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के चलते वहां पर सफर करने से बचना चाहिए। हिमाचल पथ परिवहन निगम के चालकों व परिचालकों को भी निगम द्वारा पहले से यह हिदायत दी गई है कि मार्ग ठीक होने पर ही वह बसों को आगे लेकर जाएंगे अन्यथा वहां पर बस नहीं जाएगी। कहीं पर भी जोखिम का सफर न तो खुद करें और न ही यात्रियों को करवाएं। इस विशेष हिदायत पर इस बरसात में भी अमल करने को कहा गया है।
प्रदेश का रोड़ सेफ्टी सेल समय-समय पर वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए काम करता है। उसके द्वारा जगह-जगह पर जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाता है और स्कूली बच्चों के माध्यम से भी जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाती है। 1900 स्कूलों में रोड़ सेफ्ट क्लब बनाए गए हैं वहीं मेलों में प्रदर्शनी लगाकर भी सडक़ सुरक्षा का पाठ पढ़ाया जाता है। दुर्घटना के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2022 में 2597 सडक़ दुर्घटनाएं हुईं जबकि वर्ष 2023 में 2253 सडक़ दुर्घटनाएं हुई हैं। सबसे अधिक दुर्घटनाएं नेशनल हाइवे पर बताई जाती हैं क्योंकि यहां पर तेज रफतारी से वाहन चलाए जाते हैं और खासकर बरसात के दिनों में धुंध काफी ज्यादा रहती है। इस धुंध के चलते भी काफी ज्यादा दुर्घटनाएं प्रदेश की सडक़ों पर होती हैं जिनको रोकने के लिए वाहन चालकों को सतर्क रहना जरूरी है।
–शकील कुरैशी

No comments