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Hathras Stampede : हाथरस भगदड़ की आंखों देखी, जो गिरे…वे उठ न पाए

 

हाथरस भगदड़ की आंखों देखी; लोग एक के ऊपर एक नाले में गिरते गए और दो घंटे तक वहीं दबे रहे हाथरस के रतिभानपुर में मंगलवार का दिन अमंगलकारी रहा। यहां प्रवचन करने वाले भोले बाबा के सत्संग के दौरान भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों की मौत हो गई। घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई। इस घटना की प्रत्यक्षदर्शी महिला शकुंतला ने बताया कि भोले बाबा का सत्संग चल रहा था। सत्संग खत्म होने के बाद लोग एकसाथ बाहर की ओर निकले, तो भगदड़ मच गई। पास में एक नाला था, भगदड़ के बाद लोग नाले में एक के ऊपर एक गिरते चले गए, जब लोग घंटे-दो घंटे दबे रहेंगे, तो मरेंगे नहीं तो क्या होगा। प्रत्यक्षदर्शी शकुंतला ने बताया कि भगदड़ के दौरान पहले आगे वाले लोग नाले में गिरे और फिर उनके ऊपर पीछे वाले लोग गिरते चले गए। शकुंतला ने बताया कि उनकी पड़ोसन गंगा देवी भी हादसे का शिकार हो गईं। महिला ने बताया कि भगदड़ में वह भी दब गई थी, लेकिन लोगों ने उन्हें खींचकर बाहर निकाला, जिसके कारण को जिंदा बच पाईं।

एक-दूसरे को रौंदते हुए निकली भीड़

एक पीडि़त महिला ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि हाथरस के एटा बॉर्डर के पास रतिभानपुर में संत भोले बाबा का प्रवचन चल रहा था। प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। पंडाल में अत्यधिक उमस और गर्मी के कारण भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई और यह बड़ा हादसा हो गया। पीडि़त महिला ने बताया कि पंडाल में काफी भीड़ थी और प्रवचन खत्म होने के बाद भगदड़ मच गई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। पीडि़त महिला संत भोले बाबा का प्रवचन सुनने के लिए जयपुर, राजस्थान से बस द्वारा हाथरस आई थी। महिला के साथ उसका पांच साल का बच्चा भी था। रोती बिलखती पीडि़त महिला ने बताया कि पंडाल में श्रद्धालुओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी और न ही गर्मी से निपटने के लिए पर्याप्त पंखे लगाए गए थे। पीडि़ता ने बताया कि प्रवचन समाप्त होने के बाद पंडाल में अत्यधिक उमस और गर्मी के कारण भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। लोग अचानक भीड़ में एक-दूसरे को कुचलने लगे, जिसमें कई बूढ़े, महिलाएं और बच्चों दब गए। वहीं, एक अन्य महिला ने बताया कि लाखों की भीड़ में मची भगदड़ में लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे, जिसमें कई लोगों की कुचलकर मौत हो गई।

सत्संग में जुटी थी सवा लाख से ज्यादा की भीड़ एलआईयू ने पहले ही जताई थी हादसे की आशंका

हाथरस में भोले बाबा के सत्संग में मंगलवार को हुए हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया है। हालांकि इसके बारे में अफसरों को पहले ही चेताया गया था। इसके बाद भी कोई एक्शन न लिया गया और इतना बड़ा हादसा हो गया। सत्संग में जरूरत से ज्यादा पहुंची भीड़ को देखकर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) ने अफसरों को सौंपी रिपोर्ट में किसी बड़ी घटना होने का अंदेशा जता दिया था, लेकिन इसके बाद भी अफसर मौन साधे बैठे रहे और श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई। सिंकरामऊ कोतवाली क्षेत्र के फुलराई गांव में भोले बाबा साकार हरि के सत्संग का आयोजन किया गया था। हालांकि इस सत्संग के आयोजन की जानकारी प्रशासन को थी, लेकिन सत्संग में पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या कुछ और बताई गई थी। सत्संग में जरूरत ज्यादा करीब सवा लाख श्रद्धालु पहुंच गए थे। सत्संग में पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या को देखकर एलआईयू ने किसी बड़ी घटना का अंदेशा जताया और इसकी रिपोर्ट बनाकर अफसरों को सौंप दी। इसके बाद भी अफसरों ने संज्ञान नहीं लिया।

रास्ता नहीं था, सब एक-दूसरे पर गिरे

हाथरस हादसे की चश्मदीद लडक़ी ने बयां किए हालात

हाथरस भोले बाबा के सत्संग में भगदड़ में सौ से ज्यादा लोगों की मौत ने हर किसी को विचलित कर दिया है। मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं हैं। हादसे के कारण तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन एक चश्मदीद किशोरी ने हालात बयां किए हैं। यह किशोरी अपनी मां के साथ सत्संग में गई थी। उसका कहना है कि वह खुद मरते मरते बची है। उसकी मां भी घायल हैं। एटा के जिला अस्पताल में भर्ती ज्योति ने बताया कि आखिर भगदड़ मची कैसे है। ज्योति ने बताया कि भोले बाबा के सत्संग में मंगलवार को बहुत ज्यादा भीड़ थी। करीब तीन घंटे तक सत्संग चला। इसके बाद जब खत्म हुआ, तो सभी लोग बाहर निकलने लगे। ज्योति ने बताया कि पंडाल से निकलने का रास्ता बेहद सकरा था। बाहर निकलने की हड़बड़ी में लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और भगदड़ मच गई। जब मैंने बाहर निकलने की कोशिश की तो पाया कि बाहर मोटरसाइकिलें खड़ी हैं। इससे कारण रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इसी बीच पीछे से काफी लोग हम लोगों को भी धकेलते हुए आगे बढ़ रहे थे। मुझे भी लगा कि कुचल जाएंगे। तब तक कई लोग बेहोश होकर जमीन पर गिरे थे। कई लोग शायद मर गए थे। इसके बाद ज्योति ने कहा कि उसे उसकी मां के साथ एटा अस्पताल लाया गया। उस समय उसकी मां भी बेहोश थी।

आजादी के बाद सबसे बड़ी भगदड़

भगदड़ की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी देश के कई हिस्सों में भगदड़ की घटनाएं घटीं। सबसे बड़ी भगदड़ आजादी के बाद 1954 में कुंभ मेले के दौरान मची थी। आइए एक नजर डालते हैं देश में अब तक घटी भगदड़ की घटनाओं पर…

3 फरवरी, 1954 : प्रयाग कुंभ के दौरान हुई भगदड़ मची थी,जिसमें 800 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। दावा किया जाता है कि देश में अब तक भगदड़ से हुई मौत का सबसे बड़ा आंकड़ा है। आजादी के पास यह पहला कुंभ मेला था। इस घटना में 200 लोग लापता हो गए थे। वहीं, 2000 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

27 अगस्त, 2003 : नासिक कुंभ में भगदड़ से 39 श्रद्धालुओं की मौत।

25 जनवरी, 2005 : महाराष्ट्र के सतारा जिला के नजदीक मंधारदेवी मंदिर में भगदड़, 340 से ज्यादा तीर्थयात्रियों की मौत। यह हादसा उस समय हुआ जब श्रद्धालु नारियल तोडऩे के लिए सीढिय़ों पर चढ़े थे।

3 अगस्त, 2008 : हिमाचल के बिलासपुर जिला में मौजूद नैना देवी मंदिर में श्रावण अष्टमी मेले के दौरान भू-स्खलन हुआ और भीड़ बेकाबू हो गई। इस भगदड़ में 146 लोग मारे गए, 400 जख्मी हुए।

30 सितंबर, 2008 : राजस्थान में जोधपुर के चामुंडा देवी मंदिर में नवरात्र मेले के दौरान एक दीवार के गिरने से भगदड़, 224 लोग मारे गए।

4 मार्च, 2010 : उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के संत कृपालु महाराज के मनगढ़ मंदिर में गरीबों को भोजन खिलाने के दौरान भगदड़ मच गई। भगदड़ में लगभग 65 गरीबों की मौत हो गई थी।

14 जनवरी, 2011 : मकर संक्रांति को लाखों की तादाद में श्रद्धालु केरल के इडुक्की जिला के पुलमेडू स्थित सबरीमाला मंदिर में इकठ्ठा हुए थे। श्रद्धालुओं से भरी एक जीप भीड़ में घुसते हुए पलट गई, जिससे कई लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इसके बाद लोगों के बीच भगदड़ मच गई। इस घटना में 106 लोगों की मौत हो गई थी।

21 अप्रैल 2019 : तमिलनाडु स्थित करुप्पासामी मंदिर में मची भगदड़ में करीब सात लोगों की मौत हो गई थी। वहीं दस लोग घायल हुए थे।

1 जनवरी, 2022 : नववर्ष के दिन वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई थी।

7 मार्च, 2023 : मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर का स्लैब टूटने से मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई थी और 36 लोगों की मौत हो गई थी।

20 बीघा जमीन पर सत्संग स्थल

मुगल गढ़ी और फुलरई के बीच करीब 200 बीघा जमीन पर सत्संग में कई लाख लोग शामिल हुए थे। इसकी तैयारी पिछले 15 दिनों से चल रही थी। तमाम जिलों के सत्संगी 24 घंटे पहले यहां आकर जमने शुरू हो गए।

बिखरा पड़ा था मृतकों का सामान

भगदड़ और एक दूसरे के नीचे दबे लोगों की घटना के बाद खाली खेत में मृत अनुयायियों का सामान बिखरा पड़ा था। इसे देखकर परिजन पहचान करने की कोशिश कर रहे थे। मौके पर किसी सत्संगी का भोजन की पोटली, तो किसी के जूते, चप्पल, सैंडल, कपड़े, पानी की बोतलें पड़ी है। भारी मात्रा में जुटे चप्पल और सामान को देखने से ही हादसे में मरने वाले लोगों की संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है।

मदद को आगे आए ग्रामीण

करीबी गांव मुगलगढ़ी और फुलरई के तमाम लोग दौड़ पड़े। लोगों ने भीड़ में दबे सत्संगियों को अस्पताल भिजवाया। युवक बचाव कार्य में जुट गए। तमाम सत्संगी एक दूसरे से बिछड़ गए। ग्रामीण युवकों ने माइक संभलकर लापता लोगों को उनके परिजनों से मिलने के लिए काफी देर आवाज लगाई। कुछ लोग आवाज सुनकर अपने परिजनों से मिल भी गए। मृतकों की पहचान के लिए उनके परिजन मौके पर बिखरे पड़े सामान से मिलान करने में लगे हैं।

तीन किलोमीटर तक लग थी गाडिय़ों की कतार

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महीने के पहले मंगलवार के कारण काफी भीड़ होती है। इस सत्संग में राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा सहित कई राज्यों के लोग आए थे। भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वाहनों की कतार तीन किलोमीटर तक फैली हुई थी। पुलिस के अनुसार साकार नारायण विश्व हरि भोले बाबा के सत्संग की शुरुआत मंगलवार सुबह नौ बजे से हुई थी। मानव मंगल मिलन सत्संग समिति की तरफ से आयोजन किया गया था। सत्संग में शामिल होने के लिए अलीगढ़, एटा, आगरा, मैनपुरी, इटावा, फिरोजाबाद, कासंगज के अलावा दिल्ली, जयपुर से भी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पहुंचे थे। शाम करीब चार बजे सत्संग समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ का पंडाल से निकलना शुरू हुआ। सत्संग में शामिल होने के लिये अपने परिवार के साथ जयपुर से आई एक महिला ने बताया कि सत्संग के समापन के बाद लोग बाहर निकलने में जल्दबाजी कर रहे थे। गर्मी-बरसात की वजह से पंडाल में काफी उमस थी। जिसके चलते तमाम श्रद्धालु बाहर निकलने की जल्दी करने लगे। इस दौरान भोले बाबा का काफिला निकालने के लिए श्रद्धालुओं को रोका गया। तभी श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई, जिसमें तमाम श्रद्धालु जमीन पर गिर पड़े और लोग उन्हें कुचलते हुए भागने लगे। पूरे पंडाल में चीख-पुकार मच गई।

गाड़ी की धूल लेने के लिए दौड़ पड़े थे भक्त

जब भोले बाबा सत्संग के समापन के बाद अपनी गाड़ी से रवाना हो रहे थे। जैसे ही उनकी गाड़ी एटा अलीगढ़ हाई-वे पर चढ़ी, तभी दोनों ओर से लोग उनके दर्शन और गाड़ी की धूल लेने उमड़ पड़े। तभी सडक़ की एक और दलदल युक्त पटरी से फिसलते सैकड़ों अनुयाई एक दूसरे पर गिर पड़े और दब गए। हादसे के बाद बचाव कार्य में आसपास के गांव के लोगों के साथ अनुयाई भी जुट गए।

सत्संग के बाद एटा से लेकर अलीगढ़ तक बिछी लाशें, बढ़ता जा रहा मौत का आंकड़ा

सत्संग के बाद भगदड़ और फिर एक के बाद एक बिछने लगीं लाशें। ये नजारा यूपी के हाथरस का था। यहां मंगलवार को भोले बाबा सत्संग का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में लाखों की संख्या में आसपास जिलों से अनुयायी यहां पहुंचे थे, लेकिन किसी को ये नहीं पता था कि कुछ समय बाद ही यहां एक ऐसा हादसा होने वाला है जो एक-दो नहीं कइयों के घरों में कोहराम मचा देगा। भोले बाबा ने जैसे ही अपना प्रवचन खत्म किया तो गर्मी के चलते लोगों ने जल्दी निकलना शुरू किया। इसको लेकर वहां भगदड़ मच गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई। एक के बाद एक लाशें पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचनी शुरू हो गई। देखते ही देखते मौतों का आंकड़ा बढ़ता चला गया। सत्संग वाली जगह से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक लाशों की ढेर लग गए। शवों की संख्या इतनी हो गई कि गिनना मुश्किल हो गया। हाथरस से लेकर अलीगढ़ और एटा पोस्टमार्टम हाउस तक करीब 116 शवों को ले जाया गया। अब सवाल ये है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भोले बाबा कहां गायब हो गया? हालांकि पुलिस भोले बाबा की तलाश में दबिश दे रही है। अलीगढ़ से लेकर हाथरस पुलिस भी बाबा की तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है।

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