नक्षत्र बदलते ही और भी बढ़ गई शनि की ताकत, इन 3 राशि वाले लोगों के लिए बढ़ जाएगा संकट.

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न्याय के देवता शनि देव ने नक्षत्र परिवर्तन कर अपनी ताकत बढ़ा ली है. 20 जनवरी को दोपहर करीब 12:15 बजे शनि ने 'उत्तराभाद्रपद' नक्षत्र में प्रवेश किया है. सबसे खास बात यह है कि इस नक्षत्र के स्वामी स्वयं शनि देव हैं. अपने ही नक्षत्र में आने से शनि अब अत्यंत बलशाली और प्रभावशाली हो गए हैं.

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शनि देव इस नक्षत्र में 17 मई तक विराजमान रहेंगे. ज्योतिषियों का मानना है कि शनि के 'स्व-नक्षत्र' में आने से शुभ फल देने वाली राशियों को तो लाभ होगा, लेकिन जो राशियां पहले से ही शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कठिन दौर से गुजर रही थीं, उनकी मुश्किलें अब दोगुनी हो सकती हैं.
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मेष राशि के जातकों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है. शनि की बढ़ी हुई शक्ति आपके जीवन में नई बाधाएं ला सकती है. नौकरी और व्यापार में आपको कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है. गलतफहमियों के कारण बड़े नुकसान की आशंका है, इसलिए किसी भी विवाद से दूर रहें.

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इस दौरान मेष राशि वालों को ठगों और जालसाजों से विशेष सावधान रहने की जरूरत है. धन का निवेश बहुत सोच-समझकर करें. राहत के लिए नियमित रूप से शनि मंत्र ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ का जाप करें. यह मंत्र आपको मानसिक शक्ति प्रदान करेगा.
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कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम दौर चल रहा है. 17 मई तक का समय आपके लिए किसी रोलर-कोस्टर राइड जैसा हो सकता है. करियर या व्यक्तिगत जीवन में कोई भी बड़ा जोखिम (Risk) लेना भारी पड़ सकता है. आर्थिक लाभ के लिए आपको पहले से कहीं अधिक पसीना बहाना होगा. उपाय के तौर पर नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करें.
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मीन राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का दूसरा और सबसे भारी चरण चल रहा है. शनि का नक्षत्र गोचर आपके मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है. फिजूलखर्ची के कारण आपका बैंक बैलेंस बिगड़ने के संकेत हैं. सेहत के प्रति लापरवाही आपको अस्पताल के चक्कर लगवा सकती है, इसलिए खान-पान और योग पर ध्यान दें.

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मीन राशि वालों के लिए यह समय संघर्षपूर्ण तो है, लेकिन यह साल आपको जीवन की सबसे महत्वपूर्ण सीख भी देगा. मुश्किलों से घबराएं नहीं, बल्कि धैर्य से काम लें. नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करें (अर्घ्य दें). यह आपके आत्मविश्वास को बनाए रखने में मदद करेगा.



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