प्रदेश में चिट्टे के कारोबार में संलिप्त लोगों पर अब पंचायत चुनाव लडने पर रोक

प्रदेश में चिट्टे के कारोबार में संलिप्त लोगों पर अब पंचायत चुनाव लडने पर रोक लगेगी। राज्य सरकार इसको लेकर पंचायती राज अधिनियम में स्पष्ट कानूनी प्रावधान करने जा रही है। यह जानकारी पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने गुरुवार को प्रदेश सचिवालय में प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और आगामी विधानसभा सत्र में इसे कानून का रूप दिया जाएगा।
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि चिट्टे के खिलाफ सख्ती बढ़ाते हुए यह तय किया जाएगा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज होगी, वह पंचायत चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य माना जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के कारोबार को लेकर सरकार बेहद गंभीर है और किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल द्वारा इस विषय में उठाए गए संदेह पर प्रतिक्रिया देते हुए पंचायती राज मंत्री ने कहा कि नियमों के तहत यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति की संलिप्तता कैसे तय होगी।
इसी को ध्यान में रखते हुए अब अधिनियम में सीधा प्रावधान जोड़ा जा रहा है, ताकि चिट्टे जैसे नशे के खिलाफ कानूनी तौर पर और अधिक सख्ती की जा सके। प्रदेश की पंचायतों में 31 जनवरी को प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके बाद पंचायती राज संस्थाओं के कामकाज की व्यवस्था को लेकर सरकार ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें दो-तीन विकल्पों पर विचार किया गया है।
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि इस ड्राफ्ट पर मंत्रिमंडल में विस्तृत चर्चा की जाएगी और किसी एक प्रारूप को अंतिम रूप देकर 31 जनवरी तक आगामी व्यवस्था को लेकर अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट तैयार करते समय सभी कानूनी पहलुओं के साथ-साथ राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में अपनाई गई व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया गया है।
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