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डायबिटीज से वजन घटाने तक: इस मौसमी भाजी का सच जानकर हैरान रह जाएंगे.

  


विंध्य क्षेत्र की पहचान बनती चने की भाजी

मध्य प्रदेश का विंध्य क्षेत्र केवल चना उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी खाद्य परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। यहां सर्दियों में मिलने वाली चने की भाजी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी इसे पोषण का पावरहाउस माना जाता है। रबी सीजन में जब चने के पौधे कोमल होते हैं, तभी खेतों से इस भाजी की तुड़ाई की जाती है। यही कारण है कि चने की भाजी सालभर नहीं मिलती और सर्दियों में ही इसकी खास मौजूदगी रहती है।

क्यों खास है चने की भाजी का मौसम

रबी सीजन की अनमोल देन

चने की भाजी केवल उसी समय उपलब्ध होती है जब चने के पौधे पूरी तरह विकसित नहीं होते, लेकिन उनमें पोषक तत्व चरम पर होते हैं। इस सीमित समय की उपलब्धता इसे और भी खास बना देती है।

मांग और कीमत दोनों में बढ़ोतरी

सालभर न मिलने के कारण चने की भाजी की मांग सर्दियों में अचानक बढ़ जाती है। यही वजह है कि बाजार में इसकी कीमत भी सामान्य सब्जियों की तुलना में अधिक रहती है।

विंध्य की रसोई में चने की भाजी के अनोखे स्वाद

साग के रूप में लोकप्रिय

विंध्य क्षेत्र में चने की भाजी को पारंपरिक साग के रूप में पकाया जाता है। सरसों के तेल, लहसुन और देसी मसालों के साथ इसका स्वाद बेहद खास हो जाता है।

सूखी भाजी और दाल के साथ प्रयोग

कई इलाकों में चने की भाजी को सुखाकर सालभर इस्तेमाल किया जाता है। इसे सूखी भाजी या दाल के साथ मिलाकर भी पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं।

पोषण का पावरहाउस क्यों कहलाती है चने की भाजी

आयरन और फाइबर का भरपूर स्रोत

विशेषज्ञों के अनुसार चने की भाजी में आयरन और फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो शरीर में खून की कमी को दूर करने और पाचन को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

प्रोटीन और विटामिन से भरपूर

प्रोटीन, विटामिन सी और अन्य जरूरी पोषक तत्वों के कारण चने की भाजी हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

डॉक्टरों की राय: सेहत के लिए क्यों जरूरी है चने की भाजी

ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. आलोक अवधिया ने न्यूज़ 18 से बातचीत में बताया कि सर्दियों में चने की भाजी इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में सबसे ज्यादा असरदार साबित होती है। यह कम कैलोरी वाली भाजी वजन घटाने में मदद करती है और डायबिटीज रोगियों के लिए भी बेहद उपयोगी है।

सर्दी-जुकाम और वायरल में राहत

डॉ. अवधिया के अनुसार चने की भाजी सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल संक्रमण में भी राहत देती है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ाता है।

गंभीर बीमारियों में भी कारगर चने की भाजी

पाचन तंत्र को मजबूत बनाए

चने की भाजी में मौजूद फाइबर कब्ज की समस्या को दूर करता है और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

ब्लड सर्कुलेशन और थकान में सुधार

नियमित रूप से चने की भाजी खाने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और थकान कम महसूस होती है।

आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक

इस भाजी के पोषक तत्व आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं, जिससे आंखों की रोशनी बेहतर होती है।

त्वचा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी

प्राकृतिक ग्लो पाने का आसान तरीका

चने की भाजी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और प्राकृतिक चमक लाने में मदद करते हैं।

तनाव और मानसिक संतुलन में सुधार

विशेषज्ञ मानते हैं कि चने की भाजी तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बेहतर बनाने में भी सहायक होती है।

क्यों सर्दियों में ही खानी चाहिए चने की भाजी

सर्दियों का मौसम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। ऐसे में चने की भाजी जैसी मौसमी और पोषक सब्जी को आहार में शामिल करना बेहद फायदेमंद होता है। यही वजह है कि विंध्य क्षेत्र के खेतों से लेकर रसोई तक चने की भाजी इस समय अपनी खास पहचान बना रही है।

विंध्य से देशभर तक बढ़ती पहचान

पहले जहां चने की भाजी केवल स्थानीय स्तर पर ही जानी जाती थी, अब इसके स्वास्थ्य लाभों के कारण देश के अन्य हिस्सों में भी इसकी मांग बढ़ रही है। पोषण, स्वाद और परंपरा का अनोखा संगम बन चुकी चने की भाजी सर्दियों में हर थाली की शान बनती जा रही है।

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