क्लास में पंखा चलाने को लेकर 2 छात्राओं ने स्मृति को बेरहमी से पीटा, सीतामढ़ी में कक्षा 4 की बच्ची की मौत

Bihar : बिहार के सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड क्षेत्र के सहोरवा मध्य विद्यालय में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसमें चौथी कक्षा की छात्रा स्मृति कुमारी की सहपाठियों की पिटाई से मौत हो गई। पंखा चलाने को लेकर हुए विवाद के दौरान दोनों छात्राओं ने मिलकर उसकी धड़कनें रोक दीं। घायल छात्रा को इलाज के लिए पटना ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई, जिससे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
मृतक छात्रा का नाम स्मृति कुमारी है, जो विद्यालय में चौथी कक्षा की छात्रा थी। घटना के संबंध में परिजनों ने विद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शिक्षक सक्रिय होते और बीच-बचाव करते, तो यह घटना टल सकती थी। पुलिस ने मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराकर शव को सदर अस्पताल भेज दिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
जानकारी के अनुसार, जितेन्द्र कुमार राय की पुत्री स्मृति का स्कूल में अपनी दो सहपाठियों के साथ विवाद हो गया। बताया गया कि जब स्मृति पंखा चालू करने गई, तो दोनों छात्राओं ने आपत्ति जताई। इसी बात को लेकर कहासुनी बढ़ी और मामला मारपीट में बदल गया। आरोप है कि इन दोनों छात्राओं ने मिलकर उसकी जमकर पिटाई कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही पिता जितेन्द्र कुमार राय मौके पर पहुंचे और घायल बेटी को इलाज के लिए पहले सोनबरसा, फिर सीतामढ़ी और आखिर में पटना ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में गांधी पुल पर ही उसकी सांसें थम गईं।
परिजनों का आरोप है कि जब बच्चों ने मारपीट की जानकारी शिक्षकों को दी, तो भी किसी ने बीच-बचाव नहीं किया। उनका कहना है कि एक सहायक शिक्षक ने यह तक कह दिया कि जो जीतेगा, वही पिटेगा। यदि शिक्षक समय पर हस्तक्षेप करते, तो संभवतः उनकी बेटी की जान बच सकती थी।
मामले में मृतका के पिता ने विद्यालय के शिक्षकों- हरे राम सिंह, अखिलेश कुमार और प्रधानाध्यापक जोगेंद्र सहनी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके रहते इस तरह की घटना होना विद्यालय की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना के बाद परिजनों ने थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है और आगे की कार्रवाई कर रही है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और विद्यालय की व्यवस्था तथा शिक्षक की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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