दुनिया के 23 देशों में फैला कोरोना का नया सिकाडा वेरिएंट, 75 म्यूटेशन ने बढ़ाई चिंता; जानें भारत पर कितना असर.

New Delhi : साल 2020 की वो भयावह यादें एक बार फिर ताज़ा होने लगी हैं। जब दुनिया को लगा कि कोरोना खत्म हो गया है, तभी एक नए वेरिएंट ‘सिकाडा’ (Cicada) ने दस्तक दे दी है। वैज्ञानिकों की भाषा में BA.3.2 कहलाने वाला यह वेरिएंट अब तक दुनिया के 23 देशों में फैल चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वेरिएंट ‘चुपचाप’ (Under the radar) फैल रहा है और इसमें म्यूटेशन की संख्या असामान्य रूप से बहुत ज्यादा है।
क्या है ‘सिकाडा’ वेरिएंट और क्यों पड़ा यह नाम?
सिकाडा असल में Omicron का ही एक वंशज (Descendant) है। इसे ‘सिकाडा’ निकनेम इसलिए दिया गया है क्योंकि सिकाडा नाम का कीड़ा सालों तक जमीन के नीचे छिपा रहता है और अचानक बाहर निकलकर सबको चौंका देता है। ठीक वैसे ही, यह वेरिएंट भी नवंबर 2024 से वैज्ञानिकों की नजरों से बचकर खामोशी से पनप रहा था और अब अचानक बड़े स्तर पर सामने आया है।
75 म्यूटेशन: वैक्सीन को चकमा देने में माहिर
इस वेरिएंट की सबसे डरावनी बात इसके Spike Protein में होने वाले बदलाव हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसमें 70 से 75 आनुवंशिक बदलाव (Genetic Changes) देखे गए हैं।
चुनौती: हमारी मौजूदा वैक्सीन वायरस के पुराने स्पाइक प्रोटीन को पहचानकर हमला करना सीखती हैं।
खतरा: जब प्रोटीन इतना बदल जाए, तो इम्यून सिस्टम वायरस को पहचानने में ‘धोखा’ खा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमारे शरीर के लिए एक ‘कम्पलीट स्ट्रेंजर’ (अजनबी) की तरह है।
दुनियाभर में प्रसार: अमेरिका के 29 राज्यों में मिले निशान
BA.3.2 का सफर नवंबर 2024 में अफ्रीका से शुरू हुआ था। फरवरी 2026 तक यह 23 देशों में पैर पसार चुका है। अमेरिका में इसकी पहचान ‘वेस्टवॉटर मॉनिटरिंग’ (सीवेज के पानी की जांच) के जरिए हुई है। अमेरिका के 29 राज्यों के सीवेज में इसके निशान मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि अस्पतालों में भीड़ बढ़ने से पहले ही यह वायरस समाज में फैल चुका है।
भारत पर कितना असर?
भारत में अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता बढ़ा दी गई है। जीनोम सीक्वेंसिंग संस्था INSACOG ने हाल ही में देश में XFG वेरिएंट के 163 मामले दर्ज किए हैं। XFG भी ओमिक्रॉन का ही एक म्यूटेटेड रूप है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के माध्यम से ‘सिकाडा’ (BA.3.2) के भारत में फैलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या यह पुराने वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक है?
पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर डॉक्टर्स का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि यह वेरिएंट मौत के खतरे को बढ़ाता है। हालांकि:
संक्रमण की रफ्तार: यह पिछले वेरिएंट्स के मुकाबले ज्यादा तेजी से फैलता है।
Long COVID: हर 100 में से 3 मामलों में ‘लॉन्ग कोविड’ के लक्षण दिख रहे हैं।
जोखिम: फेफड़ों की बीमारी (Chronic Lung Disease) से जूझ रहे लोगों के लिए यह गंभीर हो सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
डॉक्टर्स ने चार मुख्य सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- हाथ धोना: इससे संक्रमण का खतरा 21% तक कम हो जाता है।
- बीमार होने पर आइसोलेशन: अगर तबीयत खराब लगे, तो घर पर ही रहें।
- भीड़ से बचें: सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का प्रयोग करें।
- चिकित्सीय सलाह: गंभीर बीमारी वाले लोग अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें।
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