जिस्मानी जरूरत पूरी नहीं कर पाता पति, दवा खाकर बनाता है संबंध…अब शादी के 7 साल बाद पत्नी ने उठाया ये कदम

Bihar : गया जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक मुस्लिम महिला ने शादी के सात साल बाद अपने पति से तलाक की मांग की है। महिला का आरोप है कि उसके पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह उसकी शारीरिक जरूरतें भी पूरी नहीं कर पाता। यह बात उससे शादी से पहले छिपाई गई थी। इस मामले में पीड़िता ने बिहार राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
पीड़िता के अनुसार, उसकी शादी सात साल पहले हुई थी, लेकिन शादी की पहली रात ही पति ने उससे कोई बातचीत नहीं की और न ही शारीरिक संबंध बनाए। कुछ ही दिनों बाद वह मायके चली गई, लेकिन पति ने न तो उसे फोन किया और न ही मिलने आया। बाद में जब वह ससुराल लौटी तो पति से विवाद हुआ और वह फिर मायके आ गई।
महिला का कहना है कि उसे बाद में अपनी जेठानी से पता चला कि उसके पति की मानसिक स्थिति कमजोर है और वह दवाइयों के सहारे ही शारीरिक संबंध बना पाता है। कई बार प्रयास के बावजूद संबंध स्थापित नहीं हो सके, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गई। उसने बताया कि इस कारण वह डिप्रेशन में चली गई और उसे आत्महत्या जैसे विचार आने लगे।
महिला ने आगे बताया कि एक साल बाद वह गर्भवती हुई और एक बेटे को जन्म दिया। इसके बाद भी वह ज्यादातर मायके में ही रही। छह महीने बाद जब वह बच्चे के साथ ससुराल लौटी, तब भी रिश्ते में कोई सुधार नहीं हुआ। ससुराल में जेठानी का व्यवहार भी उसके प्रति ठीक नहीं था। बाद में मदरसे में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया और महिला को एक और मौका देने के लिए कहा गया। कुछ समय तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन फिर पति का वही व्यवहार शुरू हो गया—न बातचीत, न जिम्मेदारी।
इन परिस्थितियों से परेशान होकर महिला ने दोबारा मायके लौटकर तलाक लेने का फैसला किया। वहीं पति का कहना है कि वह अपनी पत्नी को तलाक नहीं देना चाहता। उसने आरोप लगाया कि जब वह अपने बेटे से मिलने ससुराल गया तो पत्नी ने उसे धमकाया और पुलिस में फंसाने की बात कही, जिससे वह डर गया। पति का यह भी कहना है कि वह अपनी आय बढ़ाने के लिए दवा की दुकान खोलने की तैयारी कर रहा है।
मामले को लेकर महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने बताया कि दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि एक बच्चे के भविष्य को देखते हुए पति-पत्नी को साथ रहने का प्रयास करना चाहिए। फिलहाल दोनों को सोचने के लिए समय दिया गया है और मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है। यह मामला फिलहाल महिला आयोग और कानूनी प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है।
No comments