11000 देते हैं और झूठ बोलवाते हैं 25000 का... नोएडा में मजदूरों ने बताया कंपनियों का फर्जीवाड़ा, बोले 4 साल से...
उत्तर प्रदेश के नोएडा में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. सेक्टर-62 और आसपास के इलाकों में हजारों की संख्या में श्रमिक अपनी कंपनियों से बाहर निकलकर सड़कों पर बैठ गए हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कंपनियां उनसे झूठ बोलवाती हैं और जायज हक मांगने पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है.
11000 में गुजारा नामुमकिन, महंगाई की दोहरी मार
प्रदर्शन में शामिल बुजुर्ग महिलाओं और युवाओं का कहना है कि उनकी तनख्वाह पिछले चार सालों से नहीं बढ़ी है. श्रमिकों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि कमरे का किराया, गैस सिलेंडर की कीमतें और राशन की महंगाई ने कमर तोड़ दी है. श्रमिकों को मात्र 11000 रुपये सैलरी मिल रही है. आरोप है कि वेतन वृद्धि के नाम पर कंपनी प्रबंधन महज 20 से 25 रुपये बढ़ाने का मजाक करता है.
श्रमिकों ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब भी कोई सरकारी जांच अधिकारी (लेबर इंस्पेक्टर) आता है, तो उन्हें डरा-धमकाकर गलत जानकारी दिलवाई जाती है. श्रमिकों का दावा है कि उनकी असल सैलरी 11000-15000 है, लेकिन जांच के समय उनसे जबरन यह कहलवाया जाता है कि उन्हें 25000 रुपये मिल रहे हैं. श्रमिकों ने बताया कि उन्हें कभी बोनस नहीं दिया जाता और अधिकारी कथित तौर पर कंपनियों से साठगांठ कर चले जाते हैं.
हक मांगा तो दिखाया गया एग्जिट गेट का रास्ता
आंदोलनकारियों का सबसे बड़ा डर नौकरी जाने का है. उन्होंने बताया कि अगर कोई कर्मचारी सैलरी बढ़ाने या बोनस की बात करता है, तो उसे तुरंत निकाल दिया जाता है. श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी कई लोगों को 6 महीने में ही बाहर कर देती है ताकि उन्हें स्थायी लाभ न देना पड़े. प्रदर्शन शुरू होने के बाद कई श्रमिकों का हिसाब कर दिया गया है और कइयों को अंदर बुलाकर दबाव बनाया जा रहा है.
सेक्टर-62 में पिछले चार घंटों से श्रमिक सड़क जाम कर बैठे हैं, लेकिन उनका आरोप है कि अभी तक कंपनी का कोई भी मालिक या वरिष्ठ अधिकारी उनसे बात करने बाहर नहीं आया है. प्रदर्शन के हिंसक होने और आगजनी की खबरों के बाद पुलिस बल मौके पर मौजूद है और स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहा है, लेकिन श्रमिक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.
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