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खून से सने स्कूल बैग और जूते… ईरान ने वार्ता से पहले ट्रंप को दिखाईं हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें.

 

Iran US Meeting : ईरानी प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व स्पीकर बाघर गालिबफ कर रहे हैं, अमेरिका के साथ शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंच गया है।

इस प्रतिनिधिमंडल का नाम ‘मिनाब 168’ रखा गया है, जो 28 फरवरी को ईरान के मिनाब शहर में हुए उस दर्दनाक हादसे की याद दिलाता है, जिसमें अमेरिकी और इजरायली हमलों में 168 स्कूली बच्चों की जान चली गई थी। इस हादसे की याद में इस प्रतिनिधिमंडल का नाम ‘मिनाब 168’ रखा गया है, और इसका उद्देश्य युद्ध की विभीषिका को खत्म करने का है।

युद्ध के इन अवशेषों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। इन तस्वीरों में खून से सने स्कूल बैग, जूते, सफेद फूल और मृत बच्चों की तस्वीरें नजर आ रही हैं। स्पीकर बाघर गालिबफ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस तस्वीर को साझा करते हुए लिखा, “इस फ्लाइट में मेरे साथी #Miban168″। उन्होंने तस्वीर में बच्चों के सामान और उनके शवों को देखा, जो युद्ध की भयानकता और मानवीय पीड़ा को दर्शाता है।

मिनाब में क्या हुआ था?
मिनाब शहर, जो दक्षिणी ईरान में स्थित है, पर 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हमलों के पहले दिन, यानी युद्ध के पहले दिन, लड़कियों के एक प्राथमिक विद्यालय ‘शजारेह तैय्यिबेह स्कूल’ पर हमला हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में 160 से अधिक बच्चे मारे गए थे। यह हमला ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त आक्रमण का हिस्सा था, और इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया था।

इसी बीच, इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल के बीच शांति वार्ता का आयोजन किया गया है। यह बैठक दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईरान की तरफ से इस बातचीत का नेतृत्व स्पीकर बाघर गालिबफ कर रहे हैं, जिनके साथ अरागची और 12 अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद हैं। ईरानी टीम शनिवार सुबह पाकिस्तान पहुंची, जहां उन्हें विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार, नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री सैयद मोहसिन रजा नकवी ने स्वागत किया।

अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी इस वार्ता में भाग लेंगे। यह बैठक इसलिए भी खास है, क्योंकि यह 2011 के बाद पहली बार है जब कोई अमेरिकी उपराष्ट्रपति पाकिस्तान का दौरा कर रहा है, और इससे दोनों देशों के बीच संबंधों में नई दिशा मिल सकती है।

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