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आपकी उदासी और घबराहट का कारण कहीं थायरॉइड तो नहीं? जानें कैसे एक छोटी सी ग्रंथि बिगाड़ सकती है आपका मानसिक संतुलन.

 

नई दिल्ली: क्या आप बिना किसी ठोस वजह के लगातार उदास रहते हैं? क्या आपको छोटी-छोटी बातों पर घबराहट होती है या आप चीजों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं? अगर हां, तो मुमकिन है कि इसका ताल्लुक आपके दिमाग से नहीं, बल्कि आपकी गर्दन में छिपी एक छोटी सी ग्रंथि ‘थायरॉइड’ से हो। मेडिकल रिसर्च के चौंकाने वाले दावे बताते हैं कि थायरॉइड ग्रंथि में मामूली सी गड़बड़ी न केवल आपके शारीरिक स्वास्थ्य को बल्कि आपके मानसिक सुकून को भी पूरी तरह तहस-नहस कर सकती है। गर्दन के सामने स्थित यह तितली के आकार की ग्रंथि शरीर का वो ‘पावर हाउस’ है, जो मेटाबॉलिज्म से लेकर दिल की धड़कन और दिमाग के केमिकल बैलेंस तक को कंट्रोल करती है।

हाइपोथायरॉइडिज्म: जब शरीर और दिमाग दोनों पड़ जाते हैं सुस्त

डॉक्टरों के अनुसार, जब थायरॉइड ग्रंथि जरूरत के मुताबिक हार्मोन नहीं बना पाती, तो उस स्थिति को हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) कहा जाता है। इसमें शरीर की मशीनरी धीमी पड़ जाती है। इसका असर केवल वजन बढ़ने या थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह व्यक्ति को गहरे डिप्रेशन (अवसाद) की ओर धकेल सकता है। ऐसे मरीजों में काम करने की इच्छा खत्म हो जाना, सोचने की गति धीमी पड़ना और याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षण प्रमुखता से देखे जाते हैं। अक्सर लोग इसे केवल मानसिक बीमारी समझकर इलाज कराते रहते हैं, जबकि जड़ में थायरॉइड की कमी होती है।

दिमाग के ‘हैप्पी केमिकल्स’ का बिगड़ता गणित

थायरॉइड हार्मोन का सीधा कनेक्शन दिमाग के उन रसायनों से है जिन्हें हम ‘फील गुड हार्मोन’ कहते हैं। सेरोटोनिन (Serotonin) और डोपामाइन (Dopamine) हमारे मूड, उत्साह और भावनाओं को स्थिर रखते हैं। जब थायरॉइड का संतुलन बिगड़ता है, तो ये केमिकल्स भी असंतुलित हो जाते हैं। यही वजह है कि थायरॉइड के मरीज अक्सर चिड़चिड़ेपन, बिना बात के रोना आने या अचानक तनाव महसूस करने की शिकायत करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भावनात्मक स्थिरता के लिए थायरॉइड का सही काम करना अनिवार्य है।

इन कारणों से बढ़ता है थायरॉइड और मानसिक तनाव का खतरा

थायरॉइड की गड़बड़ी के पीछे कई कारण छिपे हो सकते हैं। इनमें हाशिमोटो (Hashimoto’s) और ग्रेव्स डिजीज (Graves’ disease) जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा, खान-पान में आयोडीन का असंतुलन, अत्यधिक मानसिक तनाव, प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव और जेनेटिक कारण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। अगर परिवार में पहले से किसी को थायरॉइड है, तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा काफी बढ़ जाता है।

नजरअंदाज न करें ये संकेत, तुरंत कराएं जांच

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि आप लंबे समय से थकान, सुस्ती और मानसिक अशांति महसूस कर रहे हैं, तो इसे केवल ‘वर्क प्रेशर’ या ‘मूड स्विंग’ समझकर नजरअंदाज न करें। एक साधारण ब्लड टेस्ट (TSH Test) से यह पता चल सकता है कि आपकी समस्या की जड़ कहां है। समय रहते उपचार न मिलने पर यह समस्या गंभीर मानसिक विकारों का रूप ले सकती है। सही खान-पान, तनाव मुक्त जीवनशैली और डॉक्टरी परामर्श से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

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