गोरखपुर में ख़ाकी हुई दागदार : 10 साल की मासूम दीपिका की अपहरण के बाद हत्या, डायल-112 का सिपाही निकला कातिल

Gorakhpur : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने इंसानियत और खाकी दोनों को शर्मसार कर दिया है। सदर अस्पताल के सामने से 10 साल की मासूम बच्ची दीपिका के अपहरण और उसके बाद उसकी निर्मम हत्या के मामले में जो सच सामने आया है, उसने पूरे प्रदेश को सकते में डाल दिया है। इस जघन्य वारदात का आरोपी कोई पेशेवर बदमाश या अपराधी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा में तैनात एक सिपाही निकला है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने प्रेसवार्ता में किया सनसनीखेज खुलासा
इस पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. कौस्तुभ ने पुलिस लाइन स्थित व्हाइट हाउस सभागार में एक अहम प्रेसवार्ता की। पत्रकारों को जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कई पुलिस टीमों का गठन किया गया था। पुलिस ने आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी फुटेज और अन्य पुख्ता साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन किया। इन सभी कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की और उसे गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उसे कानून के तहत सबसे कठोर सजा दिलाई जाएगी।
सदर अस्पताल के सामने से हुआ था मासूम का अपहरण
घटना के विवरण के अनुसार 28 जुलाई की रात करीब 10 बजे रिंकू शर्मा की 10 वर्षीय पुत्री दीपिका सदर अस्पताल के सामने से अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गई थी। परिजनों ने जब आसपास तलाश की और कोई सुराग नहीं मिला, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। परिजनों ने पुलिस को बताया कि एक वर्दीधारी व्यक्ति उनकी बच्ची को मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने साथ ले गया है। इस सूचना के मिलते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और जिलेभर में हाई अलर्ट जारी करते हुए सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।
सीसीटीवी फुटेज से सामने आई वर्दीधारी की खौफनाक करतूत
मासूम की तलाश के लिए पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और वाहनों की आवाजाही की बैक-ट्रेसिंग व फ्रंट-ट्रेसिंग की। फुटेज में नजर आ रही मोटरसाइकिल के नंबर के आधार पर जब जांच आगे बढ़ी, तो आरोपी की पहचान अभिषेक यादव के रूप में हुई। मूल रूप से जनपद गाजीपुर का रहने वाला यह आरोपी वर्तमान में उत्तर प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा डायल-112 में आरक्षी (कांस्टेबल) के पद पर तैनात था, जो जनता की सुरक्षा के लिए होती है।
च्यूटहा पुल के पास मिला मासूम का शव और आरोपी की घिनौनी करतूत
पुलिस ने आरोपी सिपाही को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस च्यूटहा पुल के पास पहुंची, जहां से मासूम दीपिका का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी की नीयत बच्ची को लेकर ठीक नहीं थी। जब मासूम ने उसका विरोध किया, तो उसने बल प्रयोग किया जिसके कारण उसकी मौत हो गई। इसके बाद अपनी करतूत छिपाने के लिए उसने शव को एक सुनसान जगह पर फेंक दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की विधिक कार्रवाई तेजी से की जा रही है।
पहले भी जेल जा चुका था आरोपी, फिर कैसे हुई थी विभाग में बहाली?
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल पुलिस विभाग की आंतरिक जांच और निगरानी प्रक्रिया पर उठ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी अभिषेक यादव के खिलाफ इसी साल जनवरी 2025 में एक अन्य नाबालिग बालिका से अभद्रता करने और फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करने का गंभीर मामला दर्ज हुआ था। उस वक्त उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और विभाग की तरफ से निलंबित भी किया गया था। लेकिन कुछ समय बाद उसे न केवल बहाल कर दिया गया, बल्कि जनता की सुरक्षा से जुड़ी बेहद संवेदनशील सेवा यानी डायल-112 पर तैनात कर दिया गया।
अब आम जनता और बुद्धिजीवी वर्ग यह सवाल पूछ रहा है कि आपराधिक इतिहास और गंभीर आरोपों वाले व्यक्ति की पृष्ठभूमि की दोबारा समीक्षा किए बिना उसे इतनी संवेदनशील जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई? यदि समय रहते विभाग ने उचित और कठोर कदम उठाए होते, तो शायद आज एक मासूम की जिंदगी बचाई जा सकती थी।
कानून से ऊपर कोई नहीं, आरोपी की बर्खास्तगी और एनएसए की तैयारी
प्रेसवार्ता के दौरान एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने स्पष्ट किया कि पुलिस की वर्दी का मुख्य उद्देश्य जनता की रक्षा करना है और जो भी इस पवित्र वर्दी के सम्मान को ठेस पहुंचाएगा, उसके खिलाफ सबसे सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले की त्वरित विवेचना पूरी कर इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा ताकि आरोपी को जल्द से जल्द सजा मिल सके। इसके साथ ही, आरोपी सिपाही को पुलिस सेवा से पूरी तरह बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जरूरत पड़ने पर उसके ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
गोरखपुर में भारी आक्रोश, न्याय की मांग तेज
इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे गोरखपुर जिले में शोक और भारी आक्रोश की लहर दौड़ गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों ने सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक आरोपी के लिए फांसी जैसी सजा की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब कानून के रखवाले ही भक्षक बन जाएंगे, तो आम नागरिक अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए किसके पास जाएंगे। यह घटना केवल एक मासूम की हत्या नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सिस्टम की कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा तमाशा है, जिस पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।
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