जोधपुर की ओपन जेल में कैदियों की अनूठी शादी: हत्या के मामले में उम्रकैद काट रहे मूलाराम और सीमा ने लिए सात फेरे, इस तरह शुरू हुई दोनों की प्रेम कहानी?

जोधपुर : राजस्थान के जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल में बुधवार को प्रेम, विश्वास और मानवीय संवेदनाओं की एक बेहद अनोखी और ऐतिहासिक मिसाल देखने को मिली। हत्या के अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे दो सजायाफ्ता कैदी मूलाराम और सीमा कानूनी अनुमति मिलने के बाद परिणय सूत्र में बंध गए। मंडोर स्थित ओपन जेल परिसर में आयोजित इस सादगीपूर्ण विवाह समारोह में मूलाराम दूल्हा बनकर और सीमा दुल्हन के रूप में विवाह स्थल पर पहुंचे, जहां दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और सात फेरे लेकर अपने जीवन की नई शुरुआत की।
जेल प्रशासन और पुलिसकर्मियों ने निभाई बारातियों की भूमिका
इस अनूठे विवाह समारोह में कुल 21 बाराती शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से जेल प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिस और जेल प्रशासन के लोगों ने न सिर्फ इस शादी में गवाह की भूमिका निभाई, बल्कि दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देकर उनके एक खुशहाल और सकारात्मक भविष्य की कामना भी की। खुली जेल के इस पवित्र और मानवीय आयोजन ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
मूलाराम और सीमा की पृष्ठभूमि और सजा का कारण
- मूलाराम (दूल्हा): नागौर जिले के अडसिंगा का रहने वाला मूलाराम खेती से जुड़े परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता का पड़ोसी से विवाद चल रहा था। वर्ष 2017 में मूलाराम पड़ोसी युवक को बाइक पर बैठाकर ले गया था, जिसके बाद उसकी लाश एक टांके से बरामद हुई थी। इस मामले में अदालत ने मूलाराम को हत्या का दोषी मानते हुए अगस्त 2023 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पिछले दो साल से वह मंडोर की ओपन जेल कैंप में सरपंच पद की जिम्मेदारी संभाल रहा था।
- सीमा (दुल्हन): मूल रूप से महाराष्ट्र में मुंबई के पास की रहने वाली सीमा की शादी वर्ष 2016 में जोधपुर के घंटाघर निवासी कौशलराज अरोड़ा से हुई थी। मर्जी के खिलाफ हुई इस शादी से वह नाखुश थी। शादी के महज दो महीने बाद ही सीमा ने सोते हुए पति की दोनों हाथों की नसें धारदार हथियार से काट दी थीं, जिससे पति की मौत हो गई थी। अदालत ने वर्ष 2019 में सीमा को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
अच्छे आचरण के चलते ओपन जेल में आए और हुआ प्यार
दोनों ही बंदी हत्या के अलग-अलग मामलों में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उनके अच्छे आचरण और व्यवहार को देखते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने दोनों को मंडोर की खुली जेल में स्थानांतरित किया था। यहीं साथ रहने के दौरान वे एक-दूसरे के संपर्क में आए और जीवन भर साथ बिताने का फैसला किया। इस शादी के लिए दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
राजस्थान हाई कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता, बंदियों के पुनर्वास (Rehabilitation) और उनके मानवाधिकारों को ध्यान में रखते हुए इस विवाह को मंजूरी दी और आवश्यक पैरोल प्रदान करने के निर्देश जारी किए। हाई कोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने नागौर निवासी मूलाराम की अस्थायी सजा निलंबन याचिका का निस्तारण करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
सहेली के पिता ने निभाया कन्यादान का फर्ज, जेल अधिकारियों की निगरानी में हुई शादी
पति की हत्या के आरोप में साल 2019 से सजा काट रही सीमा के परिवार से महाराष्ट्र से कोई भी इस विवाह में शामिल होने नहीं पहुंच पाया। ऐसे में जेल में बनी सीमा की एक सहेली के पिता (फलोदी के राधाकिशन वागेला) ने आगे आकर एक पिता का फर्ज निभाया और कन्यादान की रस्म पूरी की। कोर्ट के निर्देशानुसार इस समारोह में सीमित मेहमानों को ही शामिल होने की अनुमति दी गई थी।
हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश के बाद जेल प्रशासन ने शादी की सभी तैयारियां पूरी की थीं। ओपन जेल प्रभारी हापू राम की निगरानी में सुरक्षा और आयोजन के सभी पुख्ता प्रबंध किए गए, जबकि सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह शेखावत ने पूरे कार्यक्रम की लगातार मॉनिटरिंग की। यह आयोजन इस बात का एक बड़ा उदाहरण बना है कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था केवल सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों के सामाजिक पुनर्स्थापन और उन्हें सम्मानपूर्वक नया जीवन जीने का अवसर प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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