आउटसोर्स भर्ती पर सरकार का बड़ा फैसला, वित्त विभाग की मंजूरी के बिना नहीं होगी कर्मचारियों की नई नियुक्ति

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी सरकारी विभाग, बोर्ड, निगम या सरकारी कॉलेज में वित्त विभाग की पूर्व लिखित मंजूरी के बिना नई आउटसोर्स भर्ती नहीं की जा सकेगी। सरकार के निर्देशाों के अनुसार आउटसोर्स व्यवस्था केवल अस्थायी जरूरत पूरी करने का माध्यम है, इसे स्थायी रोजगार का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
इस संबंध में वित्त विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन्हें लागू करते हुए उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी सरकारी डिग्री और संस्कृत कॉलेजों के प्राचार्यों को भी आदेश भेज दिए हैं और इनका सख्ती से पालन करने को कहा है। इसके साथ ही 13 अक्तूबर, 2022 को जारी पुराने आदेश रद्द कर दिए गए हैं। सरकार ने कहा है कि कई विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या स्वीकृत पदों से अधिक हो गई है या फिर वहां भी आउटसोर्स कर्मचारी रखे गए हैं, जहां नियमित पद पहले से भरे हुए हैं। ऐसे मामलों की अब समीक्षा कर कर्मचारियों की संख्या वास्तविक जरूरत के अनुसार तय की जाएगी।
नए निर्देशों के अनुसार जिन पदों पर नियमित भर्ती की जा चुकी है, वहां आउटसोर्स कर्मचारी नहीं रखे जाएंगे। विभागों को खाली स्थायी पदों पर जल्द से जल्द नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आउटसोर्स व्यवस्था केवल अस्थायी, मौसमी, गैर-कोर या विशेष तकनीकी सेवाओं तक सीमित रहे।
हालांकि वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं फिलहाल जारी रहेंगी, लेकिन यह व्यवस्था केवल नियमित भर्ती पूरी होने तक और विभागीय आवश्यकता की समय-समय पर समीक्षा के आधार पर ही जारी रहेगी। सबसे अहम निर्देश यह है कि अब वित्त विभाग की पूर्व लिखित मंजूरी के बिना कोई भी नया आउटसोर्स कर्मचारी नहीं रखा जा सकेगा। यदि किसी विभाग ने बिना अनुमति के ऐसी नियुक्ति की तो उसे अनधिकृत माना जाएगा और संबंधित मामले की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ये निर्देश हाल के सुप्रीम कोर्ट और हिमाचल हाईकोर्ट के फैसलों तथा संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखकर जारी किए गए हैं।
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