भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा एक्शन, 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

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भोजपुर: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सोमवार को बड़ी कार्रवाई हुई। कोर्ट ने मामले में नामजद तत्कालीन SDM, SDPO, थानाध्यक्ष, दरोगा और STF के जवानों समेत कुल 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
सिविल कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भरत तिवारी की ओर से अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने मामले की जांच को लेकर पुलिस अधीक्षक से अब तक की जांच रिपोर्ट भी मांगी है।
पुलिस अधिकारियों समेत 11 लोग आरोपी
भरत तिवारी मामले में शाहपुर थाने में FIR दर्ज की गई थी। FIR में तत्कालीन जगदीशपुर SDPO राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच भी कराई है।
17 जून को हुआ था एनकाउंटर
भरत तिवारी का 17 जून 2026 को बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। परिजनों का आरोप है कि भरत ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस और STF ने उस पर गोली चला दी।
भरत की मां आशा देवी ने एनकाउंटर का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया था। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया और सरकार ने इसकी जांच शुरू कराई।
हालांकि, पुलिस का पक्ष था कि भरत ने भागने की कोशिश की थी और इसी दौरान मुठभेड़ हुई। मामले में सामने आए आरोपों और पुलिस के दावे की जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
जमीन और पुनर्वास को लेकर था विवाद
बताया गया कि एनकाउंटर से पहले भरत तिवारी गंगा के कटाव के बाद दोबारा बसाए गए परिवारों के पुनर्वास और गड्ढों वाली जमीन पर मिट्टी भराई के मुद्दे को लेकर प्रशासन से सवाल उठा रहे थे। इसी सिलसिले में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की थी।
मुठभेड़ को लेकर विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज से जांच कराई। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां भरत के परिजनों ने CBI जांच की मांग की थी। अदालत ने उन्हें इस संबंध में पटना हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था।
परिजनों ने धमकी और मारपीट के लगाए आरोप
मामले के बीच भरत तिवारी की मां आशा देवी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद धमकियां मिलने का आरोप लगाया था। आशा देवी और उनके परिजनों की ओर से सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकी और एक रिश्तेदार के साथ मारपीट के आरोपों को लेकर FIR भी दर्ज कराई गई थी।
फिलहाल कोर्ट की ओर से 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है। पुलिस से मांगी गई जांच रिपोर्ट और अदालत की आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें हैं।
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