अमेरिका में पयागपुर के समरेंद्र रॉय का कमाल, AI और न्यूक्लियर तकनीक में रचा इतिहास.

प्रोफेसर डॉ बहुउद्दीन आलम, यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलिनॉय अरबना शैंपेन के साथ समरेंद्र रॉय
- अमेरिका में बना नया इतिहास: पयागपुर के समरेंद्र रॉय ने AI और न्यूक्लियर तकनीक में रचा वैश्विक कीर्तिमान
- IIT बॉम्बे में 9.57 CGPA से बने गोल्डन बॉय, UIUC में एक साल में PhD क्वालिफाइंग परीक्षा पास; प्रतिष्ठित Nature Portfolio के जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
Bahraich, Payagpur Tehsil : प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे संस्थान की मोहताज नहीं होती। यदि जड़ों में हुनर और आंखों में बड़ा सपना हो तो गांव की पगडंडियां भी अमेरिका तक पहुंचने का रास्ता बन सकती हैं। पयागपुर के कृष्ण नगर कॉलोनी निवासी समरेंद्र रॉय ने अपनी असाधारण प्रतिभा और कड़ी मेहनत से इस बात को सच साबित कर दिखाया है। महज 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने विज्ञान और तकनीक की दुनिया में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिस पर पूरे क्षेत्र को गर्व है।
अमेरिका की प्रतिष्ठित University of Illinois Urbana-Champaign (UIUC) में न्यूक्लियर, प्लाज्मा एवं रेडियोलॉजिकल इंजीनियरिंग तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में शोध कर रहे समरेंद्र रॉय और उनकी वैज्ञानिक टीम का शोधपत्र Nature Portfolio के प्रतिष्ठित जर्नल npj Artificial Intelligence में प्रकाशित हुआ है। शोध का विषय है— “Agentic Physical AI Toward a Domain-Specific Foundation Model for Energy Systems: A Case Study on Nuclear Reactor Control”।
IIT बॉम्बे में 9.57 CGPA से बनाई अलग पहचान
समरेंद्र रॉय की उपलब्धियों की शुरुआत देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान IIT बॉम्बे से हुई। अध्ययन के दौरान उन्होंने 9.57 CGPA हासिल कर अपनी असाधारण शैक्षणिक क्षमता का परिचय दिया। इसके बाद उनका चयन अमेरिका की प्रतिष्ठित UIUC में PhD के लिए हुआ।
विदेश में उच्च शिक्षा की चुनौतीपूर्ण राह पर भी समरेंद्र ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने महज एक वर्ष के भीतर PhD क्वालिफाइंग परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली। इतनी कम अवधि में इस महत्वपूर्ण चरण को पार करना उनकी मेहनत, विषय पर पकड़ और शोध क्षमता को दर्शाता है।
AI और न्यूक्लियर रिएक्टर कंट्रोल पर है शोध
समरेंद्र और उनकी टीम का शोध ऊर्जा प्रणालियों में Agentic Physical AI और डोमेन-विशिष्ट फाउंडेशन मॉडल के उपयोग पर केंद्रित है। शोध में न्यूक्लियर रिएक्टर कंट्रोल को एक केस स्टडी के रूप में लिया गया है। सरल शब्दों में कहें तो शोध का उद्देश्य ऐसे AI सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ना है, जो जटिल ऊर्जा प्रणालियों को समझने, परिस्थितियों का विश्लेषण करने और नियंत्रण संबंधी निर्णयों में सहायता करने में सक्षम हो।
न्यूक्लियर रिएक्टर जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी तकनीक भविष्य में सुरक्षा, दक्षता और संचालन संबंधी निर्णयों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें अत्याधुनिक AI तकनीक को ऊर्जा और परमाणु प्रणालियों जैसे जटिल वैज्ञानिक क्षेत्र से जोड़ा गया है।
Nature Portfolio में प्रकाशन बड़ी उपलब्धि
वैज्ञानिक जगत में Nature Portfolio के प्रतिष्ठित जर्नलों में शोध प्रकाशित होना किसी भी शोधकर्ता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। इसके लिए शोध की गुणवत्ता, वैज्ञानिक महत्व और मौलिकता सहित कई स्तरों पर समीक्षा की जाती है। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर समरेंद्र रॉय और उनकी टीम के शोध को स्थान मिलना उनके वैज्ञानिक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का प्रमाण है।
शोधपत्र में समरेंद्र रॉय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनकी इस उपलब्धि ने पयागपुर से लेकर बहराइच और देशभर में उनके शुभचिंतकों को गौरवान्वित किया है।
ग्रामीण अंचल के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
समरेंद्र की सफलता केवल एक परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचल के उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह संदेश दिया है कि लगन, अनुशासन और निरंतर मेहनत के दम पर छोटे शहर और गांव से निकलकर भी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक संस्थानों में अपनी पहचान बनाई जा सकती है। समरेंद्र के पिता शरत चंद्र रॉय और माता दीपा रॉय, दोनों शिक्षक हैं।
बेटे की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है। शिक्षकों, विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने समरेंद्र को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। सदर विधायक श्रीमती अनुपमा जायसवाल, पयागपुर विधायक सुभाष त्रिपाठी, ब्लॉक प्रमुख अजीत प्रताप सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष राहुल रॉय, रणविजय सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार सिंह, बीईओ चंद्रशेखर चौरसिया, शिक्षक नेता संतोष कुमार सिंह सहित क्षेत्र के तमाम लोगों ने समरेंद्र रॉय की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है।
समरेंद्र की कहानी आज पयागपुर के लिए गर्व का विषय है और ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए यह संदेश भी कि सपने अगर बड़े हों और मेहनत लगातार जारी रहे तो मंजिल की दूरी मायने नहीं रखती—गांव से निकलकर भी दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक मंच तक पहुंचा जा सकता है।
No comments