हे गंगा! अब तो रहम करो, बिहार में दरिया का रौद्र रूप, कहीं घर समाए तो कहीं नदी पार कर निकला जनाजा,बाढ़ के कहर से त्राहिमाम
बिहार में नदियों के बदले मिजाज ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कहीं गंगा का जलस्तर बढ़ने से त्राहिमाम मचा है तो कहीं पानी घटते ही कटाव ने तबाही मचा दी। भागलपुर से लेकर किशनगंज, बक्सर, बेगूसराय और औरंगाबाद तक बाढ़, कटाव और जलजमाव ने लोगों की जिंदगी को बेहाल कर दिया है।
कई इलाकों में लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
भागलपुर के सबौर प्रखंड की फरका पंचायत के इंग्लिश गांव के वार्ड नंबर तीन में रविवार अहले सुबह गंगा ने भीषण कटाव शुरू कर दिया। देखते ही देखते करीब 15 मकान कटाव की जद में आ गए और एक-एक कर गंगा में समा गए। इस दौरान एक परिवार के लोग बाल-बाल बच गए और किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकले। घर का सामान अंदर ही रह गया और लोगों की आंखों के सामने उनका आशियाना गंगा की धारा में समाहित हो गया।
सूचना मिलते ही सबौर की सीओ दिव्या कुमारी मौके पर पहुंचीं। कटावरोधी काम शुरू कराया गया और खतरे की जद में आने वाले मकानों को खाली कराया गया। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को चिह्नित कर सरकारी सहायता दिलाने की बात कही है। जरूरी सामान उपलब्ध कराया गया है, जबकि सामुदायिक किचन के लिए जिला स्तर पर पत्र भेजा गया है।
जहानाबाद में दरधा नदी का पानी अचानक बढ़ने से जाफरगंज पुल के ऊपर से करीब दो फीट पानी बह रहा है। आवागमन प्रभावित होने के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर पुल पार कर रहे हैं। हालात को देखते हुए यहां किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
किशनगंज के बहादुरगंज प्रखंड में नोदिया टोली-बैसा घाट पर पुल नहीं होने की कीमत ग्रामीणों को बरसात में जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ रही है। सोमवार को शहनसवी बेगम के शव को परिजन कंधे पर लेकर खकवा नदी पार कर बैसा कब्रिस्तान पहुंचे। दर्जनों गांवों के हजारों लोगों के लिए जनाजा नदी पार कर ले जाना मजबूरी बना हुआ है। नदी उफान पर हो तो यह सफर और भी खतरनाक हो जाता है।
बक्सर में गंगा का दबाव बढ़ने से सहायक नदियां भी उफान पर हैं। कर्मनाशा नदी का पानी सिकरौल गांव के रास्ते पर करीब तीन फीट तक चढ़ गया है। ग्रामीण इसी रास्ते से जोखिम उठाकर आवाजाही कर रहे हैं।
बेगूसराय में फिलहाल गंगा का जलस्तर घट रहा है, लेकिन इलाहाबाद, वाराणसी और बक्सर में पानी बढ़ने के कारण अगले दो दिनों में यहां फिर जलस्तर बढ़ने की आशंका है। बछवाड़ा, तेघड़ा, बरौनी, मटिहानी, बलिया और साहेबपुर कमाल के दियारा इलाकों में बाढ़ का असर है। शाम्हो प्रखंड पूरी तरह प्रभावित है और करीब 50 हजार लोग बाढ़ के पानी से घिरे बताए जा रहे हैं।
औरंगाबाद में लगातार बारिश और झारखंड के पहाड़ी इलाकों से आ रहे पानी के कारण अदरी और पुनपुन समेत कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। निचले इलाकों में पानी घुस गया है। उधर बाणसागर जलाशय के दो और रेडियल गेट खोल दिए गए हैं। अब कुल आठ गेट दो-दो मीटर तक खुले हैं और करीब 3277 क्यूमेक्स पानी सोन नदी में छोड़ा जा रहा है।
इस पानी का असर सबसे पहले रोहतास में पड़ने की आशंका है। डेहरी और इंद्रपुरी बराज के आसपास हाई अलर्ट के साथ तटीय गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके बाद औरंगाबाद, अरवल, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, गया, वैशाली और पटना के निचले इलाकों पर भी असर पड़ सकता है।प्रशासन ने लोगों से नदी से दूर रहने, अनावश्यक नाव यात्रा नहीं करने और बच्चों को नदी किनारे नहीं जाने देने की अपील की है। बाढ़ और कटाव के इस बदले मंजर में एहतियात ही सबसे बड़ा बचाव है।
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