15,000 से बढ़कर हुई 25,000 की लिमिट: जानिए आपके PF खाते और सैलरी पर क्या पड़ेगा असर

सरकार ने हाल ही में ईपीएफओ (EPFO) के नियमों में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। इस नए कदम के तहत अब ईपीएफओ कवरेज के लिए बेसिक सैलरी की सीमा को बढ़ाकर सीधे 25,000 रुपये कर दिया गया है।
बता दें कि इस सीमा में महंगाई भत्ता भी शामिल होता है, जबकि पहले यह तय सीमा केवल 15,000 रुपये तक ही हुआ करती थी। सरकार के इस अहम और बड़े फैसले से प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले देश के करीब 51 लाख नए कर्मचारी सीधे तौर पर ईपीएफओ के दायरे में आ जाएंगे, जिससे उनके रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले वित्तीय फायदों का दायरा काफी ज्यादा बढ़ गया है।
कर्मचारियों को मिलते हैं ये तीन बड़े फायदे
प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले लोगों के लिए ईपीएफओ एक बेहद काम की और सुरक्षित रिटायरमेंट स्कीम है। इसके मुख्य रूप से तीन बड़े और अहम फायदे होते हैं। पहला फायदा यह होता है कि जब कोई कर्मचारी रिटायर होता है, तो उसके ईपीएफ अकाउंट में जमा पूरा पैसा उसे एकमुश्त मिल जाता है। दूसरा बड़ा फायदा मासिक पेंशन का है, जिसके तहत रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को हर महीने पेंशन दी जाती है, हालांकि इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। तीसरा अहम फायदा एंप्लॉयीज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस यानी EDLI स्कीम के तहत मिलने वाला जीवन बीमा कवर है।
नई 25,000 रुपये की लिमिट का पूरा गणित
ईपीएफओ के मौजूदा नियमों के मुताबिक, हर कर्मचारी की बेसिक सैलरी से 12 फीसदी पैसा काटा जाता है, जो सीधे उसके ईपीएफ खाते में जमा होता है। इसके साथ ही कंपनी यानी एंप्लॉयर को भी अपनी तरफ से 12 फीसदी का योगदान देना होता है। हालांकि, कंपनी के इस 12 फीसदी योगदान को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें से 8.33 फीसदी हिस्सा कर्मचारी के पेंशन फंड में जाता है और बाकी बचा हुआ 3.67 फीसदी हिस्सा ईपीएफ अकाउंट में जमा होता है।
नए नियम लागू होने के बाद अब वे सभी कर्मचारी भी अनिवार्य रूप से ईपीएफओ के दायरे में आ जाएंगे जिनकी बेसिक सैलरी 25,000 रुपये तक है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की बेसिक सैलरी 25,000 रुपये है, तो अब उसकी सैलरी से 12 फीसदी के हिसाब से हर महीने 3,000 रुपये कटेंगे। ठीक इतना ही पैसा कंपनी को भी अपनी तरफ से जमा करना होगा और सभी कंपनियों के लिए इस नियम का पालन करना अब पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है।
ज्यादा बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 40,000 रुपये या 50,000 रुपये है, उनके ऊपर इस नए नियम का क्या प्रभाव पड़ेगा? फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई कंपनियां ऐसी होती हैं जो पहले से ही कर्मचारी की एक्चुअल यानी पूरी बेसिक सैलरी के आधार पर पीएफ का पैसा काटती हैं। इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी 40,000 रुपये है और कंपनी पहले से ही पूरी बेसिक पर 12 फीसदी का नियम लागू कर रही है, तो आपकी टेक होम सैलरी पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा। आपकी 40,000 रुपये की सैलरी का 12 फीसदी यानी 6,000 रुपये आपके पीएफ खाते में जमा होंगे और कंपनी भी अपनी तरफ से 6,000 रुपये डालेगी, जिससे आपके रिटायरमेंट के फायदे सुरक्षित रहेंगे।
क्या आपकी टेक होम सैलरी सच में घट जाएगी?
इसके विपरीत, अगर आपकी कंपनी यह तय करती है कि वह केवल 25,000 रुपये की नई वेज लिमिट का ही सख्ती से पालन करेगी, तो आपकी इन-हैंड सैलरी पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। इस स्थिति में आपकी सैलरी से पीएफ के नाम पर सिर्फ 3,000 रुपये ही कटेंगे और कंपनी भी अपनी तरफ से 3,000 रुपये का ही योगदान देगी। ऐसा होने पर आपके बैंक खाते में आने वाली नेट सैलरी यानी टेक होम सैलरी पहले के मुकाबले बढ़ या घट सकती है।
पुराने नियम के तहत कंपनियां अधिकतम 15,000 रुपये की लिमिट पर ही पैसा काटती थीं, जिससे पीएफ कम कटता था और हाथ में ज्यादा पैसे आते थे। अब लिमिट बढ़कर 25,000 रुपये होने से पीएफ का डिडक्शन बढ़ सकता है। यही बात 50,000 रुपये की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों पर भी लागू होती है, जहाँ बेसिक सैलरी अधिक होने के बावजूद कुछ कंपनियां पीएफ योगदान के लिए अधिकतम 25,000 रुपये की सीमा का ही इस्तेमाल कर सकती हैं।
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