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दिल में 1 लीटर से ज्यादा भरा था मवाद, फेफड़े पर जमी थी परत, नहीं आ रही थी सांस, फिर डॉक्टरों ने...

दिल में 1 लीटर से ज्यादा भरा था मवाद, फेफड़े पर जमी थी परत, नहीं आ रही थी सांस, फिर डॉक्टरों ने...


खनऊः पांच महीने पहले सड़क हादसे में घायल मरीज को एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है. मरीज सांस की गंभीर समस्या से जूझ रहा था. मरीज के सीने में करीब 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद जमा हो चुका था और संक्रमण के चलते फेफड़े पर प्लूरल पील की मोटी परत जमने से वह पूरी तरह से बैठ गया था.


डॉक्टरों ने बहुत ही नाजुक स्थिति में जटिल वीडियो असिस्टेड थोरेकोस्कोपिक सर्जरी के जरिए मवाद को निकाला और फिर फेफड़े को वापस से सांस लेने लायक बनाया. हालांकि यह ऑपरेशन बहुत पहले ही हो गया था. 14 सितंबर को मरीज को पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद घर भेज दिया गया.

सड़क हादसे में घायल हुए थे मेवालाल
दरअसल, बीते 8 अप्रैल को सोनभद्र के रहने वाले 50 वर्षीय मेवालाल बाइक और कार की भिड़ंत में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे. मेवालाल मेडिकल स्टोर चलाते हैं. डॉक्टरों ने जब जांच की तो पता चला कि मेवालाल पायोथेरेक्स से पीड़ित था. सीने के भीतर 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद भरा हुआ था और प्लूरल पील की सख्त परत ने फेफड़े को बुरी तरह जकड़ रखा था. मरीज पहले से हाई ब्लड प्रेशर, अनकंट्रोल डायबीटिज और हार्ट पेशेंट था. साल 2023 में एंजियोप्लास्टी भी हो चुकी थी. ऐसे में मेवालाल की पारंपरिक ओपन सर्जरी मरीज की जान के लिए बड़ा जोखिम बन सकती थी.

ऑपरेशन के दौरान क्या थी चुनौती
जब ऑपरेशन का फैसला किया गया तो सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीज को सिंगल-लंग वेंटिलेशन पर रखना था. इसके बावजूद सर्जिकल टीम ने न्यूनतम चीरा लगाकर VATS टेक्नीक से मवाद को पूरी तरह से निकाला. फिर फेफड़े को जकड़ने वाली मोटी परत को हटाकर डिकॉर्टिकेशन किया गया. यह जटिल सर्जरी डॉ. अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में डॉ. आदित्य सिंह और डॉ. वरुण गुप्ता ने की. एनेस्थीसिया व क्रिटिकल केयर का अहम जिम्मा डॉ. गणपत और डॉ. रफात शमीम ने संभाला.

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