मोबाइल पर झुकी गर्दन और चढ़ा गया 22 किलो का बोझ, अपाहिज होने लगी है रीढ़ की हड्डी, डॉक्टर ने बताया क्या है बचने के उपाय
Neck Bend on Mobile: आजकल शायद ही कोई वयस्क व्यक्ति होगा जो मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करता हो. मोबाइल फोन से कितना फायदा होता है यह तो आप जानते ही है लेकिन इसका कितना नुकसान है, यह आप शायद ही जानते होंगे.
एक अध्ययन के मुताबिक जब आप अपने फोन की स्क्रीन पर कुछ देखते हैं या पढ़ते हैं तो इससे आपकी गर्दन फोन पर झुकती है. इस झुकाव के कारण आपकी गर्दन पर 22 किलो के बराबर भार भी चिपक जाता है. यह ऐसा ही है जैसा आप अपनी गर्दन पर किसी 5-6 साल के बच्चे को बिठाए हुए हैं. बच्चे को तो आप कुछ समय बाद नीचे उतार देते हैं लेकिन फोन की स्क्रीन के लिए आपकी गर्दन हमेशा झुकी रहती है. दिन में कम से कम 5-7 घंटे आपकी गर्दन पर 22 किलो का वजन चढ़ा रहता है. इसका क्या परिणाम होगा यह आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं. एलएनजेपी अस्पताल में न्यूरो एनेस्थेसिया की कंस्लटेंट फिजिशियन डॉ. भुवना आहूजा इसके बारे में विस्तार से बताती हैं.
रीढ़ की हड्डी अपाहिज बन सकती है
डॉ. भुवना आहूजा ने बताया कि मेडिकल साइंस की भाषा में जब गर्दन ज्यादातर समय झुकी रहती है तो इसे टेक्स्ट नेक सिंड्रोम कहा जाता है. लगातार सिर झुकाकर फोन चलाने की यह आदत आपकी सर्वाइकल रीढ़ की हड्डी के नेचुरल कर्व को बिगाड़ देती है, जिससे कम उम्र में ही गंभीर दर्द, डिस्क खिसकने और नसों के दबने का खतरा बढ़ जाता है. यह आदत एक तरह से रीढ़ की हड्डी को अपाहिज बना देती है. वास्तव में इंसान के सिर का औसत वजन 4.5 से 5 किलोग्राम होता है. हमारा शरीर इस वजन को तब आसानी से संभाल लेता है, जब सिर सीधा रहता है. लेकिन पिछले कुछ दशकों में कंप्यूटर और खासकर स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल ने हमारी गर्दन पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालना शुरू कर दिया है. लगातार नीचे झुककर फोन देखने से गर्दन की हड्डी और मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे गर्दन में दर्द और जकड़न होने लगती है.
एक नहीं कई तरह की दिक्कतें होंगी
डॉ. भुवना आहूजा ने बताया कि सामान्यतया हमारी रीढ़ की हड्डी का आकार अंग्रेजी के सी अक्षर की तरह मुड़ी हुई रहती है. इसे कर्व कहते हैं. लेकिन अगर इस पर लगातार अत्यधिक दबाव पड़ता रहे तो यह झुकाव सीधा होने लगता है. इस बीमारी को हाइपोलोडोसिस या स्ट्रेटनिक ऑफ सर्वाइकल स्पाइन कहा जाता है. गर्दन से लेकर हिप्स तक रीढ़ की हड्डी 24 खंडों तक बंटी रहती है. इसमें सिर से लेकर कंधों तक जो हड्डियां होती है उन्हें सर्विकल ब्रर्टिब्रा कहा जाता है. ये 7 होती हैं. जब गर्दन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है तो C1 से C7 वर्टेब्रा के बीच में मौजूद डिस्क पर बहुत जोर पड़ने लगता है.
इससे डिस्क का अगला हिस्सा दबने लगता है और पीछे का हिस्सा बाहर की ओर निकल कर उभार बनाने लगता है. इसे डिस्क बल्ज कहा जाता है. यानी जब गर्दन पर लगातार ज्यादा दबाव पड़ेगा तो रीढ़ की हड्डी में जो डिस्क होती है उसमें उभार बनने लगेगा जो बहुत पेनफुल होगा. इतना ही नहीं इससे डिस्क के अपनी जगह से छिटकने का भी खतरा रहता है. इसे हर्निएशन कहा जाता है. ये सब जब होगा तो पूरे कंधे के हिस्से में दर्द होने लगेगा. वहां की मांसपेशियों में हार्डनेस आने लगेगा.इससे छाती और गर्दन के आसपास की पेशियां छोटी और कड़ी होने लगेगी और कंधे आगे की ओर झुक जाएगा. वहीं इसमें कड़ापन आने के कारण वहां तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचेगी और लैक्टिक एसिड का जमाव होने लगेगा. धीरे-धीरे वहां गांठें बनने लगेगी जो बेहद दर्द भरा होगा. इस स्थिति में अगर आपने इलाज नहीं कराया तो सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की बीमारी हो जाएगी.

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉ. भुवना आहूजा कहती हैं कि अगर फोन पर आप बहुत देर तक झुककर काम करते हैं तो शुरुआत से इसके लक्षण दिखने लगेंगे. इसमें सबसे पहले तो गर्दन में आपको हल्का-हल्का दर्द रहेगा जो धीरे-धीरे असहनीय बनने लगेगा. गर्दन से लेकर कंधों, हाथों और उंगलियों तक में सुन्नपन आने लगेगा. कभी-कभी झुनझुनी होने लगेगी. वर्टेब्रा को आपस में जोड़ने वाले फेसेट जॉइंट्स पर सूजन बनने लगती है जिससे कंधा सूजा हुआ महसूस होता है. इससे कार्टिलेज का घिसाव शुरू हो जाता है, जिससे गर्दन को घुमाने में जकड़न होने लगती है. गर्दन के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों में तनाव के कारण वहां से गुजरने वाली ऑक्सिपिटल नसें दब जाती हैं, जिससे सिर के पिछले हिस्से में धड़कन जैसा दर्द महसूस होता है. इन सबके कारण आपको चक्कर भी महसूस होता है और जी भी मितलाने लगता है. आंखों की समस्या तो होती ही है.
जब दर्द बढ़ने लगे तो क्या करें
अगर इन कारणों से गर्दन में दर्द बढ़ने लगे तो सबसे पहले मोबाइल की स्क्रीन या कंप्यूटर की स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित करें. डॉ. भुवना आहूजा कहती हैं कि काम के सिलसिले में हर व्यक्ति को कंप्यूटर पर काम करना ही पड़ता है. ऐसे में कंप्यूटर और अपनी आंख की दूरी को बढ़ा दें. हमेशा चेयर पर कमर सीधी कर रखें. जब भी मोबाइल पर स्क्रीन देखें तो मोबाइल और आंखों के बीच में पर्याप्त दूरी बनाएं और मोबाइल को आंखों की सीध में रखें. फोन चलाते समय कोहनियों को मेज या किसी कुशन या तकिए पर टिकाकर रखें, जिससे गर्दन और कंधों का तनाव कम हो. इसके लिए 20-20-20 नियम अपनाएं. इसका मतलब होता है कि अगर आप लेपटॉप या मोबाइल पर काम कर रहे हैं तो पहला 20 मिनट काम कीजिए. इसके बाद 20 सेकेंड के लिए इन चीजों से पूरी तरह दूर रहिए और अगला 20 सेकेंड कंधे की एक्सरसाइज कीजिए. इसमें अपनी गर्दन को धीरे-धीरे पीछे और अगल-बगल घुमाएं. एक्सरसाइज करने के लिए आप स्टोरी के साथ दिए गए वीडियो को देखें.
क्या एक्सरसाइज करें
- सीधे बैठें. सामने देखें और अपनी ठोड़ी को बिना सिर झुकाए पीछे की तरफ खींचें. 5 सेकंड रोकें और इसे 10 बार दोहराएं.
- दोनों कंधों को पीछे की ओर ले जाकर पीठ के पिछले हिस्से को आपस में सटाने की कोशिश करें. इससे छाती की जकड़न खुलती है.
- सिर को धीरे-धीरे दाएं कंधे की तरफ और फिर बाएं कंधे की तरफ झुकाकर 15-20 सेकंड होल्ड करें.
- काम करते समय ऐसी कुर्सी का उपयोग करें जो आपकी पीठ के निचले और ऊपरी हिस्से को पूरा सहारा दे.
- यदि आप लैपटॉप पर लंबा काम करते हैं, तो स्टैंड और एक्सटर्नल कीबोर्ड-माउस का उपयोग करें.
- बैठते या खड़े होते समय अपनी पीठ सीधी, कंधे पीछे और ठोड़ी को थोड़ा अंदर की ओर रखें.

No comments