खत्म होने वाली है रसोई गैस? जानिए 26 अक्टूबर को क्यों थमने वाले हैं पहिए

रसोई गैस का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए एक बहुत ही हैरान करने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। अगर आपके घर में भी एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल होता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।
एलपीजी सिलेंडर बेचने वाले वितरकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अब सरकार और तेल कंपनियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बड़ा ऐलान कर दिया है। वितरकों की इस आक्रामक नाराजगी के कारण आम जनता की परेशानी बढ़ सकती है।
क्या हैं गैस वितरकों की मुख्य मांगें?
गैस वितरकों की नाराजगी की मुख्य वजह उनकी लंबे समय से रुकी हुई मांगें हैं। वितरकों की प्रमुख मांगों में सिलेंडर के डिलीवरी चार्ज में तुरंत 75 रुपये की बढ़ोतरी करना और केवाईसी यानी KYC के एवज में 236 रुपये दिए जाने जैसी बातें शामिल हैं। वितरकों का साफ कहना है कि महंगाई के इस दौर में उनका काम करना मुश्किल होता जा रहा है, इसलिए इन चार्जेज में बढ़ोतरी बेहद जरूरी है।
26 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल और जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन
अपनी इन तमाम मांगों को मनवाने के लिए गैस वितरकों ने आगामी 26 अक्टूबर को पूरे देश में चक्का जाम यानी महा-हड़ताल करने की कड़ी चेतावनी दी है। इसके साथ ही उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर जोरदार धरना प्रदर्शन करने का भी आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
अपनी इन्हीं मांगों के समर्थन में वितरकों का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और देश के राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन एडीएम प्रशासन डॉ. वैभव शर्मा को सौंपा। वितरकों का कहना है कि वे लोग बीते 1 सितंबर से ही चरणबद्ध तरीके से अपना आंदोलन चला रहे हैं, लेकिन अब बात आर-पार की हो चुकी है।
तेल कंपनियों की नीतियों पर भड़के वितरक
गैस वितरकों का गुस्सा सिर्फ डिलीवरी चार्ज तक सीमित नहीं है, बल्कि वे तेल कंपनियों के रवैये से भी बेहद नाराज हैं। वितरकों का साफ आरोप है कि नॉन-फ्यूल रिलेटेड या एआरबी उत्पादों की बिक्री के लिए उन पर भारी दबाव डाला जा रहा है, जिसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, तेल कंपनियों द्वारा नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री को लेकर वितरकों पर किसी भी तरह का बिक्री लक्ष्य यानी सेल्स टारगेट तय नहीं किया जाना चाहिए। इंडेंट की प्रक्रिया में जबरन किए जा रहे बदलावों पर भी पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने एफटीएल की बिक्री को लेकर भी कड़ी आपत्ति जताई है और मांग की है कि पीएनजी के अनिवार्य उपयोग की व्यवस्था को भी पूरी तरह वापस लिया जाए।
जिला प्रशासन की अपील और आगे का हाल
गैस वितरकों की इन तमाम समस्याओं और चरमराती गैस वितरण व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। हाल ही में जिला पूर्ति अधिकारी अजय प्रताप सिंह के साथ गैस वितरकों की एक बेहद अहम बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक के दौरान जिला पूर्ति अधिकारी अजय प्रताप सिंह ने गैस वितरकों से साफ तौर पर अपील की है कि वे रसोई गैस सिलेंडर की डिलीवरी व्यवस्था को पूरी तरह सुचारू बनाए रखें। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हड़ताल या विवाद के चक्कर में किसी भी आम ग्राहक को अपनी रोजमर्रा की रसोई की जरूरत के लिए कोई परेशानी न उठानी पड़े। अब देखना यह होगा कि 26 अक्टूबर से पहले सरकार और वितरकों के बीच कोई सहमति बन पाती है या नहीं।
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