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भाई की स्कूल बस आते ही खुशी से दौड़ा 2 साल का मासूम, अगले ही पल पहिए के नीचे आया. घर में मचा कोहराम

भाई की स्कूल बस आते ही खुशी से दौड़ा 2 साल का मासूम, अगले ही पल पहिए के नीचे आया. घर में मचा कोहराम


संगारेड्डी। तेलंगाना के संगारेड्डी जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां अपने बड़े भाई के स्कूल से लौटने का इंतजार कर रहे दो साल के मासूम की स्कूल बस की चपेट में आने से मौत हो गई।

घटना सदाशिवपेट कस्बे के सिद्धापुर इलाके की है। बताया जा रहा है कि मंगलवार शाम स्कूल बस बड़े भाई को लेकर घर के पास पहुंची थी। बस को देखते ही मासूम खुशी-खुशी अपने भाई के पास जाने के लिए दौड़ा, लेकिन इसी दौरान वह बस के नीचे आ गया। बस का पिछला पहिया उसके ऊपर से गुजर गया और गंभीर चोटों के कारण बच्चे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

हादसे के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। जिस घर में कुछ पल पहले बड़े बेटे के स्कूल से लौटने की खुशी का इंतजार हो रहा था, वहां अचानक मातम पसर गया। बच्चे की मौत की खबर सुनकर आसपास के लोग भी घटनास्थल पर जुट गए। परिवार के लिए यह यकीन करना मुश्किल था कि कुछ ही सेकंड में उनका मासूम हमेशा के लिए उनसे दूर हो गया।

बड़े भाई के आने का इंतजार कर रहा था मासूम

सदाशिवपेट के सिद्धापुर इलाके में जोसफ अपने परिवार के साथ रहते हैं। वह स्थानीय स्तर पर एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करते हैं। उनके दो बेटे थे। बड़ा बेटा टाइटस स्थानीय जीनियस स्कूल में यूकेजी में पढ़ता है, जबकि छोटा बेटा इफ्रायिम महज दो साल का था।

मंगलवार शाम टाइटस रोज की तरह स्कूल बस से घर लौट रहा था। परिवार के लोग उसके घर पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान उसका छोटा भाई इफ्रायिम भी घर के बाहर था। जैसे ही उसे स्कूल बस दिखाई दी, वह अपने बड़े भाई से मिलने की खुशी में बस की तरफ दौड़ पड़ा।

बताया जा रहा है कि मासूम के बस के आगे आने की जानकारी चालक को नहीं हो सकी। बस आगे बढ़ी और बच्चा उसके नीचे गिर गया। इसके बाद बस का पिछला पहिया उसके ऊपर से गुजर गया। हादसा इतना गंभीर था कि बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई।

कुछ सेकंड में बदल गई परिवार की दुनिया

मासूम इफ्रायिम की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। मां मैनिक (मौनीका) का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बच्चे को कुछ देर पहले वह घर के बाहर खेलते और अपने बड़े भाई का इंतजार करते देख रही थीं, उसी बच्चे को हादसे के बाद खो देना परिवार के लिए किसी भयावह सपने से कम नहीं है।

सबसे ज्यादा मार्मिक स्थिति उस बड़े भाई की भी रही, जिसका इंतजार करते हुए मासूम बस की तरफ दौड़ा था। परिवार में दोनों भाइयों के बीच गहरा लगाव बताया जा रहा है। रोज की तरह टाइटस के स्कूल से लौटने का इंतजार कर रहे इफ्रायिम को यह अंदाजा तक नहीं था कि स्कूल बस उसके परिवार के लिए इतनी बड़ी त्रासदी लेकर आने वाली है।

हादसे के बाद आसपास के लोगों ने परिवार को संभालने की कोशिश की। इलाके में भी घटना को लेकर शोक का माहौल है।

स्थानीय लोगों ने चालक पर लगाए गंभीर आरोप

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने स्कूल बस चालक की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि चालक कथित तौर पर हेडफोन लगाए हुए था और गाने सुनते हुए बस चला रहा था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि स्कूल बस के साथ मौजूद सहायक की भूमिका क्या थी और क्या वह बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त रूप से सतर्क था। लोगों का कहना है कि स्कूल बस जब बच्चों को उनके घर के पास छोड़ती है, तब आसपास छोटे बच्चों की मौजूदगी को लेकर चालक और सहायक को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

बच्चे अक्सर स्कूल बस को देखते ही अपने भाई-बहन या माता-पिता की ओर दौड़ पड़ते हैं। ऐसे में बस को आगे बढ़ाने से पहले चालक और सहायक द्वारा आसपास के क्षेत्र की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर उस समय पर्याप्त सतर्कता बरती गई होती तो शायद हादसा टल सकता था।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शुरू की जांच

घटना की जानकारी मिलते ही सदाशिवपेट पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और हादसे से जुड़ी जानकारी जुटाई। मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। बस किस तरह खड़ी थी, बच्चा किस दिशा से बस के पास पहुंचा, चालक को बच्चे की मौजूदगी क्यों नहीं दिखाई दी और बस के साथ मौजूद सहायक उस समय कहां था-इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

इसके अलावा स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा सकती है। यदि जांच में चालक की लापरवाही या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल बसों में सफर करने वाले बच्चों की सुरक्षा केवल बस के अंदर तक सीमित नहीं होती। बच्चों को बस से उतारने के बाद उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है।

खासकर छोटे बच्चों के मामले में यह जोखिम और बढ़ जाता है। दो से चार साल की उम्र के बच्चे वाहन की गति और दिशा का सही अनुमान नहीं लगा पाते। वे अचानक सड़क या वाहन की ओर दौड़ सकते हैं। ऐसे में बस चालक को वाहन आगे बढ़ाने से पहले आसपास का क्षेत्र पूरी तरह देखना चाहिए।

इसी तरह बस में मौजूद सहायक की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है। बच्चों के उतरने के बाद यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई बच्चा बस के आसपास या उसके सामने न रह जाए।

छोटे बच्चों के लिए ज्यादा सतर्कता जरूरी

स्कूल बस से जुड़े हादसों में अक्सर कुछ सेकंड की लापरवाही भारी पड़ सकती है। बच्चों को वाहन से सुरक्षित दूरी पर रखना, बस के रुकने और चलने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना और चालक को वाहन चलाते समय किसी भी तरह के ध्यान भटकाने वाले उपकरण का इस्तेमाल नहीं करना बेहद जरूरी है।

सदाशिवपेट की घटना में भी यही सवाल सामने आया है कि क्या बस के आसपास मौजूद स्थिति पर पर्याप्त ध्यान दिया गया था। हालांकि, इन सवालों का अंतिम जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही क्षेत्र में संचालित स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जाए, ताकि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

एक मासूम की मौत ने छोड़ दिए कई सवाल

इफ्रायिम की मौत केवल उसके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे इलाके के लिए झकझोर देने वाली घटना है। जिस उम्र में एक बच्चा अपने भाई को स्कूल बस से उतरते देखकर खुशी से दौड़ता है, उसी उम्र में उसकी जिंदगी एक दर्दनाक सड़क हादसे में खत्म हो गई।

इस घटना ने यह सवाल भी सामने रखा है कि स्कूल बसों के संचालन में सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है। बस चालक, सहायक, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों-सभी की भूमिका बच्चों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। हादसे की वास्तविक परिस्थितियां और जिम्मेदारी किसकी थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इस घटना ने एक परिवार को ऐसा दर्द दे दिया है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। बड़े भाई के घर लौटने का इंतजार कर रहा दो साल का इफ्रायिम अब कभी अपने भाई के साथ नहीं खेल पाएगा। परिवार के लिए मंगलवार की वह शाम जिंदगी भर का ऐसा दुख बन गई, जिसे भुला पाना शायद कभी संभव नहीं होगा।

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