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'5 लाख का जुर्माना कम है, 20 लाख कर दे सुप्रीम कोर्ट', नोएडा डीएम मेधा रूपम के SC जाने पर सौरव दास का हमला.

 

'5 लाख का जुर्माना कम है, 20 लाख कर दे सुप्रीम कोर्ट', नोएडा डीएम मेधा रूपम के SC जाने पर सौरव दास का हमला


दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.


हाईकोर्ट ने आकृति की हिरासत को अवैध ठहराते हुए उसे 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था. अदालत ने यह रकम जिम्मेदार अधिकारियों से वसूलने की बात कही थी, जिसमें डीएम की व्यक्तिगत सैलरी से भी रकम की वसूली का निर्देश भी शामिल था.

मेधा रूपम के सुप्रीम कोर्ट जाने की खबर सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा कि इतने 'कठोर और निरंकुश' आदेश के बाद भी डीएम को अपील दायर करने की हिम्मत हुई. दास ने तंज कसते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को तो जुर्माने की रकम बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर देनी चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, आकृति चौधरी को नोएडा में एक विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था। वह करीब पांच महीने तक हिरासत में रही थीं. बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने एनएसए के तहत उनकी हिरासत को रद्द कर दिया और इसे कानूनन अवैध माना था.

2 सितंबर को दिए गए फैसले में हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की थी. अदालत ने आकृति को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया और इस रकम को जिम्मेदार अधिकारियों की सैलरी से वसूलने की बात कही. कोर्ट ने अधिकारियों के आचरण पर भी गंभीर सवाल उठाए थे.

अब सुप्रीम कोर्ट में होगी लड़ाई

हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ अब मेधा रूपम सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं. इससे मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दिए जाने की बात कही थी.

ऐसे में अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं कि वह हाईकोर्ट के उस आदेश पर क्या रुख अपनाता है, जिसमें एक छात्रा की एनएसए हिरासत को अवैध ठहराते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई थी.

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