5 औलादों के होते हुए भी अनाथ हुई बुजुर्ग मां. अस्पताल में तड़पता छोड़ भागे बच्चे, फोन भी किए बंद, अब वृद्धाश्रम ही आखिरी ठिकाना,.
उत्तर कन्नड़ जिले के कारवार तालुका स्थित शिरवाड़ा से एक बेहद दर्दनाक और अमानवीय मामला सामने आया है. जिस मां ने जीवन भर अपने पांच बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया और उनके भविष्य को संवारा, आज वही बच्चे बीमार मां का सहारा बनने के बजाय उन्हें अकेला छोड़कर भाग खड़े हुए हैं.
गंभीर लीवर रोग से जूझ रही बुजुर्ग महिला को अब इलाज के बाद कुमटा स्थित वृद्धाश्रम में भर्ती कराने का फैसला लिया गया है.
पीड़ित बुजुर्ग महिला की पहचान शिरवाड़ा निवासी इरावा के रूप में हुई है. इरावा के परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है, जो सभी शादीशुदा हैं और अलग-अलग शहरों में अपनी जिंदगी जी रहे हैं. पिछले कुछ महीनों से इरावा की तबीयत काफी बिगड़ गई और डॉक्टरों ने बताया कि उनका लीवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है. वे पूरी तरह बिस्तर पर निर्भर हो चुकी हैं. हालांकि, बीमारी की खबर मिलने के बावजूद उनके बच्चों ने देखभाल करने के बजाय अपनी मां से दूरियां बना लीं.
अस्पताल में खाना देकर मोबाइल बंद कर भागे बच्चे
हाल ही में इरावा को इलाज के लिए कारवार स्थित क्रिम्स (KRIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया था. शुरुआत में बड़ी बेटी गीता और अन्य बहनें अस्पताल आईं, लेकिन गीता ने किराए के मकान का हवाला देकर मां को अपने साथ ले जाने से साफ इनकार कर दिया. हद तो तब हो गई जब अस्पताल में मौजूद बहन दुर्गा बिना किसी को बताए वहां से चली गई और वापस नहीं लौटी. इसके बाद खाना लेकर अस्पताल पहुंचीं दो अन्य बेटियों ने भी अपने मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लिए और मां को लावारिस हालत में छोड़कर फरार हो गईं. पांचों बच्चे अपनी जन्म देने वाली मां से इस तरह मुंह मोड़ चुके हैं जैसे उनका कोई रिश्ता ही न हो.
डॉक्टरों ने जताई चिंता, अब वृद्धाश्रम ही सहारा
क्रिम्स अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, इरावा का लीवर पूरी तरह डैमेज हो चुका है और उनके ठीक होने की संभावना काफी कम है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यदि उनकी सही देखभाल और सेवा की जाए, तो वे 6 महीने से 1 साल तक और जीवित रह सकती हैं.
बच्चों द्वारा पूरी तरह बेदखल कर दिए जाने के बाद अब सामाजिक सहयोग से इरावा को कुमटा के जनकिरामा वृद्धाश्रम में भर्ती कराने का निर्णय लिया गया है. जिस मां को बुढ़ापे में अपनों के दुलार की सख्त जरूरत थी, उसे अपनों की ही बेरुखी के कारण वृद्धाश्रम में जीवन की आखिरी सांसें गिनने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

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