6 और 7 सितंबर को होगा बड़ा धमाका? पीएम मोदी की खामोशी के पीछे छुपा है ये बड़ा राज 6 और 7 सितंबर को होगा बड़ा धमाका? पीएम मो..
राजनीति का एक बड़ा नियम है-जो दिखता है, उससे कहीं ज्यादा मायने वो रखता है जो पर्दे के पीछे चल रहा होता है। कुछ ऐसा ही सन्नाटा इन दिनों दिल्ली के सियासी गलियारों में छाया हुआ है। बुधवार, 2 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की कोई बैठक नहीं हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे एक दिन पहले ही बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से वापस लौटे थे। दिल्ली में मौजूदगी और जल संसाधन मंत्रालय के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बावजूद कैबिनेट की बैठक न बुलाना कई बड़े सियासी सवालों को जन्म दे रहा है।
26 अगस्त की वो बैठक और पीएम मोदी का बड़ा इशारा
इस पूरी हलचल और खामोशी के तार 26 अगस्त की कैबिनेट बैठक से जुड़ते हैं। उस दिन बैठक तो हुई, लेकिन खत्म होने के बाद मीडिया के सामने कोई बहुत बड़ा फैसला नहीं लाया गया। हालांकि, अंदरखाने से खबर आई कि पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों को एक बड़ा इशारा दिया था। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने साफ कहा था कि जब अगली कैबिनेट बैठक होगी, तो उसमें कुछ नए चेहरे उनके साथ टेबल पर मौजूद होंगे। अगर पीएम मोदी के इस संकेत को समझें, तो अगली बैठक महज एक रुटीन मीटिंग नहीं होगी, बल्कि मोदी सरकार 3.0 के बड़े फेरबदल की पटकथा लिखेगी।
6 और 7 सितंबर की तारीख क्यों है इतनी खास?
सितंबर की शुरुआत में सरकार का शेड्यूल काफी पैक नजर आ रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड के दौरे पर हैं। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में BRICS शिखर सम्मेलन होना है, जिसकी मेजबानी खुद भारत कर रहा है। वहीं, 17 सितंबर से बीजेपी अपना महीने भर चलने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करने जा रही है। ऐसे में इन बड़े कार्यक्रमों के बीच 6 और 7 सितंबर की तारीख सबसे मुफीद मानी जा रही है। चर्चा गरम है कि इसी दौरान पीएम मोदी अपनी नई और नए कलेवर वाली टीम का ऐलान कर सकते हैं।
मंत्रालयों के प्रभार में फेरबदल और युवा चेहरों की एंट्री
चर्चा सिर्फ नए चेहरों की एंट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कई मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल देखने को मिल सकता है। फिलहाल कुछ मंत्रियों के पास एक से ज्यादा भारी-भरकम विभाग हैं। माना जा रहा है कि उनसे अतिरिक्त जिम्मेदारी लेकर नए लोगों को सौंपी जा सकती है। सरकार का फोकस युवाओं से बेहतर संवाद बनाने पर है, इसलिए युवा नेताओं को तवज्जो मिल सकती है। इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय में किसी ऐसे दिग्गज को लाने की तैयारी है, जिसका बैकग्राउंड अकादमिक और बौद्धिक क्षेत्र से जुड़ा हो।
70 की उम्र का फॉर्मूला और सहयोगी दलों की उम्मीदें
इस संभावित फेरबदल में उम्र एक बड़ा फैक्टर साबित हो सकती है। फिलहाल मोदी कैबिनेट में 70 साल से अधिक उम्र के करीब 14 मंत्री मौजूद हैं। माना जा रहा है कि इनमें से कुछ नेताओं को सरकार से हटाकर संगठन या राज्यों में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
दूसरी तरफ, एनडीए के सहयोगी दल भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की आस लगाए बैठे हैं। टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों के गुट के एनडीए के साथ आने से उन्हें सरकार में जगह देने का दबाव है। वहीं, महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास जेडीयू से ज्यादा सांसद हैं, इसलिए उनके दावों को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। एनसीपी और दक्षिण भारत के राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए भी कुछ बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश से रवि किशन की हो सकती है सरप्राइज एंट्री
मिशन यूपी को ध्यान में रखते हुए इस फेरबदल में उत्तर प्रदेश का खास ख्याल रखा जाएगा। जातीय और सामाजिक समीकरणों को फिट करने के लिए गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन के नाम पर भी गंभीरता से विचार चल रहा है। रवि किशन ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पूर्वांचल में काफी लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत पकड़ और जनता के बीच उनकी छवि को देखते हुए बीजेपी उन्हें केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
अगले कुछ दिनों में साफ होगी पूरी तस्वीर
अब हर किसी की निगाहें इस बात पर हैं कि अगली कैबिनेट बैठक की तारीख का आधिकारिक ऐलान कब होता है। 6 और 7 सितंबर की चर्चाएं भले ही तेज हों, लेकिन अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को ही लेना है। 26 अगस्त का पीएम का वो संकेत और फिर 2 सितंबर को बैठक का न होना-इन दो घटनाओं ने यह तो साफ कर दिया है कि दिल्ली में कुछ बहुत बड़ा पक रहा है।

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