पेंशनर्स और कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! 8वें वेतन आयोग की बैठकों का नया शेड्यूल जारी

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) एक बार फिर जबरदस्त चर्चा में है. आयोग के गठन को करीब 10 महीने हो चुके हैं. इस दौरान कर्मचारी संगठनों और दूसरे तमाम हितधारकों के साथ कई दौर की महत्वपूर्ण बातचीत हो चुकी है.
अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जहां कर्मचारी संगठन अपनी-अपनी मांगें आयोग के सामने मजबूती से रख रहे हैं. हालांकि, अभी यह आधिकारिक रूप से तय नहीं हुआ है कि केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में वास्तव में कितनी बढ़ोतरी होगी. फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम बेसिक पे, सालाना इंक्रीमेंट और भत्तों को लेकर भी अंतिम फैसला आना बाकी है.
कब हुआ 8वें वेतन आयोग का गठन और क्या है समयसीमा?
केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर 2025 को 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) को हरी झंडी दी थी. इसके तुरंत बाद 3 नवंबर 2025 को आयोग का औपचारिक गठन कर दिया गया. आयोग की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. सरकार ने आयोग को अपनी पूरी रिपोर्ट तैयार करने और सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया है.
आयोग के गठन के बाद अब तक करीब 10 महीने का समय बीत चुका है, यानी निर्धारित 18 महीने की समयसीमा का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो गया है. अब आयोग के पास अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगभग 8 महीने का समय बचा है. हालांकि, रिपोर्ट किस सटीक तारीख को पेश होगी, इसे लेकर अभी कोई अंतिम तिथि घोषित नहीं की गई है.
अब तक आयोग ने क्या-क्या काम किया?
8वें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स, कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और दूसरे हितधारकों से सुझाव लेने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी है. आयोग की ओर से कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए 10 अप्रैल 2026 को आवेदन मांगे गए थे. इसके अलावा कर्मचारी संगठनों को अपनी मांगों और सुझावों से जुड़े मेमोरेंडम जमा करने का मौका दिया गया, जिसकी समयसीमा 29 मई से बढ़ाकर 15 जून कर दी गई थी. इससे विभिन्न संगठनों को अपनी मांगें आयोग के सामने रखने का पर्याप्त समय मिला.
अलग-अलग राज्यों में जारी हैं बैठकें
आयोग केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जाकर कर्मचारियों और हितधारकों से सीधा संवाद कर रहा है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे को लेकर 1 मई को नोटिफिकेशन जारी किया गया था. इसके बाद दिल्ली में कई बैठकें हुईं और जयपुर में भी 31 अगस्त और 1 सितंबर को बातचीत का कार्यक्रम आयोजित किया गया. इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों और पेंशनर्स की समस्याओं, वेतन संरचना और दूसरे मुद्दों पर बहुमूल्य सुझाव हासिल करना है.
अगले दो महीनों का बैठकों का कार्यक्रम
8वें वेतन आयोग का आने वाले समय का शेड्यूल भी सामने आ चुका है. पुडुचेरी में 9 सितंबर को बातचीत प्रस्तावित है, जिसके बाद चंडीगढ़ में 16 से 18 सितंबर तक बैठकें होंगी. अक्टूबर महीने में बेंगलुरु में 7 और 8 तारीख को चर्चा का कार्यक्रम रखा गया है. इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों और हितधारकों से वेतन, पेंशन और भत्तों से जुड़े सुझाव लिए जाएंगे.
फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम बेसिक सैलरी पर क्या हैं मांगें?
8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि इसी के आधार पर मौजूदा बेसिक पे को संशोधित वेतन में बदला जाता है. 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था, लेकिन इस बार कर्मचारी संगठनों ने इसे 3.61 से लेकर 4.00 तक रखने का प्रस्ताव दिया है.
न्यूनतम बेसिक पे को लेकर NC-JCM ने इसे बढ़ाकर ₹69,000 करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि BPMS ने इसे ₹72,000 करने की मांग की है. वहीं MSA के प्रस्ताव में न्यूनतम बेसिक पे ₹65,000 करने की बात कही गई है. हालांकि, ये सभी आंकड़े केवल कर्मचारी संगठनों की मांगें हैं और सरकार या आयोग की ओर से अभी अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है.
सालाना इंक्रीमेंट, पेंशन और DA को लेकर स्थिति
वर्तमान व्यवस्था में केंद्रीय कर्मचारियों को बेसिक पे के आधार पर 3 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट मिलता है. BPMS और NC-JCM जैसे प्रमुख संगठनों ने इसे बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की मांग की है, जिससे वार्षिक वेतन वृद्धि की दर मौजूदा व्यवस्था से दोगुनी हो सकती है. इसके साथ ही पेंशन में संशोधन, महंगाई भत्ते (DA) और अन्य भत्तों में बदलाव की मांगें भी रखी गई हैं. लेकिन जब तक नया फिटमेंट फैक्टर तय नहीं होता, तब तक सैलरी या पेंशन में किसी निश्चित बढ़ोतरी का दावा करना जल्दबाजी होगी.
नई सैलरी और पेंशन कब से लागू हो सकती है?
मौजूदा समयसीमा के आधार पर आयोग की रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके बाद केंद्र सरकार आयोग की सिफारिशों की समीक्षा करेगी और उन्हें लागू करने पर अंतिम फैसला लेगी. इसलिए नई सैलरी और पेंशन की वास्तविक भुगतान तिथि अभी तय नहीं है. हालांकि, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी करने की मांग और उम्मीदों पर चर्चा जारी है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा.
10 महीने में कहां पहुंचा 8वां वेतन आयोग?
8वें वेतन आयोग के गठन को 10 महीने पूरे होने के साथ ही काम में काफी तेजी आई है. फिटमेंट फैक्टर 4.00 करने, न्यूनतम बेसिक पे ₹72,000 तक बढ़ाने और सालाना इंक्रीमेंट 6 प्रतिशत करने जैसी बड़ी मांगें सामने आ चुकी हैं. अब आने वाले महीनों में होने वाली बैठकों और आयोग की सिफारिशों पर देश भर के लाखों कर्मचारियों की नजर टिकी रहेगी.
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