8th Pay Commission: 3 नहीं अब परिवार में मानी जाएं 5 यूनिट, आयोग ने मान ली ये मांग तो रॉकेट की गति से उछलेगी सैलरी.

नई दिल्ली. केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वतेन और भत्तों में संसोधन करने के लिए 8वें वेतन आयोग का गठन किया गया है. कर्मचारी संगठनों ने इस बार फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी के साथ ही कई मांगे रखी हैं.
कर्मचारी संगठनों ने अब बाबू से लेकर अफसर तक की पगार तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले 'फैमिली यूनिट' में वृद्धि करने की मांग रखी है.अगर आयोग यह मांग मान लेता है तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में जोरदार उछाल आएगा.
अब तक के वेतन आयोग न्यूनतम वेतन तय करते वक्त एक परिवार को केवल 3 यूनिट मानते आए हैं. इनमें कर्मचारी, उसका जीवनसाथी और दो बच्चे ही शामिल होते हैं. लेकिन करीब 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और कर्मचारियों की शीर्ष संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NCJCM) ने मांग की है कि फैमिली यूनिट में कर्मचारी के माता-पिता को भी जोड़ा जाए.
माता-पिता की जिम्मेदारी उठाते हैं कर्मचारी
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि भारतीय संस्कृति और कानून दोनों ही बुजुर्ग माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी बच्चों पर डालते हैं. सीनियर सिटीजन मेंटेनेंस एक्ट और सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 भी कहते हैं कि माता-पिता की देखभाल करना उनकी औलादों का दायित्व है. इसलिए अब फैमिली यूनिट में कर्मचारी, पत्नी, दो बच्चों के साथ ही आश्रित माता-पिता को भी जोड़ा जाए. 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में एक नया फॉर्मूला पेश किया है. इसमें कर्मचारी (स्वयं): 1.0 यूनिट, पति या पत्नी: 1.0 यूनिट, दो बच्चे: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट और आश्रित माता-पिता: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट मानने की मांग की गई. इस हिसाब से कुल परिवार की यूनिट 5.2 (राउंड ऑफ में 5 यूनिट) बनती है.
फैमिली यूनिट पांच होने से क्या फायदा होगा
अगर आयोग इस 5 यूनिट के फॉर्मूले पर मुहर लगा देता है, तो न्यूनतम सैलरी का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा. कर्मचारी यूनियनों द्वारा पेश किए गए नए खर्च के चार्ट के मुताबिक, 5 सदस्यों के परिवार के लिए दाल, चावल, आटा, दूध, फल, अंडा और मांस का मासिक खर्च करीब ₹24,443 आंका गया है. इसके ऊपर 10% मसाले/पेय पदार्थ, 7.5% हाउस रेंट, 20% ईंधन और बिजली, 25% स्किल डेवलपमेंट, 25% त्योहार व सामाजिक दायित्व और 5% टेक्नोलॉजी खर्च को जोड़ा गया है. इन सभी बुनियादी खर्चों को मिलाकर शुरुआती न्यूनतम वेतन सीधे ₹68,947 यानी राउंड फिगर में ₹69,000 बैठता है. NCJCM के महंगाई आधारित एक अन्य अनुमान के तहत तो यह आंकड़ा ₹80,444 तक भी जा सकता है.
3.833 का फिटमेंट फैक्टर और पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले
इस नए फॉर्मूले के तहत बेसिक सैलरी को ₹69,000 तक ले जाने के लिए 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है. इसका सबसे जबरदस्त असर केवल मौजूदा कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर ही नहीं, बल्कि देश के लाखों रिटायर्ड बुजुर्गों पर भी पड़ेगा. रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) का कहना है कि सरकार अब तक भत्तों को बढ़ाकर बेसिक पे को दबाती रही है, जिसका सीधा नुकसान पेंशन और ग्रेच्युटी पर होता है. यदि 5 यूनिट के नियम से बेसिक पे की नींव ही मजबूत हो गई, तो पेंशनरों की मासिक पेंशन में भी कई गुना का रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिलेगा.
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