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यूपी ने दुतकारा, बंगाल ने संवारा, मोहम्मद शमी की वो कहानी, जिसने 900 विकेट का रास्ता तय किया

यूपी ने दुतकारा, बंगाल ने संवारा, मोहम्मद शमी की वो कहानी, जिसने 900 विकेट का रास्ता तय किया


ज भारतीय क्रिकेट के उस शेर का जन्मदिन है, जो बूढ़ा होने का नाम नहीं ले रहा. जितनी तेजी से उसकी उम्र बढ़ रही है, उससे दोगुनी रफ्तार से फुर्ती और तेजी. जी हां! हम बात कर रहे हैं मोहम्मद शमी की.

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में पले-बढ़े शमी आज 36 साल के हो गए. शमी उस पुराने डीजल इंजन की तरह हैं, जो जितना गर्म होते हैं, उतना बेहतर परफॉर्म करते हैं. दाएं हाथ के इस अनुभवी गेंदबाज की कहानी प्रोफेशनल क्रिकेट के 900 विकेट से कहीं आगे की है.

- 229 टेस्ट विकेट
- 206 वनडे विकेट
- 55 वर्ल्ड कप विकेट (18 पारी)
- वर्ल्ड कप में हैट्रिक
- वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा फाइव विकेट हॉल

यूपी ने किया दरकिनार तो कोलकाता ने बदली किस्मत
मोहम्मद शमी भले ही यूपी के रहने वाले हो, लेकिन जब घरेलू राज्य ने उनके टैलेंट को पहचानने से इनकार कर दिया तो शमी ने बंगाल का रुख किया. घर-द्वारा, मां-बाप अपना गांव-शहर-राज्य छोड़कर परदेस में जाना शमी के लिए इतना आसान नहीं था. लेकिन वो कहते हैं न बिना त्याग-बलिदान की जवानी, बेकार कहानी. बस फिर क्या था, शमी ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत के दम पर बंगाल की घरेलू टीम में जगह बना ली. यही से उनके प्रोफेशनल करियर का पंख मिले.


मोहम्मद शमी कमबैक के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं

बेकार समझी गई गेंदों से सीखी रिवर्स स्विंग
मोहम्मद शमी की सबसे बड़े ताकत उनकी स्विंग है. सटीक लैंथ पर तेजी से दोनों ओर हिलती गेंदों को खेलने में बल्लेबाजों का पसीना छुड़ा देने वाले शमी ने रिवर्स स्विंग को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. मुरादाबाद के क्रिकेट मैदानों पर उनके साथ प्रैक्टिस करने वाले लड़के जिन गेंदों को पुरानी समझकर साइड में फेंक देते, शमी मैच खत्म होने के बाद उन्हीं से प्रैक्टिस करते. एक तरफ की चमक बरकरार रखते और दूसरे रफ पैच से पुरानी गेंद को हवा में अंदर लाने का साइंस समझने की कोशिश करते.


ईस्ट जोन की गेंदबाजी आक्रमण का नेतृत्व भारत के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी कर रहे हैं.

ईडन गार्डंस में सौरव गांगुली की नजर
यूपी की अंडर-19 टीम में न चुने जाने के बाद मोहम्मद शमी 2005 के आसपास कोलकाता पहुंचे. संघर्ष के शुरुआती दिन इतने कुरुप थे कि उनके पास रहने के लिए छत भी नहीं थी. क्लब क्रिकेट में उन्होंने अपनी बॉलिंग से देवव्रत दास का इम्प्रेस किया बाद में उन्होंने ही रहने का बंदोबस्त भी किया. शमी जब मोहन बगान क्रिकेट क्लब पहुंचे तो इसके बाद उनके करियर में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट आया. ईडन गार्डंस में उन्हें पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को गेंदबाजी करने का मौका मिला. शमी ने दादा को इम्प्रेस कर लिया और गांगुली ने बंगाल के चयनकर्ताओं से बात की. इसके बाद उन्हें रणजी ट्रॉफी के लिए बंगाल की टीम में जगह मिली.

900 विकेट… और कहानी अभी बाकी है
अपने जन्मदिन से ठीक पहले मोहम्मद शमी ने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल की दोनों पारियों को मिलाकर पांच विकेट लिए और प्रोफेशनल क्रिकेट में 900 शिकार पूरे किए. टीम इंडिया से बाहर चल रहे शमी कमबैक की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. चयनकर्ता कहते हैं कि उनकी फिटनेस ठीक नहीं है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में लाल गेंद के साथ वह 36 की उम्र में भी हार नहीं मानना चाहते. मैच के बाद बेकार समझी जाने वाली गेंदों को अपना हथियार बनाने वाला लड़का आज भारत के बेहतरीन तेज गेंदबाजों में शुमार है.

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