After Death Rules: परिवार में मृत्यु हो जाए तो 1 साल तक क्या नहीं करना चाहिए? जानें क्या हैं नियम

After Death Rituals for 1 Year: हिंदू धर्म में मृत्यु होने के बाद कई तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं. जन्म और मृत्यु के समय सूतक और पातक रहता है, जिसमें सभी तरह के शुभ कार्य और पूजा पाठ करना वर्जित होता है.
जिस तरह परिवार में मृत्यु होने पर कई तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं, ठीक उसी तरह परिवार के लोगों के लिए भी कई नियम गरुड़ पुराण में बताए गए हैं कि किसी की मृत्यु होने पर एक साल तक कौन से काम नहीं करने चाहिए. ऐसे में आइए एक नजर डालते हैं कि परिवार में मृत्यु के बाद 1 वर्ष के लिए क्या करें और क्या न करें.
मृत्यु के 1 साल तक क्या करना चाहिए?
हिंदू धर्म में परिवार किसी सदस्य की मृत्यु के बाद पहले 1 वर्ष (विशेषकर तेरहवीं के बाद से बरसी तक) शोक, संयम और दिवंगत आत्मा की शांति के नियम निभाए जाते हैं.
मासिक श्राद्ध/तर्पण:- पहले साल में आने वाली मासिक तिथियों या मासिका व सपिण्डीकरण विधान के अनुसार धार्मिक कार्य करें.
नियमित पाठ और जाप:- रोजाना भगवद्गीता (विशेषकर 7वें अध्याय) का पाठ और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
दान-पुण्य और सेवा:- गरीबों को भोजन, वस्त्र दान करें तथा गौ सेवा (गाय को चारा) व पीपल में जल अर्पित करने जैसे कार्य करें.
सात्विक जीवन:- घर में सात्विक भोजन ही बनाएं और सरलता व शालीनता का जीवन जिएं.
मृत्यु के 1 साल तक क्या नहीं करना चाहिए?
विवाह और बड़े उत्सव:- निकट संबंधियों में विवाह, गृहप्रवेश या बड़े मांगलिक और भव्य उत्सव 1 वर्ष तक वर्जित माने जाते हैं.
मनोरंजन और पार्टियां:- परिवार के लोगों को एक साल तक बाहरी उत्सवों, संगीत-समारोहों या खुशी के बड़े कार्यक्रमों में शामिल होने से बचना चाहिए.
त्योहार और विशेष पूजा:- एक साल तक घर में बड़े उत्सव, दीपावली, होली जैसे त्योहारों का उल्लासपूर्वक जश्न नहीं मनाया जाता. साथ ही, सत्यनारायण व्रत, हवन, या मंदिरों में विशेष अनुष्ठान/अभिषेक करने से बचा जाता है.
नए वस्त्र या आभूषण:- परिवार के लोगों को 1 वर्ष तक भड़कीले वस्त्र, नए श्रृंगार और भारी आभूषण पहनने से बचना चाहिए.
तीर्थ यात्रा या बड़े आनंद आयोजन:- मेलों, पर्यटन यात्राओं या हर्षोल्लास वाले आयोजनों में भाग लेने से परहेज किया जाता है.
नई शुरुआत:- इस दौरान नया मकान बनवाने, गृह प्रवेश करने या कोई नई शुरुआत करने से भी परहेज करना चाहिए.
घर में मृत्यु होने के बाद कितने दिन बाद पूजा करनी चाहिए?
परंपरा के अनुसार, घर में किसी की मृत्यु होने पर 13 दिन (तेरहवीं) तक सूतक काल रहता है और इस दौरान सामान्य पूजा-पाठ व मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं. तेरहवीं के दिन हवन और गंगाजल से पूरे घर का शुद्धिकरण किया जाता है. इसके बाद ही सामान्य पूजा-पाठ दोबारा शुरू किया जा सकता है.
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