AMU से पढ़कर आईपीएस बनीं बुशरा को 'अस्सलाम वालेकुम' कहना पड़ा भारी, 48 घंटे में ही गिरी गाज
इन्हीं शब्दों को लेकर पश्चिम बंगाल में बवाल मचा और महज दो दिन के भीतर 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो का तबादला कर दिया गया। बानो पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर में एडिशनल एसपी के पद पर तैनात थीं। अब उन्हें स्टेट आर्म्ड पुलिस में डिप्टी कमांडेंट बनाया गया है।
विवाद 13 सितंबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो के बाद शुरू हुआ। वीडियो में आईपीएस बुशरा बानो पुलिस वर्दी में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (आरसीए) के छात्रों का हौसला बढ़ा रही थीं। विवाद की मुख्य वजह वीडियो की शुरुआत और अंत में इस्तेमाल किए गए शब्द बने। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कई यूजर्स ने इस पर आपत्ति जताई। 'हिंदू लीगल फंड' नामक संगठन ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव को पत्र लिखकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
आईपीएस ने सोशल मीडिया एकाउंट से हटाया वीडियो
शिकायत में आरोप लगाया गया कि भारतीय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रशासनिक अधिकारी को सार्वजनिक रूप से पूर्ण निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। विरोध बढ़ता देख महिला अधिकारी ने बाद में अपने सोशल मीडिया अकाउंट से यह वीडियो हटा लिया। आलोचकों का तर्क था कि ऑन-ड्यूटी सरकारी अधिकारी को वर्दी में रहते हुए किसी भी प्रकार की धार्मिक अभिव्यक्ति से बचना चाहिए और 'जय हिंद' जैसे राष्ट्रीय अभिवादनों का प्रयोग करना चाहिए। शिकायत के दो दिन बाद सरकार ने तबादले का आदेश जारी कर दिया। हालांकि सरकार की तरफ से तबादले को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया गया है, लेकिन टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष में सरगर्मी
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने बुशरा बानो का समर्थन किया है। इमरान प्रतापगढ़ी ने राज्य सरकार द्वारा अधिकारी का साथ न देने और ऑनलाइन ट्रोलिंग के बाद तुरंत तबादला करने पर सवाल उठाए हैं। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अब मुस्लिम समुदाय की शब्दावली पर भी राजनीति की जा रही है। पूर्व क्रिकेटर और सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन ने भी इस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं।
यह खतरनाक मिसाल
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (अमुटा) ने आईपीएस डॉ. बुशरा बानो के अचानक तबादले पर गहरा दुख जताते हुए कड़ी निंदा की है। अमुता राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चिंताओं को दर्ज कराएगी।
बुशरा ने ये कहा वीडियो में
वीडियो की शुरुआत उन्होंने 'अस्सलाम वालेकुम' से की। उन्होंने कहा कि "मेरा नाम बुशरा बानो है, मैं आईपीएस 2021 बैच की क्वालिफाइड हूं। वर्तमान में खड़गपुर में एडिशनल एसपी पोस्टेड हूं। आरसीए पहले जो कोचिंग सेंटर हुआ करता था, उसे सरकार ने माइनॉरिटीज, महिलाओं और एससी-एसटी के लिए स्पेशल एकेडमी बनाया। वह मेरे सफर में बहुत मददगार रहा। जब मैंने सऊदी अरब से लौटने व पीएचडी के बाद तैयारी करने के लिए सोचा था। मैं वैसे तो सेल्फ स्टडी कर रही थी, लेकिन साथ में किताबें व लाइब्रेरी में पढ़ाई की। वहां और भी मुझे मदद मिली, जैसे टेस्ट सीरीज..." उन्होंने छात्रों से अपील की कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में आरसीए में एनरोल हों और फैसिलिटीज का फायदा उठाएं। वीडियो के बीच में उन्होंने 'इंशा अल्लाह' कहा और अंत में 'धन्यवाद, जजाकल्लाह' बोलकर अपनी बात खत्म की।
कौन हैं बुशरा बानो, एएमयू से सऊदी अरब तक का सफर
बुशरा बानो का जन्म कन्नौज जिले के सौरिख गांव में हुआ। 12वीं के बाद उन्होंने एएमयू से उच्च शिक्षा हासिल की। वहीं उन्होंने मैनेजमेंट में नेट जेआरएफ क्वालिफाई किया और फिर पीएचडी पूरी की। पीएचडी के बाद बुशरा सऊदी अरब की एक नामी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बन गईं। वहां वह अपने परिवार और बच्चों के साथ शानदार जिंदगी जी रही थीं। लेकिन, उनका मन देश सेवा की तरफ था। पति के सहयोग से वह 2016 में बच्चों के साथ भारत लौट आईं और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। इसी दौरान वह दूसरे बच्चे की मां बनीं। पारिवारिक जिम्मेदारियों, दो बच्चों की परवरिश और स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी। उन्होंने यूपी पीसीएस और यूपीएससी सीएसई दोनों परीक्षाएं क्रैक कीं। पहले प्रयास के बाद दूसरे प्रयास में और बेहतर रैंक हासिल कर 2021 बैच में आईपीएस बनीं।
ये हैं सरकारी अफसरों के नियम
पुलिस मैनुअल और ऑल इंडिया सर्विसेज कंडक्ट रूल्स 1968 में वर्दी पहनने वाले पुलिस अफसरों के लिए नियम बनाए गए हैं। नियमावली में अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे हर समय उच्च नैतिक मानकों, ईमानदारी और जवाबदेही का पालन करे। सरकारी अधिकारी पूरी तरह से राजनीतिक रूप से तटस्थ रहें। वे सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से सीधे नहीं जुड़ सकते। कर्तव्यों का पालन करते हुए अधिकारी की छवि बिल्कुल निष्पक्ष और बिना किसी धार्मिक झुकाव वाली होनी चाहिए। पुलिस मैनुअल में विभागीय मीटिंग या बातचीत में जय हिंद, गुड मॉर्निंग और सर या मैडम बोलने का प्रोटोकॉल है। मगर सिविल सर्विसेज कंडक्ट रूल्स में पारंपरिक अभिवादन अस्सलाम वालेकुम, नमस्ते या सत श्री अकाल को लेकर स्पष्ट नियम नहीं है। आम नागरिकों से बात के दौरान वह सहज प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
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