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फिल्मों में 'कपटी लाला' बनने वाला एक्टर... भ्रष्ट मुनीम को देख लोग देते थे गालियां, एक तकिया कलाम से हुए हिट

फिल्मों में 'कपटी लाला' बनने वाला एक्टर... भ्रष्ट मुनीम को देख लोग देते थे गालियां, एक तकिया कलाम से हुए हिट


एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। एक दौर था, जब जूनियर स्टार्स को कैरेक्टर आर्टिस्ट कहा जाता था। उस वक्त छोटे से छोटे रोल में कलाकार इस तरह खुद को ढालते थे कि दशकों तक दर्शक उन्हें भूल नहीं पाते।

कुछ कलाकार तो अपने एक डायलॉग से ही स्टार बन जाते है। 50s के दौर में भी एक ऐसे ही कलाकार थे, जिनके एक डायलॉग ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया था।

यह कलाकार कभी फिल्मों में 'भृष्ट मुनीम' बनता तो कभी 'कपटी लाला' बनकर दर्शकों का ध्यान खींचता। इस कलाकार की काबिलियत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब वह स्क्रीन पर आते तो नेगेटिव रोल में अपनी परफॉर्मेंस से दर्शकों को खुद से नफरत करने के लिए मजबूर कर देते थे। लोग उन्हें गालियां भी देते थे।

कम उम्र में ली थी फिल्मों में एंट्री

यह अभिनेता थे चंद्रशेखर दुबे जिन्हें सीएस दुबे (CS Dubey) भी कहा जाता है। मध्य प्रदेश में जन्मे सीएस दुबे सिर्फ 17 साल के थे जब उन्होंने अपना होमटाउन छोड़ मायानगरी मुंबई का सफर तय किया और अभिनय की दुनिया में आ गए। उन्होंने 50s के दौर में फिल्मों में काम शुरू किया, लेकिन उन्हें पहचान 70s में आई एक फिल्म के फेमस डायलॉग से मिली थी।

एक डायलॉग से बन गए थे स्टार

साल 1975 में फिल्म 'जिंदा दिल' आई थी जिसमें सीएस दुबे की भी अहम भूमिका थी। फिल्म में उनका एक डायलॉग था 'ढक्कन खोल के' जो घर-घर में मशहूर हो गया था। यह मशहूर डायलॉग जिसे उन्होंने बाद में अपने रेडियो प्रोग्राम में भी इस्तेमाल किया। यह उनकी पहचान बन गया था।

लोग देते थे गालियां

करीब 150 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके सीएस दुबे ने ज्यादातर मुनीम, ज्वेलरी शॉपकीपर और सेठ जैसे किरदार निभाए हैं। राखी और हथकड़ी फिल्म में उन्होंने पंडित की भी भूमिका निभाई थी। पतीता, मिस्टर एंड मिसेस 55, भाभी, गबन और तीसरी कसम जैसी फिल्मों में नजर आ चुके सीएस दुबे को उनके ग्रे कैरेक्टर्स के लिए गालियां भी मिलती थीं, क्योंकि वह अपने रोल को इतनी शिद्दत से जो निभाते थे।

जेल भी जा चुके थे एक्टर

भले ही फिल्मों में वह भ्रष्ट या फिर नेगेटिव रोल्स निभाते थे, लेकिन रियल लाइफ में वह समाजसेवी थे। वह अपनी फिल्मों की कमाई का एक हिस्सा गरीब बच्चों की पढ़ाई पर लगाते थे। यही नहीं, ब्रिटिश शासन के खिलाफ वह भारत छोड़ो आंदोलन में भी शामिल हुए थे जिसके चलते उन्हें कम उम्र में जेल भी जाना पड़ा था।

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