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बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी मां, शव पहुंचते ही थमी सांसें, एक साथ ही उठीं दोनों की अर्थियां..

  

बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी मां, शव पहुंचते ही थमी सांसें, एक साथ ही उठीं दोनों की अर्थियां


Etawah News: यूपी के इटावा जिले के ढकपुरा गांव से एक बेहद ही भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। जयपुर में हार्ट अटैक से जान गंवाने वाले बेटे का शव शुक्रवार देर शाम जैसे ही घर आया 80 वर्षीय मां बेसुध होकर गिर पड़ीं।

परिजन कुछ समझ पाते, उससे पहले ही कुछ मिनटों के भीतर मां की सांसें थम गईं। शनिवार सुबह मां-बेटे की अर्थियां एक साथ उठीं तो अंतिम यात्रा में शामिल हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

एसओ विक्रम सिंह ने बताया कि ढकपुरा निवासी 54 वर्षीय राकेश पाठक तीन-चार वर्षों से जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए परिवार संग जयपुर में रह रहे थे। वहीं अचानक हार्ट अटैक के चलते उनकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। शुक्रवार देर शाम करीब आठ बजे परिजन उनका शव लेकर गांव पहुंचे। राकेश का शव देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। बुजुर्ग मां रामवती बेटे के शव को देख सदमे में आ गईं। वे बेसुध होकर जमीन पर गिरीं और कुछ ही देर में उनकी भी सांसें थम गईं। एक साथ दो मौतों से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

डेढ़ साल पहले पिता का हो गया था निधन

परिवार पर पिछले कुछ वर्षों से लगातार दुखों का साया है। करीब डेढ़ वर्ष पहले राकेश पाठक की पत्नी का निधन हो गया था। उनके पिता की मृत्यु भी कुछ समय पहले हो चुकी थी। परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे राकेश अब खुद भी दुनिया छोड़ गए। इसके बाद उनके तीनों बेटों अभिषेक, अनिकेत और लवकेश के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ गया। ग्रामीणों के अनुसार राकेश के परिवार से गांव के लोगों का जुड़ाव रहा है। उनकी मां गांव में ही रहती थीं। राकेश घर आने-जाने पर मां के साथ ही समय बिताते थे। शुक्रवार को बेटे का शव गांव पहुंचा तो किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में परिवार को एक और क्षति झेलनी पड़ेगी।

एक साथ उठीं मां-बेटे की अर्थियां, आंखे हुईं नम

घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण राकेश के घर पहुंच गए। लोगों ने शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया और इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़े रहे। रातभर घर में मातम का माहौल रहा। शनिवार सुबह जब मां रामवती और बेटे राकेश की अर्थियां एक साथ घर से उठीं तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। परिजनों के रोने-बिलखने की आवाज से हर किसी का कलेजा भर आया। अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीण भी भावुक हो उठे। मां-बेटे की एक साथ उठी अर्थियों का दृश्य देखकर गांव और आसपास के लोगों की आंखें छलक आईं। परिवार के तीनों बेटों के लिए यह दुख की घड़ी और भी भारी रही, क्योंकि कुछ ही समय में उन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया।

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