प्राइवेट पार्ट पर चोट, होंठ-चेस्ट पर निशान... पोस्टमार्टम करने वाले स्टाफ ने खोला राज, स्टिंग ऑपरेशन में सुशांत की मौत को लेकर भी चौंकाने वाली बातें.

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामलों में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में दोनों शवों के पोस्टमार्टम से जुड़ी टीम का हिस्सा रहे रूपकुमार शाह के हवाले से कई गंभीर दावे सामने आए हैं।
इन दावों में दिशा सालियान के शरीर पर चोट के कथित निशान और सुशांत सिंह राजपूत के गले पर निशान होने की बात कही गई है।
हालांकि, इन दावों को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्टिंग ऑपरेशन में कही गई बातों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी भी व्यक्ति द्वारा किए गए दावे और आधिकारिक जांच में सामने आए निष्कर्ष अलग-अलग चीजें हैं। इसलिए मामले में सामने आए इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों से ही हो सकती है।
दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बीच संबंध को लेकर पिछले कई वर्षों से अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। आधिकारिक जांचों में दोनों मामलों के बीच आपराधिक साजिश या सीधा संबंध साबित होने की पुष्टि नहीं हुई थी। अब नए दावों के सामने आने के बाद एक बार फिर इन मामलों की जांच और पोस्टमार्टम प्रक्रिया चर्चा में आ गई है।
स्टिंग ऑपरेशन में क्या दावा किया गया?
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रूपकुमार शाह के हवाले से दावा किया गया कि दिशा सालियान के शव की जांच के दौरान शरीर के कुछ हिस्सों पर चोट के निशान दिखाई दिए थे।
रिपोर्ट में उनके हवाले से यह भी दावा किया गया कि दिशा के दांत टूटे हुए थे और होंठ, कान तथा छाती पर कथित चोट या काटे जाने के निशान थे। इन दावों को लेकर बातचीत में बेहद गंभीर आशंका जताई गई।
हालांकि, इन आरोपों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट का सामने आना जरूरी है। केवल किसी स्टिंग ऑपरेशन में कही गई बात के आधार पर घटना की प्रकृति या उसमें किसी अपराध के होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
सुशांत के पोस्टमार्टम को लेकर भी दावा
स्टिंग में रूपकुमार शाह के हवाले से सुशांत सिंह राजपूत के पोस्टमार्टम को लेकर भी गंभीर दावा किया गया है।
उनके मुताबिक सुशांत के गले पर रस्सी से दबाव पड़ने जैसे कई निशान थे। उन्होंने कथित तौर पर पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े कुछ सवाल भी उठाए।
सुशांत की मौत 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित उनके आवास पर हुई थी। उनकी मौत के बाद मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या के तौर पर जांचा था। बाद में यह मामला केंद्रीय जांच एजेंसियों तक पहुंचा और लंबे समय तक इसकी जांच को लेकर देशभर में चर्चा होती रही।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि गले पर निशान होने का दावा अपने आप में हत्या साबित नहीं करता। ऐसे निशानों की प्रकृति, परिस्थितियां और उनका कारण निर्धारित करने के लिए पूरी मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों को एक साथ देखना पड़ता है।
वीडियोग्राफी को लेकर भी उठाया सवाल
स्टिंग ऑपरेशन में पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी को लेकर भी दावा सामने आया है। रूपकुमार शाह के हवाले से कहा गया कि दिशा सालियान के मामले में वीडियोग्राफी नहीं की गई थी और इसके पीछे बाहरी दबाव होने का आरोप लगाया गया।
यह दावा सामने आने के बाद पोस्टमार्टम प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस तरह के आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित अस्पताल के रिकॉर्ड, मेडिकल टीम के दस्तावेज और उस समय की जांच से जुड़े आधिकारिक कागजात महत्वपूर्ण होंगे।
किसी पोस्टमार्टम में क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी, इसका वास्तविक पता दस्तावेजी रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच से ही चल सकता है।
दिशा सालियान की मौत कैसे हुई थी?
दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं और उन्होंने अपने करियर के दौरान कई कलाकारों के साथ काम किया था। वह कुछ समय तक सुशांत सिंह राजपूत से भी पेशेवर रूप से जुड़ी रही थीं।
8 जून 2020 की रात मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत के रूप में दर्ज किया था।
दिशा की मौत के कुछ ही दिनों बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए। दोनों घटनाओं के बीच समय का अंतर बेहद कम होने के कारण सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में दोनों मामलों को जोड़कर कई तरह के दावे सामने आए।
हालांकि, आधिकारिक जांच में दोनों मौतों के बीच किसी आपराधिक कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई थी।
सुशांत की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी। उनकी मौत के कारणों को लेकर शुरुआत से ही कई सवाल उठते रहे।
मुंबई पुलिस ने शुरुआती जांच में आत्महत्या की दिशा में जांच की। इसके बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को भी सौंपी गई। जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ हुई और अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की गई।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर हत्या, साजिश और अन्य तरह के दावे तेजी से फैलने लगे। हालांकि, किसी भी ऐसे दावे को तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है।
दिशा के पिता की याचिका से मामला फिर चर्चा में
दिशा सालियान के परिवार की ओर से भी लंबे समय से मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। उनके पिता सतीश सालियान ने न्यायिक प्रक्रिया के जरिए मामले की परिस्थितियों की दोबारा जांच की मांग की है।
उनकी याचिका के बाद मामले ने एक बार फिर व्यापक सार्वजनिक और कानूनी ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में अब पोस्टमार्टम से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य और नए दावों के बीच संबंध को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अगर किसी जांच एजेंसी को नए दावों में प्रथम दृष्टया कोई महत्वपूर्ण तथ्य दिखाई देता है, तो वह संबंधित रिकॉर्ड और गवाहों की दोबारा जांच कर सकती है।
तीन दिन तक शव रखे जाने का दावा
स्टिंग ऑपरेशन में दिशा सालियान के शव को कथित तौर पर तीन दिनों तक रखे जाने का दावा भी सामने आया है।
इस बातचीत में यह सवाल उठाया गया कि अगर किसी आपराधिक घटना की आशंका हो तो फोरेंसिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना कितना महत्वपूर्ण होता है। साथ ही कथित तौर पर यह भी कहा गया कि समय बीतने के साथ कुछ जैविक साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं।
लेकिन यहां भी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट, शव से जुड़े रिकॉर्ड, नमूनों की जांच और पुलिस दस्तावेजों को देखना जरूरी होगा।
क्या इन दावों से बदलेगी जांच की दिशा?
नए दावों के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच एजेंसियां इन आरोपों को नए सिरे से जांच का आधार मानेंगी।
अगर पोस्टमार्टम टीम से जुड़े किसी व्यक्ति के बयान में ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो आधिकारिक रिकॉर्ड से अलग हैं, तो जांच एजेंसी उनके बयान का सत्यापन कर सकती है। इसके लिए मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक रिपोर्ट, पुलिस पंचनामा, पोस्टमार्टम दस्तावेज और उस समय मौजूद अन्य साक्ष्यों की तुलना जरूरी होगी।
सिर्फ मीडिया में सामने आए बयान के आधार पर हत्या या गैंगरेप जैसे गंभीर अपराध का निष्कर्ष निकालना कानूनी और पत्रकारिता दोनों दृष्टि से उचित नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर फिर तेज हुई चर्चा
स्टिंग ऑपरेशन के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सुशांत और दिशा के मामलों को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है। पहले भी इन दोनों मामलों को लेकर कई वीडियो, पोस्ट और दावे वायरल होते रहे हैं।
लेकिन ऐसे संवेदनशील मामलों में सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों को तथ्य मानने से बचना जरूरी है। किसी व्यक्ति, पुलिस अधिकारी, डॉक्टर या अन्य संबंधित व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेज और सक्षम जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए।
आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर है कि संबंधित जांच एजेंसियां स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए दावों को किस तरह देखती हैं। अगर इन आरोपों में कोई नया और सत्यापन योग्य तथ्य मिलता है, तो जांच में उसे शामिल किया जा सकता है।
वहीं, अगर जांच में इन दावों की पुष्टि नहीं होती है, तो उन्हें केवल आरोप या बयान के रूप में ही देखा जाएगा।
सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौतों से जुड़े मामले पहले ही देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहे हैं। ऐसे में नए दावों के बाद एक बार फिर लोगों की नजर जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया पर है।
फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि सामने आए दावों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर किया जाए। स्टिंग ऑपरेशन में कही गई बातें गंभीर जरूर हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि के बिना उन्हें अंतिम सच नहीं माना जा सकता।
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