घर में पानी, बच्चों समेत पूरा परिवार कैद और चूल्हा बंद... बगहा में गांववालों को बेहिसाब दर्द दे रही गंडक

किसी के सामने आज के खाने की चिंता है, तो किसी को इस बात का डर सता रहा है कि रात में पानी और बढ़ गया तो क्या होगा. पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने पांच गांवों के परिवारों की जिंदगी मुश्किल कर दी है.
नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक नदी उफान पर है और इसका सीधा असर पश्चिम चंपारण के बगहा में दिख रहा है. वाल्मीकिनगर बराज से 2 लाख 86 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद चकदहवा, बिन टोली, झण्डहवा टोला, कान्हा टोली और रोहुआ टोला… पांच गांव पूरी तरह पानी में घिर गए हैं. घरों में पानी, चूल्हे बंद और लोग टेंट में रात गुजारने को मजबूर हैं.
पानी में घिरे आशियाने
सबसे दर्दनाक स्थिति बगहा के चकदहवा गांव की हैं. जहां तक नजर जा रही है… पानी ही पानी. गंडक का पानी लोगों के घरों में घुस चुका है। घर के अंदर रखा अनाज, कपड़े, बर्तन… सब पानी में डूबा है. कई घरों में तो कमर भर पानी है. जिस घर में कभी चूल्हा जलता था, वहां अब सन्नाटा है. पीड़ित मानती देवी कहती हैं, "घर में पानी घुस गया, चूल्हा नहीं जल रहा, बच्चा भूखा है… कहां जाएं?

ग्राउंड जीरो से न्यूज 18 की रिपोर्ट. संवाददात मुन्ना राज चकदहवा, बिन टोली, झण्डहवा टोला, कान्हा टोली और रोहुआ टोला पहुंचे.
अपना घर छोड़कर ये परिवार गांव के ही ऊंचे टीले पर टेंट लगाकर रह रहे हैं. एक पॉलिथीन, चार बांस… यही इनका नया घर है. इसी टेंट के नीचे ईंट रखकर किसी तरह खाना बनाने की कोशिश हो रही है. छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग… सब इसी टेंट में रात गुजार रहे हैं. पीढ़त राम अनंत पंडित कहते हैं "दो दिन से चूल्हा नहीं जला है भैया, रिश्तेदार नाव से खाना पहुंचा रहा है. "
नाव ही सहारा

बाढ़ के बीच बच्चों के लिए भोजन और सुरक्षित जगह की चिंता भी परिवारों पर भारी पड़ रही है.
जिनके पास नाव है, उनके लिए वही एंबुलेंस है. इसी छोटी नाव से लोग अपने बच्चों और सामान को सुरक्षित जगह पहुंचा रहे हैं. लेकिन जिनके पास नाव नहीं… वो पानी में ही फंसे हैं. पीड़ित दिलीप कुमार कहते हैं, "रात भर जाग रहे हैं, पानी बढ़ रहा है… बच्चों को लेकर डर लग रहा है. राशन पानी सब घर में फंस गया, सामुदायिक किचन चालू करवा दीजिए सरकार." पीड़ित सरोजा देवी कहती हैं, "पशुओं के लिए चारा नहीं है, हम लोग क्या खाएंगे."
प्रशासन का रेस्क्यू
इधर प्रशासन भी एक्टिव है. पानी में घिरे गांवों में रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. बाढ़ का अंदाजा इसी से लगाइए कि चकदहवा में SSB के दो कैंप तक डूब गए हैं, जवानों को भैरियारी स्कूल में शिफ्ट करना पड़ा है. जिला प्रशासन सामुदायिक किचन शुरू करने की बात कह रहा है. SSB 21 बटालियन कमांडेंट तपेश्वर संबित राउत कहते हैं, "हम लोग लगातार लोगों को सुरक्षित निकाल रहे हैं, हमारी टीम लगी हुई है."

गंडक का जलस्तर बढ़ने के साथ कई गांव पानी से घिर गए हैं. जिला प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है.
रेस्क्यू के बीच राहत और भोजन का इंतजार
बाढ़ प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें सुरक्षित ठिकाने के साथ भोजन और जरूरी राहत सामग्री भी मिले. कई परिवारों के घरों में चूल्हे बंद हैं, इसलिए सामुदायिक किचन शुरू कराने की मांग उठ रही है. प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए बचाव अभियान शुरू किया है और बाढ़ आश्रय केंद्रों में शरण देने की कवायद चल रही है. इस बीच गंडक का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है. अगर नेपाल में बारिश नहीं रुकी तो इन गांवों का संकट और गहरा सकता है. सवाल यही है कि टेंट में गुजर रही इन रातों का कब सवेरा होगा..
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