अर्थी पत्नी की सड़क किनारे छोड़कर सामान लेने चला गया पति, तभी पहुंची पुलिस... आगे जो हुआ उसने सबको कर दिया हैरान

गाजियाबाद। बीमारी से पत्नी की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे एक पति की कथित लापरवाही और अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि पति अपनी मृत पत्नी के शव को अर्थी पर बांधकर अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहा था, लेकिन श्मशान स्थल के पास लकड़ी और अन्य जरूरी सामान कम पड़ने पर उसने शव को सड़क किनारे ही छोड़ दिया और सामान लेने चला गया।
कुछ देर तक महिला का शव सड़क किनारे अर्थी पर पड़ा रहा।
मामला उस समय गंभीर हो गया, जब आसपास से गुजर रहे लोगों की नजर सड़क किनारे रखी अर्थी पर पड़ी। लोगों ने जब पास जाकर देखा तो उस पर एक महिला का शव बंधा हुआ था। शव को इस तरह अकेला पड़ा देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। उन्हें आशंका हुई कि कहीं आवारा कुत्ते शव को नुकसान न पहुंचा दें। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया। कुछ समय बाद मृतका का पति अपने एक साथी के साथ अंतिम संस्कार की सामग्री लेकर वहां पहुंच गया। मौके पर मौजूद लोगों ने पति को उसकी लापरवाही के लिए जमकर खरी-खोटी सुनाई। बाद में पुलिस ने मानवीय पहल करते हुए शव को श्मशान घाट पहुंचाया और अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई।
बीमारी के चलते हुई थी महिला की मौत
पुलिस के मुताबिक मृतका की पहचान मुस्कान, उम्र करीब 30 वर्ष के रूप में हुई है। वह मूल रूप से छत्तीसगढ़ की रहने वाली थी। बताया गया है कि वह अपने पति राजू के साथ गाजियाबाद के चिपियाना बुजुर्ग इलाके में स्थित झुग्गी-झोपड़ी में रहती थी।
परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य बताई जा रही है। मुस्कान लंबे समय से दमा की गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। बीमारी के कारण उसकी हालत लगातार खराब चल रही थी। इसी बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद पति राजू उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर निकला था। शव को अर्थी पर बांधा गया था और उसे चिपियाना बुजुर्ग स्थित अंत्येष्टि स्थल की ओर ले जाया जा रहा था। लेकिन रास्ते में अंतिम संस्कार के लिए जरूरी लकड़ी और अन्य सामग्री कम पड़ गई।
सड़क किनारे अर्थी रखकर चला गया पति
बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार की सामग्री की जरूरत पूरी करने के लिए पति और उसके साथ मौजूद लोग वहां से सामान लेने चले गए। इस दौरान मृत महिला का शव अर्थी समेत सड़क के किनारे छोड़ दिया गया।
शव को अकेला छोड़कर चले जाने की यह घटना आसपास मौजूद लोगों के लिए बेहद चौंकाने वाली थी। कुछ देर बाद लोगों ने जब सड़क किनारे अर्थी देखी तो उन्हें पहले लगा कि शायद किसी वजह से लोग वहां रुके हैं। लेकिन पास जाकर पता चला कि अर्थी पर एक महिला का शव बंधा हुआ है और उसके आसपास कोई मौजूद नहीं है।
शव की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोग चिंतित हो गए। उन्हें डर था कि अगर समय रहते कोई नहीं पहुंचा तो सड़क पर घूमने वाले आवारा कुत्ते शव को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके बाद लोगों ने पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी।
पुलिस पहुंची तो शव को किया सुरक्षित
सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने अर्थी पर पड़े शव को अपने कब्जे में लिया और उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। पुलिस की मौजूदगी के बाद आसपास जमा लोगों को स्थिति की जानकारी दी गई।
पुलिस के पहुंचने के बाद भी यह सवाल बना रहा कि आखिर मृत महिला को इस तरह सड़क किनारे अकेला क्यों छोड़ दिया गया। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी दिखाई दी। लोगों का कहना था कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके शव के साथ कम से कम मानवीय संवेदना और सम्मान का व्यवहार होना चाहिए।
कुछ समय बाद मृतका का पति राजू अपने एक साथी के साथ अंतिम संस्कार की सामग्री लेकर मौके पर पहुंचा। पुलिस और वहां मौजूद लोगों के सामने उसने बताया कि लकड़ी और अन्य सामान की व्यवस्था करने के लिए उसे वहां से जाना पड़ा था।
हालांकि, इस दौरान स्थानीय लोगों ने उसकी जमकर आलोचना की। लोगों का कहना था कि सामान की व्यवस्था करने के लिए किसी व्यक्ति को शव को लावारिस हालत में सड़क किनारे छोड़ना उचित नहीं था।
पुलिस ने खुद कराई अंतिम संस्कार की व्यवस्था
मामले में पुलिस ने केवल शव को सुरक्षित करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी। पुलिस ने मानवीय पहल करते हुए महिला के अंतिम संस्कार की व्यवस्था में मदद की।
पुलिस के मुताबिक शव को श्मशान घाट ले जाया गया और अंतिम संस्कार की जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके बाद मृतका मुस्कान का अंतिम संस्कार कराया गया।
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस का मानवीय रवैया भी सामने आया। आर्थिक या अन्य किसी परेशानी के कारण यदि परिवार अंतिम संस्कार की व्यवस्था नहीं कर पा रहा था, तो पुलिस ने तत्काल मदद करते हुए शव का सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित किया।
घटना ने खड़े किए कई सवाल
यह मामला सिर्फ एक परिवार की लापरवाही का नहीं, बल्कि समाज में अंतिम संस्कार और मृत व्यक्ति के प्रति मानवीय संवेदनाओं को लेकर भी सवाल खड़े करता है। किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार सम्मान के साथ किया जाना जरूरी माना जाता है। ऐसे में सड़क किनारे शव को छोड़ देना लोगों के लिए स्वाभाविक रूप से चिंता और आक्रोश का विषय बन गया।
हालांकि, पति की आर्थिक स्थिति, अंतिम संस्कार की सामग्री उपलब्ध कराने में आई परेशानी और उस समय की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना उसके व्यवहार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पुलिस के सामने भी यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि शव को कितनी देर तक सड़क किनारे छोड़ा गया और उस दौरान वहां वास्तव में कौन-कौन मौजूद था।
परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए यह भी संभव है कि अंतिम संस्कार के खर्च और जरूरी सामग्री की व्यवस्था करना उनके लिए मुश्किल रहा हो। लेकिन स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि शव को अकेला छोड़ना क्यों जरूरी समझा गया।
दमा की बीमारी से जूझ रही थी मुस्कान
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मुस्कान लंबे समय से दमा की गंभीर बीमारी से परेशान थी। दमा के कारण उसे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। आखिरकार बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद परिवार को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी थी। इसी दौरान यह घटना सामने आई और देखते ही देखते आसपास के लोगों में चर्चा का विषय बन गई।
फिलहाल पुलिस ने शव को सुरक्षित कर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करा दी है। घटना के बाद पति और उसके साथ मौजूद लोगों की भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठे हैं। वहीं पुलिस की ओर से मामले की परिस्थितियों को समझने और घटना से जुड़ी जानकारी जुटाने की बात सामने आई है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि आर्थिक परेशानी या किसी अन्य मजबूरी के बावजूद क्या किसी मृत व्यक्ति के शव को इस तरह खुले में छोड़ना उचित है? जिस महिला ने बीमारी से जूझते हुए अपनी जिंदगी बिताई, उसकी मौत के बाद भी उसके शव को सम्मान दिलाने की जिम्मेदारी आखिरकार पुलिस को उठानी पड़ी। आसपास के लोगों की सतर्कता के कारण शव सुरक्षित रहा और पुलिस की मदद से उसका अंतिम संस्कार भी कराया जा सका।
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