यूपी वालों जमकर चलाओ एसी-कूलर, इस महीने कम आने वाला है बिल, जितना ज्यादा खर्च होगा यूनिट, उतना फायदा

लखनऊः उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए सितंबर का महीना राहत भरा हो सकता है. क्योंकि उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने इस महीने उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर 7.93 फीसदी का निगेटिव Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge (FPPAS) लागू किया है.
यूपीपीसीएल के इस फैसले से राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को करीब 604 करोड़ रुपये की राहत मिल सकती है. हालांकि यह बात समझनी होगी कि यह 7.93 फीसदी की छूट पूरे बिजली बिल पर नहीं मिलेगी. यह डिस्काउंट बिजली बिल के उन हिस्सों पर अमल होगा, जिनपर FPPAS लागू होगी. क्योंकि बिल में एनर्जी चार्ज के अलावा फिक्स्ड चार्ज, बिजली ड्यूटी, मीटर चार्ज और दूसरी चीजें भी शामिल होती हैं. इसलिए किसी भी उपभोक्ता का वास्तविक बिल कितना कम होगा, यह उसकी खपत, कनेक्शन के प्रकार, स्वीकृत लोड और बिल में शामिल दूसरे शुल्क पर निर्भर करेगा.
100 यूनिट खर्च करने पर कितना देना होगा बिल
अगर किसी का बिल 100 यूनिट के आधार पर आता है तो उसमें सबसे अधिक हिस्सा एनर्जी चार्ज का होता है. जिसपर 7.93 फीसदी डिस्काउंट का लाभ मिल सकता है. हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि उपभोक्ता का जो पूरा बिल आया है, उसमें 7.93 फीसदी की छूट मिलेगी. यानी कि राहत तो मिलेगी पर कुछ खास नहीं होगी. वहीं अगर किसी की खपत 200 यूनिट की है तो भी यही नियम लागू होगा. इस डिस्काउंट का सबसे अधिक फायदा 500 यूनिट की खपत वालों को होगा. क्योंकि इसपर 7.93 डिस्काउंट का बड़ा असर पड़ेगा. हालांकि पूरे बिल पर यह छूट नहीं मिलेगी. वास्तविक राहत बिल के उस हिस्से पर निर्भर करेगी जिस पर FPPAS लागू है.
यूपी में बिजली की दरें क्या हैं?
2026-27 के लिए UPERC ने घरेलू बिजली टैरिफ में कोई सामान्य बढ़ोतरी नहीं की है. जुलाई 2026 के टैरिफ आदेश के बाद घरेलू टैरिफ लगातार सातवें साल बढ़ाए नहीं गए. शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा टैरिफ में खपत के अलग-अलग स्लैब हैं. यही वजह है कि दो परिवारों की समान यूनिट खपत होने के बावजूद उनका अंतिम बिल अलग हो सकता है. अगर उनका स्वीकृत लोड या कनेक्शन का कंडीशन अलग-अलग हो.
FPPAS क्या होता है?
FPPAS यानी Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन और बिजली खरीद की लागत में बदलाव का कोऑर्डिनेशन है. जब बिजली खरीद या ईंधन की लागत बढ़ती है तो उपभोक्ता के बिल में अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है. वहीं लागत में कमी या नकारात्मक समायोजन होने पर उपभोक्ताओं को बिल में राहत मिल सकती है.
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