स्पर्म बैंक से अचानक गायब होने लगे सैंपल, CCTV ने कैद की घिनौनी सच्चाई, सीधे बोतल से गटक जाती थी वीर्य!
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ समय से एक चौंकाने वाला सीसीटीवी फुटेज तेजी से वायरल हो रहा है. इस फुटेज में दावा किया जा रहा है कि एक स्पर्म बैंक के स्टोरेज रूम से अचानक सैंपल गायब होने लगे थे.
जब अधिकारियों ने सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग जांची तो एक महिला कर्मचारी को सैंपल्स वाली बोतलों या कंटेनरों से सीधे सामग्री पीते हुए देखा गया. कई पोस्ट्स में इसे "क्वालिटी कंट्रोल" का मजाकिया नाम देकर पेश किया जा रहा है, जबकि कुछ यूजर्स इसे घिनौना और डरावना बता रहे हैं.
फुटेज में दिख रही महिला सफेद लैब कोट पहने हुई है और क्रायोजेनिक स्टोरेज टैंकों (जो आमतौर पर स्पर्म, एग्स या अन्य बायोलॉजिकल सैंपल्स रखने के लिए इस्तेमाल होते हैं) के बीच एक कुर्सी पर बैठी नजर आई. वह अपने सिर को पीछे की ओर झुकाए हुए एक छोटे से कंटेनर या बोतल को मुंह से लगाए हुए दिखाई दे रही है. ब्लैक एंड व्हाइट या ग्रेनी सीसीटीवी स्टाइल की यह तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉ र्म्स पर तेजी से शेयर हो रही है.
वायरल हुआ अनवेरिफाइड वीडियो
कई पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह घटना साल 2023 की है. कुछ जगहों पर कैलिफोर्निया के बेकर्सफील्ड का जिक्र भी किया जा रहा है और कर्मचारी का नाम "अगाथा ब्रिस्टल" बताया जा रहा है, लेकिन इन दावों का कोई ठोस आधार नहीं मिला है. सबसे महत्वपूर्ण बात: इस पूरी खबर की किसी भी देश से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है. ना तो किसी पुलिस विभाग ने इस घटना की पुष्टि की है, ना किसी फर्टिलिटी क्लिनिक या स्पर्म बैंक ने बयान जारी किया है और ना ही किसी विश्वसनीय न्यूज आउटलेट ने इसे वेरिफाई करके रिपोर्ट किया है. बिना किसी वेरिफाइड सोर्स के यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है.
फुटेज रियल लेकिन कहानी हो सकती है फेक
विशेषज्ञ और फैक्ट-चेकर्स इस तरह के कंटेंट को लेकर सावधान रहने की सलाह देते हैं. कई बार ऐसे वायरल वीडियो या इमेज एआई-जनरेटेड या डिजिटली मैनिपुलेटेड होते हैं. रेडिट और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स ने भी इस इमेज को एआई-क्रिएटेड या पुराने इंटरनेट जोक्स पर आधारित बताया है. लंबे समय से स्पर्म बैंक कर्मचारियों के "ड्रिंकिंग ऑन द जॉब" वाले चुटकुले इंटरनेट पर घूमते रहे हैं, और यह दावा उसी ट्रेंड का हिस्सा लगता है. स्पर्म बैंक या फर्टिलिटी क्लिनिक्स में सैंपल्स का स्टोरेज बेहद सख्त नियमों के तहत होता है. क्रायोजेनिक टैंकों में लिक्विड नाइट्रोजन के जरिए सैंपल्स को -196 डिग्री सेल्सियस पर फ्रीज करके रखा जाता है. इन जगहों पर एक्सेस कंट्रोल, सीसीटीवी निगरानी और सख्त प्रोटोकॉल होते हैं. अगर वास्तव में कोई कर्मचारी सैंपल्स के साथ इस तरह का व्यवहार करता, तो यह ना केवल गंभीर नैतिक उल्लंघन होता बल्कि कानूनी कार्रवाई का विषय भी बनता लेकिन चूंकि कोई आधिकारिक जांच या पुष्टि नहीं हुई, इसलिए इस दावे को तथ्यात्मक घटना नहीं माना जा सकता.

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