Money Management : घरों में काम करके हर महीने 60 हजार कमाती है यह मेड, नौकरी वालों को दिया फाइनेंस का सबक

नई दिल्ली. फाइनेंस सेक्टर के दिग्गजों का अक्सर यही कहना होता है कि पैसे कमाना बड़ी बात नहीं है, बल्कि उसे खर्च कैसे करना है, यह सीखना ज्यादा जरूरी है. ऐसा ही कुछ पाठ सिखा रही गुरुग्राम की मेड, जो घरों में काम करके हर महीने 60 हजार रुपये कमाती और पैसों के सही मैनेजमेंट से परिवार के सपनों की नींव भी रख रही है.
गुरुग्राम में रहने वाले शिवा मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डिन पर एक पोस्ट में यह कहानी साझा की है. उन्होंने लिखा कि मेड के मनी मैनेजमेंट ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर पैसों के प्रबंधन करने का सही तरीका क्या है.
शिवा मित्तल ने लिंक्डिन पोस्ट में लिखा कि उनके घर में काम करने वाली महिला हर महीने करीब 60 हजार रुपये कमाती है. वह अपने खर्चों को ऐसे मैनेज करती है कि पैसे का सही मैनेजमेंट का सटीक उदाहरण बन जाता है. उन्होंने लिखा कि यह महिला महीने में लगभग 60,000 रुपये कमाती है और साथ ही अपने खर्चों को समझदारी से मैनेज करते हुए अपनी बेटी की पढ़ाई का खर्च भी उठाती है. एक दिन हम बातचीत कर रहे थे और उसने मुझे बताया कि वह हर दिन 5 से 6 घरों में काम करती है और महीने में 3-4 तय छुट्टियां लेती है.
बेटी के भविष्य को संवारने का सपना
मित्तल ने लिखा कि घरों में काम करने से होने वाली कमाई से वह अपनी बेटी को एक अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती है. रोजमर्रा के खर्च उठाती है और रहने के लिए 10,000 रुपये किराया भी देती है. इसके अलावा वह अपने घर पर 6 लाख रुपये की जमीन के लिए EMI भी लगातार भर रही है. मित्तल ने उसके इस तरीके की तुलना उन लोगों से की जो कार और गैजेट्स जैसी चीजों के लिए EMI लेते हैं, जिनकी कीमत समय के साथ घटती जाती है और दिखावे के कारण अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने पर खर्च करते हैं.
जरूरी चीजों पर ही करते हैं खर्च
मित्तल का कहना कि ज्यादातर लोग पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी किताबें पढ़ते हैं और बजटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं. बावजूद इसके उनका खर्च बढ़ ही जाता है और पैसों का सही मैनेजमेंट पीछे छूट जाता है. लेकिन, मेरे घर में काम करने वाली महिला अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ जरूरी चीजों पर चलाती है. साथ ही बेटी के लिए एक सुरक्षित और स्थिर भविष्य सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है. उनकी अपनी कोई निजी इच्छा नहीं है और जो एकमात्र EMI भरती हैं, वह एक ऐसी संपत्ति के लिए है जिसकी कीमत समय के साथ बढ़ती ही जानी है.
अलग है इस महिला का नजरिया
मित्तल ने कहा कि इस महिला के नजरिये ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि रोजमर्रा की जिंदगी में असल में फाइनेंशियल डिसिप्लिन क्या होता है. महिला का यह नजरिया आर्थिक सुरक्षा को देखने का एक अलग ही तरीका है. उसने अपनी आमदनी के दायरे में रहकर जीना, बेटी के भविष्य को प्राथमिकता देना और लाइफस्टाइल के खर्चों के बजाय किसी ऐसी संपत्ति में पैसा लगाना सिखाया, जिसकी कीमत बढ़े. इस महिला की दिनचर्या से पता चलता है कि आर्थिक अनुशासन के लिए हमेशा जटिल योजनाओं की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह इस बात को समझने और उसी के अनुसार लगातार खर्च करने से भी आ सकता है कि असल में क्या जरूरी है.
यूजर ने भी की तारीफ
शिवा मित्तल के इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने कमेंट भी किया. एक यूजर ने लिखा कि यह वाकई काफी प्रेरणादायक कहानी है. एक अन्य यूजर ने कहा कि ऐसा लगता है कि उनके पास टाइम मैनेजमेंट की बेहतरीन क्षमता है. एक अन्य यूजर ने भी कहा कि वह टाइम मैनेजमेंट में माहिर हैं. शिवा ने भी बताया कि यह महिला खुद रोजाना 4 से 5 घरों में काम करती हैं और फिर भी पूरे परिवार को देखती है.
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