'ऐसा खाना देते हैं, जो कुत्ता भी न खाए, टॉयलेट भी साफ कराते हैं', यूपी के PAC जवान ने बताई ड्यूटी की दर्दनाक कहानी
बाराबंकी : हम सभी जानते हैं कि हमारे जवानों को कड़ी ट्रेनिंग और न जाने कितनी मेहनत से गुजरना पड़ता है. मगर, जब प्रशासन ही उनकी परेशानियों को नजरअंदाज कर दे तो वह किसके पास जाएंगे.
अब बाराबंकी में PAC बटालियन में तैनात जवान देवेंद्र गुप्ता का दर्द छलका है. उन्होंने पहले सोशल मीडिया एक वीडियो शेयर कर अपने साथियों की व्यथा सुनाई. फिर एक इंटरव्यू में उन्होंने ऐसे-ऐसे दावे किए, जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए. उनका कहना है कि हमें ऐसी जगह रखते हैं, जहां जानवर भी न रहें. जो कुत्ता भी न खाए, ऐसा खाना दिया जाता है. टॉयलेट तक खुद साफ करने होते हैं.
एक वीडियो जारी कर बताया दर्द
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 22 सितंबर को गोरखपुर क्षेत्र के रहने वाले देवेंद्र गुप्ता ने सोशल मीडिया पर 6 मिनट 42 सेकंड का वीडियो शेयर किया था. इसमें 5 मिनट 48 सेकंड तक उन्होंने अपनी और अपने साथियों की व्यथा सुनाई थी. आखिरी के 1 मिनट 8 सेकंड में महाभारत का एक प्रसंग जोड़ा, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण धृतराष्ट्र की सभा में न्याय मांगते नजर आए. वहीं उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की थी कि मैं आपके ही संसदीय क्षेत्र से आता हूं. आपने प्रदेश के लाखों असहाय और गरीब लोगों की फरियाद सुनकर उनका भला किया है.
उन्होंने आगे सीएम से कहा कि अब हमें उम्मीद है कि आप हम सिपाहियों का दर्द भी सुनेंगे. पीएसी के जवान कड़कड़ाती धूप, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश में चौबीसों घंटे ड्यूटी देते हैं. कृपया इस भ्रष्ट और जर्जर व्यवस्था में सुधार कराएं और बात-बात पर सिपाहियों का उत्पीड़न करने वाले अफसरों पर कड़ा नियम लगाएं. बता दें, देवेंद्र गुप्ता के इस वीडियो पर यूपी पुलिस और पीएसी के सैकड़ों जवानों के कमेंट्स आ रहे हैं, जो अपनी-अपनी बैरकों की बदहाली और अधिकारियों के रवैये बयां कर रहे हैं.
'टॉयलेट भी साफ करवाते हैं'

देवेंद्र ने यह तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि क्या अधिकारी बजट खा जा रहे हैं, जो सिपाही को टॉयलेट साफ करना पड़ता है?
इधर, दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में देवेंद्र ने कहा कि हमें ऐसी जगह रखते हैं, जहां जानवर भी न रहें. जो कुत्ता भी न खाए, ऐसा खाना दिया जाता है. टॉयलेट तक खुद साफ करने होते हैं. कई बार ऐसी जगह भेजा जाता है, जहां साफ पानी तक नहीं मिलता. भीषण गर्मी में बिना बिजली रात गुजारनी पड़ती है. उन्होंने आगे कहा कि बदहाल बैरक, खराब खाना और छुट्टियां नहीं मिलने से सिर्फ वो ही नाराज नहीं हैं, PAC के ज्यादातर जवान परेशान हैं. लेकिन, कोई खुलकर बोल नहीं सकता है.
कमरे में चूहे, तबेले जैसी बिल्डिंग…
बता दें, बाराबंकी में 9 PAC कंपनियां हैं. यहां करीब 1100 जवान तैनात हैं. देवेंद्र गुप्ता भी यहीं पर तैनात हैं. उन्होंने कहा कि जवानों की तैनाती पुलिस मुख्यालय में साल में सिर्फ 1-2 महीने ही रहती है. बाकी के 9-10 महीने जवानों को जिलों में अलग-अलग जगहों पर ड्यूटी के लिए भेज दिया जाता है. जहां हमें भेजा जाता है, वहां रहने की कोई व्यवस्था नहीं होती. आप जाकर देखेंगे, तो हैरान रह जाएंगे कि कोई इंसान यहां कैसे टिक सकता है. स्थिति किसी भैंस के तबेले जैसी होती है. जवानों को शहर की सबसे जर्जर और खराब बिल्डिंग में रखा जाता है. दिन में मच्छर काटते हैं, बिस्तर पर जहरीले सांप आ जाते हैं. कमरे में चूहे, बिल्ली और बंदर घुस आते हैं. न हमारी जान की सुरक्षा है, न ही हमारे सामान की. आखिर हम क्या हैं मशीन या जानवर?
इतना ही नहीं उन्होंने आगे बताया कि यह सच है कि जो आवाज उठाएगा, अधिकारी उसे सस्पेंड कर देंगे या स्पष्टीकरण मांगेंगे. इस डर से कोई सिपाही मुंह नहीं खोलता. लेकिन, हकीकत यह है कि महकमे में एक भी सिपाही खुश नहीं है. जब अफसर जांच करने आते हैं, तो वो सिपाही की वर्दी और बेल्ट चेक करते हैं. जरा-सी कमी मिली, तो अनुशासनहीनता की कार्रवाई ठोक दी जाती है. लेकिन, जिस नरक में सिपाही रह रहा है, उसकी जांच कोई अफसर नहीं करता. इससे सिपाहियों का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है.
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