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Viral Video: 'आजकल प्रेम वासना है', युवती ने इंटरकास्ट मैरिज पर पूछा सवाल तो कथावाचक अनिरुद्धाचार्य बोले-प्यार आधार कार्ड देखकर करना चाहिए.

 

'आजकल प्रेम वासना है', युवती ने इंटरकास्ट मैरिज पर पूछा सवाल तो कथावाचक अनिरुद्धाचार्य बोले-प्यार आधार कार्ड देखकर करना चाहिए


रनाल. हरियाणा के करनाल के तरावड़ी में अनिरुद्धाचार्य की कथा में एक लड़की ने उनसे इंटरकास्ट लव मेरिज को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि प्यार आधार कार्ड देखकर करना चाहिए. क्योंकि सिर्फ प्यार नहीं, आगे सृष्टि है.

बाबा बोले कि तुम्हें तुम्हारी मां का प्यार दिखा नहीं, उस लड़के का प्यार दिख गया. आज के समय में कोई प्यार नहीं बस हवस और वासना होती है. आप सुंदर हो तो प्यार करने वाले हजार मिल जाएंगे और अगर कोई काला है तो उसे कोई प्यार नहीं करेगा.

युवती ने सवाल किया कि किसी से प्रेम करना गुनाह थोड़े ही है. इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि प्रेम करने से पहले व्यक्ति को उसके परिवार, संस्कार और आगे के जीवन के बारे में विचार करना चाहिए. उन्होंने सवाल-जवाब के दौरान यहां तक कहा कि किसी से भी प्रेम कर लेने के पहले आधार कार्ड देख लेना चाहिए.

उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो लोगों के बीच का संबंध नहीं है, बल्कि उससे आगे परिवार और आने वाली पीढ़ी भी जुड़ी होती है. उन्होंने युवती से प्रेम की परिभाषा पूछी.

युवती ने जवाब दिया कि उसने उस युवक से निस्वार्थ प्रेम किया था. इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि युवती को अपनी मां का निस्वार्थ प्रेम भी देखना चाहिए था. उन्होंने कहा कि जिस मां ने उसे जन्म दिया, उसका पालन-पोषण किया, पढ़ाया-लिखाया और उसके सपने पूरे करने के लिए उसे आगे बढ़ाया, उसके प्यार को युवती क्यों नहीं समझ पाई.

उन्होंने युवती के प्रेम को लेकर कहा कि जिसे वह प्यार समझ रही है, वह उनके अनुसार प्यार नहीं, बल्कि वासना या हवस है. उन्होंने कहा कि बाहरी सुंदरता और आकर्षण के कारण किसी को प्रेम समझ लेना सही नहीं है. उनके अनुसार धर्म जीवन में बड़ी चीज है और व्यक्ति को धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए.

युवती को दी मां से बात करने की सलाह

अनिरुद्धाचार्य ने युवती से कहा- तुम्हारी मां ने भी विवाह किया और अपने पति के साथ जीवन बिताया. उन्होंने युवती से पूछा कि क्या आपकी मां अपने पति से प्यार करती हैं. युवती ने हां में जवाब दिया. इसके बाद उन्होंने कहा कि आपकी मां अपने पति को छोड़कर नहीं भागीं, बल्कि परिवार के साथ रहीं. उन्होंने युवती को समझाते हुए कहा कि जब उसकी मां और पिता जिस रास्ते पर चले, तो वह उस रास्ते पर क्यों नहीं चली. साथ ही उन्होंने युवती को एक बार फिर अपनी मां से बात करने की सलाह दी.

अंत में अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि संविधान व्यक्ति को अपनी पसंद से विवाह करने की आजादी देता है, जबकि धर्म में विवाह को लेकर अलग मर्यादाएं बताई गई हैं. उन्होंने युवती से कहा कि वह अपने फैसले का रास्ता खुद चुन सकती है, लेकिन आगे जीवन के बड़े निर्णय जिम्मेदारी और सोच-विचार के साथ लेने चाहिए.

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