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'डर है कहीं बिल्डिंग गिर न जाए', 191 बच्चों के स्कूल में बेंच-डेस्क से टिकी छत, मैथिली की विधानसभा में बुरा हाल

'डर है कहीं बिल्डिंग गिर न जाए', 191 बच्चों के स्कूल में बेंच-डेस्क से टिकी छत, मैथिली की विधानसभा में बुरा हाल


दरभंगाः मैथिली ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र अलीनगर का एक सरकारी स्कूल जर्जर हालत में है. किरतपुर प्राथमिक विद्यालय में 191 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन जर्जर भवन के एक ध्वस्त पिलर को बेंच-डेस्क और ईंटों के सहारे खड़ा किया गया है.


छत से बारिश का पानी टपकता है. जगह-जगह प्लास्टर उखड़ चुका है. हालत ऐसी है कि पांचवीं कक्षा की छात्रा भी कहती है- 'डर लगता है कहीं बिल्डिंग गिर न जाए.' स्कूल में छह कमरों की जरूरत है, लेकिन सिर्फ दो कमरे हैं. एक ही कमरे में कई कक्षाएं चल रही हैं.

स्कूल भवन की हालत सिर्फ एक पिलर तक खराब नहीं है. बारिश होने पर छत से पानी टपकता है. कई जगहों पर प्लास्टर उखड़ चुका है. बीम और पिलर भी जर्जर हालत में हैं. कई हिस्सों में सरिया बाहर निकल आया है. छत और दीवारों से प्लास्टर गिरने का खतरा भी बना हुआ है. स्कूल के शिक्षक और बच्चे इसी जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं. शिक्षकों का कहना है कि भवन की खराब स्थिति की जानकारी विभाग के अधिकारियों और वरीय अधिकारियों को दी जा चुकी है. ग्रामीण भी कई बार इस समस्या को लेकर आवाज उठा चुके हैं.



191 बच्चे, लेकिन सिर्फ दो कमरे
किरतपुर प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ाई होती है. स्कूल में करीब 191 बच्चे नामांकित हैं. स्कूल में 10 शिक्षक हैं. नियमानुसार कक्षाओं के संचालन के लिए कम से कम छह कमरों की जरूरत बताई जा रही है, लेकिन फिलहाल स्कूल के पास सिर्फ दो कमरे हैं. इनमें से एक कमरे में कार्यालय चलता है. दूसरे कमरे में एक साथ कई कक्षाओं की पढ़ाई होती है. शिक्षक संजीव कुमार बताते हैं कि- जगह की कमी के कारण कक्षा एक, दो और तीन के बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाना पड़ता है. कई बार बच्चों की कक्षाएं बरामदे या खुले स्थान में भी लगानी पड़ती हैं.

जिस कमरे में पढ़ाई, वहीं रखा है जलावन
स्कूल की व्यवस्था से जुड़ी एक और तस्वीर सामने आई है. जिस कमरे में बच्चों की पढ़ाई होती है, उसी जगह लकड़ी का जलावन और गोबर के उपले भी रखे हुए दिखाई दिए. इससे स्कूल के रखरखाव और बच्चों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक माहौल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. सहायक शिक्षक पवन कुमार चौधरी ने बताया कि स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है. ध्वस्त पिलर की जगह बेंच-डेस्क और ईंटों का सहारा दिया गया है. उनका कहना है कि इस संबंध में अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है.

'डर लगता है कहीं बिल्डिंग गिर न जाए'
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी जर्जर भवन की चिंता रहती है. पांचवीं कक्षा की छात्रा राधिका कुमारी ने बताया कि शिक्षक अच्छी तरह पढ़ाते हैं, लेकिन स्कूल की बिल्डिंग खराब होने के कारण डर बना रहता है कि कहीं भवन गिर न जाए. दूसरी कक्षा की छात्रा आरोही कुमारी ने बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की बात कही. ग्रामीण और अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. ग्रामीण दुखी कुमार यादव बताते हैं कि- स्कूल भवन के निर्माण को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन किया जा चुका है. उनका कहना है कि जर्जर भवन देखकर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी डरते हैं.

विधानसभा में भी उठा मामला
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक, किरतपुर प्राथमिक विद्यालय के जर्जर भवन का मामला विधानसभा में भी उठाया जा चुका है. अब जिला स्तर से पुराने भवन को ध्वस्त कर नया भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही जा रही है. हालांकि नए भवन के निर्माण की ठोस समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल 191 बच्चों की सुरक्षा का है. जिस स्कूल में बच्चों को सुरक्षित माहौल में पढ़ना चाहिए, वहां छत का भार बेंच-डेस्क और ईंटों के सहारे टिका हुआ है.

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