सांसद रहते सांसदी का टिकट कटा... उदास हुईं खूब रोईं, कौन हैं प्रियंका सिंह रावत, जो राज्यसभा में बनेंगी BJP का दलित फेस?

लखनऊ. कभी-कभी किस्मत किसी शख्स के पीछे-पीछे दौड़ने लगती है. 6 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में बीजेपी से जिन 8 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया, उसमें प्रियंका सिंह रावत का भी नाम शामिल है.
ये वही प्रियंका सिंह रावत हैं, जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज पी एल पुनिया को 2 लाख से भी अधिक वोटों के अंतर से हराया था. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में सांसद रहते सांसदी का टिकट कट गया. 2024 के चुनाव में भी टिकट नहीं मिला. लेकिन अब यूपी चुनाव 2027 से पहले बीजेपी ने इस युवा दलित महिला चेहरा को राज्यसभा भेजने जा रही है. प्रियंका सिंह रावत का जब सांसद रहते सांसदी का टिकट कटा तो बहुत उदास हुईं खूब रोईं. लेकिन पार्टी नेतृत्व पर विश्वास बनाए रखा. पार्टी ने पहले संगठन में जिम्मेदारी देकर प्रदेश मंत्री बनाया. फिर इस बार प्रमोशन देकर उपाध्यक्ष बना दिया. अब सीधे देश के उच्च सदन के लिए नामांकन दाखिल करा दी. आइए जानते हैं प्रियंका सिंह रावत यूपी चुनाव 2027 में बीजेपी की किस गेम प्लान का हिस्सा हैं?
6 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में बीजेपी के आठों राज्यसभा प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया. इन आठ नामों में बाराबंकी की पूर्व सांसद और यूपी बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका सिंह रावत भी शामिल रहीं. नामांकन के दौरान उन्होंने सीएम योगी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया. करीब एक दशक में प्रियंका का राजनीतिक सफर 2014 की बड़ी लोकसभा जीत, 2019 में टिकट कटना, 2024 में फिर मौका न मिलना और अब 2026 में राज्यसभा की दावेदारी तक पहुंचा है.

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज पी एल पुनिया को बड़े मार्जिन से हराया.
2014 में 28 साल की उम्र में संसद पहुंचीं
प्रियंका सिंह रावत ने 2014 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा. बीजेपी ने उन्हें बाराबंकी की सुरक्षित सीट से उम्मीदवार बनाया. मोदी लहर में उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता और तत्कालीन सांसद पीएल पुनिया को 2,11,878 वोटों के अंतर से हराया. प्रियंका को 4,54,214 वोट मिले, जबकि पुनिया को 2,42,336 वोट मिले. वह महज 28 वर्ष की उम्र में सांसद बनीं. यानी राजनीतिक पारी की शुरुआत ही उनके लिए बेहद बड़े चुनावी जनादेश के साथ हुई.
2019 में अचानक टिकट क्यों कट गया?
2019 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने बाराबंकी से प्रियंका सिंह रावत को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया. पार्टी ने उनकी जगह उपेंद्र सिंह रावत को मैदान में उतारा. दिलचस्प बात यह रही कि बीजेपी ने बाराबंकी सीट बरकरार रखी. 2019 में उपेंद्र सिंह रावत ने 5,35,917 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. यानी प्रियंका का टिकट कटना उनके 2014 के चुनावी प्रदर्शन के बावजूद हुआ. यहीं से उनके राजनीतिक सफर का पहला बड़ा डाउन फेज शुरू हुआ.
2024 में भी नहीं मिला लोकसभा टिकट
2019 के बाद प्रियंका ने संगठन में काम जारी रखा. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने उन्हें बाराबंकी से उम्मीदवार नहीं बनाया. इसके बावजूद उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी और संगठन में सक्रिय रहीं. उन्होंने खुद स्वीकार किया कि टिकट कटने पर वह भावुक हुई थीं, लेकिन पार्टी के फैसले पर भरोसा बनाए रखा. यही शायद उनके राजनीतिक सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है.

टिकट न मिलने के बावजूद बीजेपी ने प्रियंका को संगठन में जगह दी.
प्रदेश उपाध्यक्ष से राज्यसभा तक
टिकट न मिलने के बावजूद बीजेपी ने प्रियंका को संगठन में जगह दी. वह यूपी बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष बनीं. 2026 की राज्यसभा सूची में पार्टी ने उन्हें फिर बड़े राजनीतिक मंच पर पहुंचा दिया. बीजेपी ने उन्हें दलित और महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में शामिल किया है. बीजेपी की आठ सदस्यीय सूची में प्रियंका के अलावा श्रुति गंगवार दूसरी महिला उम्मीदवार हैं. इस तरह पार्टी ने अपनी नई राज्यसभा टीम में दो महिला चेहरों को जगह दी है.
प्रियंका की सियासी मजबूती क्या है?
उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका पुराना चुनावी अनुभव और संगठन में टिके रहने की क्षमता है. वह लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं. वह केंद्र की राजनीति देख चुकी हैं. संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं और अब राज्य स्तर पर पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष भी रही हैं. दूसरी महत्वपूर्ण बात उनका सामाजिक आधार है. पासी समुदाय यूपी में बड़ा दलित समूह है और उसका प्रभाव खासकर अवध क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है. बाराबंकी, लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और अमेठी जैसे इलाकों में इस समुदाय की मौजूदगी है. यानी प्रियंका के जरिए बीजेपी महिला-दलित वोट बैंक पर और पकड़ बनाएगी.
28 साल में ही सांसद बन गईं. युवा और महिला होने के कारण वह जनता के लिए मुखर भी रहीं. लेकिन उनका विवादों से भी नाता रहा. प्रियंका सिंह रावत से अधिकारी नाराज रहते थे. कम उम्र में सांसद बनने वाली प्रियंका अधिकारियों के साथ तनातनी में लगातार विवादो मे रही. एक मामले में तो उन्होंने एक आईपीएस अधिकारी को खाल उतरवाने तक की चेतावनी देकर विवादों में आ गईं. कलेक्ट्रेट में तत्कालीन डीएम के कक्ष के सामने धरने पर बैठ गईं थीं. पिता उत्तम राम सिंह को अपना पीआरओ घोषित कर वह पीएम मोदी तक चर्चा में आईं थीं, बाद में पार्टी नेतृत्व के संज्ञान लेने पर उन्हें हटाया गया. शायद इन विवादों के कारण उनका टिकट 2019 और 2024 में कटा. लेकिन, 2026 में प्रियंका सिंह रावत ने एक बार जोरदार वापसी की है.
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