Recent Posts

Breaking News

"मां... मेरा क्या कसूर"? जिसे चाहिए थी ममता की गोद, वो अस्पताल के रैक पर मिली मासूम की दर्दनाक' कहानी

 

"मां... मेरा क्या कसूर"? जिसे चाहिए थी ममता की गोद, वो अस्पताल के रैक पर मिली; मासूम की दर्दनाक कहानी


पटना. दुनिया में आंखें खोलकर अभी ठीक से 10 दिन भी नहीं हुए थे… मां की गोद की गर्माहट महसूस करने, पिता की उंगली थामने और अपनों के बीच पलने की उम्र थी. लेकिन, दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में यही मासूम दवा वितरण केंद्र के एक रैक पर कपड़े में लिपटी लावारिस मिली.


जिस जगह लोग बीमारी की दवा लेने आते हैं, उसी जगह एक नन्ही जिंदगी अपनों की तलाश में बेसहारा पड़ी थी.

अगर यह मासूम बोल पाती, तो शायद अपनी मां से सिर्फ इतना पूछती- "मां… मेरा क्या कसूर था? मुझे इस दुनिया में लाकर मुझसे मेरा अपना क्यों छीन लिया?" और शायद उसकी मासूम आंखें समाज से सवाल करतीं- "क्या बेटी होना इतना बड़ा गुनाह है कि जन्म के महज 10 दिन बाद ही मुझे अपनों से दूर कर दिया गया?"

कपड़े में लिपटी रोती हुई मिली नवजात

दरअसल दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में जब सफाईकर्मी दवा वितरण केंद्र परिसर की सफाई करने पहुंचे, तो रैक पर कपड़े में लिपटी रोती हुई नवजात दिखाई दी . करीब 10 से 12 दिन की बच्ची को देखकर अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मच गया. अस्पताल प्रशासन ने तत्काल बच्ची को अपने संरक्षण में लिया और चिकित्सकीय जांच कराई. अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. निभा मोहन की निगरानी में बच्ची का इलाज किया जा रहा है. फिलहाल बच्ची की हालत सामान्य बताई जा रही है.

CCTV खंगाल रही पुलिस

अस्पताल कर्मी कमला देवी के मुताबिक, किसी अज्ञात व्यक्ति ने बच्ची को कपड़े में लपेटकर रैक पर छोड़ दिया और वहां से चला गया. अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है. आखिर वह कौन था, जिसने इस मासूम को यहां छोड़ा? मां थी… मजबूर थी… या किसी ने इस बच्ची को जन्म देने वाली मां से भी उसका अधिकार छीन लिया? फिलहाल अस्पताल में मासूम सुरक्षित है. डॉक्टर उसकी देखभाल कर रहे हैं. लेकिन, उसकी मां की तलाश और उसे छोड़ने की वजह अभी भी सवाल बनी हुई है.

कहते हैं, बेटियां घर की रौनक होती हैं. लेकिन, इस मासूम की कहानी ने एक बार फिर समाज से सवाल पूछा है- मेरा क्या कसूर?

No comments