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'मौत भी मंजूर, लेकिन वतन लौटूंगी.', दिसंबर में बांग्लादेश वापसी पर शेख हसीना अडिग, बोलीं- विदेशी मदद की जरूरत नहीं

'मौत भी मंजूर, लेकिन वतन लौटूंगी.', दिसंबर में बांग्लादेश वापसी पर शेख हसीना अडिग, बोलीं- विदेशी मदद की जरूरत नहीं


बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने गुरुवार को फिर दावा किया कि वह दिसंबर महीने में वापस वतन लौटेंगी. एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक ईमेल इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि भले ही उन्हें मौत की सजा हो और जाने पर गिरफ्तारी, जेल या मौत की भी संभावना हो, वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी.


शेख हसीना ने कहा कि अगस्त में पहली बार ऐलान करने के बाद से लौटने का उनका फैसला नहीं बदला है. उन्होंने अपनी वापसी को आसान बनाने के लिए भारत या दूसरे देशों से कूटनीतिक दखल की मांग करने से भी इनकार कर दिया.

हसीना ने AP को बताया, “अगर मौत मेरी किस्मत है, तो मैं अपने देश की धरती पर, अपने लोगों के बीच मरना पसंद करूंगी. इसलिए, मैं बांग्लादेश लौटूंगी. वह फैसला नहीं बदला है.”

हसीना, जो 2009 से अगस्त 2024 में हटाए जाने तक प्रधानमंत्री थीं, ने कहा कि वह लौटने में शामिल खतरों के लिए तैयार हैं, जिसमें बांग्लादेश में घुसते ही हिरासत में लिए जाने की संभावना भी शामिल है.

विदेशी मदद की जरूरत नहीं… बोलीं शेख हसीना

उन्होंने यह नहीं बताया कि वह भारत से वापस कैसे जाएंगी. उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि लौटने पर मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है. मुझे जेल हो सकती है, टॉर्चर किया जा सकता है या मार भी दिया जा सकता है. मुझे इन संभावनाओं के बारे में पूरी तरह पता है, लेकिन मैं अपनी बाकी जिंदगी अपने लोगों को दूर से तकलीफ में देखकर नहीं बिता सकती.”

इस सवाल के जवाब में कि क्या उन्हें उम्मीद है कि भारत या यूनाइटेड स्टेट्स ढाका पर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए दबाव डालेंगे, हसीना ने कहा कि उन्हें किसी विदेशी सरकार के समर्थन की जरूरत नहीं है.

उन्होंने AP को बताया, “मैं सभी देशों के साथ दोस्ती और सहयोग को महत्व देती हूं. यह हमेशा से हमारी (बांग्लादेश की) विदेश नीति रही है, लेकिन मुझे अपने देश लौटने के लिए किसी विदेशी ताकत के आशीर्वाद की जरूरत नहीं है.”

शेख हसीना को सुनाई गई है मौत की सजा

हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश से भाग गईं, जब छात्रों के नेतृत्व वाले बड़े विद्रोह ने उन्हें पद से हटा दिया. तब से वह भारत में ही हैं. नवंबर 2025 में, बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए उनकी गैरमौजूदगी में उन्हें मौत की सजा सुनाई. यूनाइटेड नेशंस का अनुमान है कि हिंसा के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए थे. हसीना ने गलत काम करने से इनकार किया है, फैसले को खारिज कर दिया है और ट्रायल की वैधता पर सवाल उठाया है.

बांग्लादेश ने बार-बार उनके एक्सट्रैडिशन की मांग की है, लेकिन भारत ने उन्हें सौंपने से इनकार कर दिया है. उनकी वापसी की योजना अवामी लीग के अनिश्चित राजनीतिक भविष्य के बैकग्राउंड में भी है. पार्टी पर बैन लगा हुआ है, इसके कई सीनियर नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है या देश निकाला दे दिया गया है, और इसे फरवरी का चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था.

हसीना को हटाने के बाद, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने 18 महीने तक अंतरिम सरकार चलाई. फरवरी में, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे और हसीना के लंबे समय से राजनीतिक विरोधी तारिक रहमान, अंतरिम सरकार के तहत हुए चुनाव में भारी जीत हासिल करने के बाद सत्ता में आए. हसीना ने अवामी लीग के समर्थकों पर कार्रवाई का आरोप लगाया.

बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा का लगाया आरोप

हसीना ने आरोप लगाया कि उनके जाने के बाद से अवामी लीग के समर्थकों पर राजनीतिक दबाव जारी है. उन्होंने दावा किया कि अगस्त 2024 से अब तक कम से कम 20,000 पार्टी सदस्य मारे जा चुके हैं, जबकि हजारों और को गिरफ्तार किया गया, प्रताड़ित किया गया या छिपने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समर्थकों ने अपने राजनीतिक जुड़ाव के कारण अपने घर, व्यवसाय और आजीविका खो दी है.

उन्होंने बताया, “कोई सामान्य राजनीतिक या लोकतांत्रिक माहौल नहीं है,” उन्होंने अधिकारियों पर अवामी लीग को व्यवस्थित रूप से दबाने का आरोप लगाया. सरकार का कहना है कि गिरफ्तारियां खास आरोपों से जुड़ी हैं. हालांकि, ह्यूमन राइट्स वॉच समेत कई अधिकार ग्रुप्स ने हाल के महीनों में नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर कथित हमलों को लेकर रहमान की सरकार की आलोचना की है. हसीना ने चरमपंथी ग्रुप्स के बढ़ते असर पर चिंता जताई.

हसीना ने बांग्लादेश में चरमपंथी ग्रुप्स के बढ़ते असर पर भी चिंता जताई. ग्लोबल अधिकार ग्रुप्स और स्वतंत्र ऑब्जर्वर ने पहले भी यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान उदारवादी ताकतों को दबाने की कोशिश कर रहे कट्टरपंथी ग्रुप्स के बारे में चिंता जताई थी. अल्पसंख्यक समुदायों ने भी डराने-धमकाने की घटनाओं की रिपोर्ट की, जिन आरोपों से अंतरिम सरकार ने इनकार किया. हसीना ने बताया, “मौजूदा राजनीतिक माहौल ने चरमपंथी तत्वों को और ज़्यादा आत्मविश्वासी बनने दिया है.” सत्ता में अपने 15 सालों के दौरान, हसीना ने कट्टरपंथी ग्रुप्स के प्रति कड़ा रवैया अपनाया था. उनकी ताजा टिप्पणी बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था, अल्पसंख्यक अधिकारों और राजनीतिक माहौल को लेकर जारी चिंताओं के बीच आई है.

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