Himachal: 32 महीने में तैयार होने वाले प्रोजेक्ट को लग गए 12 साल

हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरशन के 111 मेगावाट सावड़ा कुड्डू बिजली प्रोजेक्ट का निर्माण जून 2007 में शुरू हुआ था। इसके निर्माण का लक्ष्य सितंबर 2012 में रखा था। प्रति वर्ष करीब 368 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होना था। इससे प्रति वर्ष सरकार को 120 करोड़ से अधिक की आय होनी है, लेकिन परियोजना का निर्माण कार्य सुस्ताने ढंग चल रहा है। 32 माह में तैयार होने वाला प्रोजेक्ट 12 साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है।
निर्माण में देरी से परियोजना की लागत भी तीन गुना बढ़ गई है। सरकार को एक हजार करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है। सावड़ा कुड्डू परियोजना की अनुमानित लागत वर्ष 2007 में 558.53 करोड़ थी। यह बढ़कर करीब 1500 करोड़ हो गई है। सुरंग निर्माण के साथ बैराज निर्माण का कार्य भी तय समय से ऊपर जा चुका है। करीब 283 करोड़ से बन रही बैराज का कार्य पटेल इंजीनियरिंग को सितंबर 2012 तक पूरा करना था।
सुरंग निर्माण का कार्य कास्टल कंपनी को 116 करोड़ में दिया गया था, लेकिन कंपनी अधर में कम छोड़ गई। इसके बाद काम एचसीसी कंपनी को दिया गया। एचसीसी कंपनी ने सुरंग निर्माण का कार्य पूरा कर लिया है। हालांकि, प्रोजेक्ट का कार्य अंतिम चरण में है, लेकिन निर्माण कार्य में देरी से सरकार को अरबों का नुकसान हो चुका है।
उधर, एचपीपीसीएल के निदेशक डीएस ठाकुर ने माना कि परियोजना निर्माण में देरी हुई है। परियोजना निर्माण के दौरान कई रुकावटें आईं। सुरंग निर्माण में प्रतिकूल भू-वैज्ञानिक स्थितियां पाई गईं। सुरंग निर्माण में लगी कंपनी काम छोड़कर चली गई। इससे टेंडर प्रक्रिया फिर से करनी पड़ी। अप्रैल अंत तक परियोजना तैयार हो जाएगी।
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