Himachal: शिक्षकों ने शिक्षा बोर्ड के खिलाफ खोला मोर्चा, नहीं जांचेंगे उत्तर पुस्तिकाएं

राजकीय अध्यापक संघ ने बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का सामूहिक बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। स्कूल शिक्षा बोर्ड के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि वार्ता की जगह दबाव में शिक्षकों से काम लेना बोर्ड चेयरमैन की भूल है। अध्यापक संघ ने काम के बदले सम्मान जनक राशि देने की मांग दोहराई है। संघ ने शिक्षा बोर्ड पर शिक्षकों के सम्मान के खिलाफ उन्हें प्रताड़ित करने, उनसे जबरन बोर्ड ड्यूटी ष्ठह्नद्भ पेपर चेक करवाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, राज्य चेयरमैन सचिन जसवाल, चीफ पैटर्न अरुण गुलेरिया, पैटर्न सरोज मेहता, मनोहर शर्मा, अजीत चौहान, दिलेर जमवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव ठाकुर, अजय शर्मा, कमलराज अत्री, मुकेश शर्मा, महासचिव श्यामलाल हांडा, वित्त सचिव देव राज ठाकुर, मुख्य प्रेस सचिव और प्रवक्ता कैलाश ठाकुर, प्रेस सचिव संजय चौधरी, उपाध्यक्ष गोविंद पठानिया, रमेश किमटा ने शिक्षा बोर्ड चेयरमैन पर शिक्षक संगठनों से बात न करने और शिक्षकों से दबाव में काम करवाने के आरोप लगाए हैं।
अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने बताया कि बोर्ड चेयरमैन और सचिव को शिक्षकों की मांगों, समस्याओं को लेकर एक मांग पत्र एक माह पूर्व ई मेल किया था। बैठक के लिए समय मांगा था लेकिन बोर्ड का जवाब आया कि हमारे पास शिक्षकों से बात करने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि बोर्ड सभी तरह के कामों के लिए शिक्षकों पर निर्भर है जबकि हम बोर्ड के कर्मचारी नहीं हैं। साल 2014 में हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के विरोध प्रदर्शन के बाद पेपर चेकिंग और अन्य मेहनताने में 50 प्रतिशत की वृद्धि इस शर्त के साथ की थी कि भविष्य में हर 3 साल के बाद कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।
जबकि अब 6 साल बीत जाने के बाद भी किसी प्रकार की सम्मानजनक वृद्धि नहीं की गई है। यही कारण है कि एस बार बोर्ड परीक्षाओं में सुपरिंटेंडेंट और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के साथ-साथ पेपर चेकिंग में ज्यादातर शिक्षकों ने अपनी सहमति नहीं दी है। चौहान ने कहा कि यदि बोर्ड ने इस तरह से शिक्षकों को प्रताड़ित करने का कार्य किया तो संघ बोर्ड का घेराव करेगा।
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