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Shimla: एमओयू में 15000 करोड़ की डुप्लीकेसी


शिमला – हिमाचल में निवेश के लिए किए गए आवेदनों में लगभग 15 हजार करोड़ की डुप्लीकेसी है। इसका मतलब है कि इतने आवेदन रद्द होंगे, क्योंकि कई कंपनियों ने दो-दो बार आवेदन दिए हैं। उनके साथ एक बार एमओयू हो चुका है, लेकिन एक अन्य आवेदन भी उनका आया हुआ है। इस डुप्लीकेसी में इन दिनों उद्योग विभाग फंसा हुआ है और छंटनी कर रहा है कि कितने कंपनियों ने इस तरह से दो या तीन दफा आवेदन कर रखे हैं। बताया जाता है कि कंपनियां सीधे उद्योग विभाग के पोर्टल पर तो आवेदन करती रहीं है, लेकिन उन्होंने दूसरे माध्यमों से भी अपने आवेदन किए। 

यह डुप्लीकेसी इस वजह से भी है कि किसी कंपनी ने उद्योग विभाग के पोर्टल पर आवेदन के साथ दूसरे विभाग, जिससे उनका प्रोजेक्ट जुड़ा है, मेें भी आवेदन कर दिया। इसके अलावा सीएम को भी आवेदन भेजा। ऐसे में लगभग 15 हजार करोड़ रुपए की डुप्लीकेसी इसमें होनी संभावित है, जिससे अधिकारी भी इनकार नहीं कर रहे हैं। उद्योग विभाग इस संबंध में दूसरे विभागों  से सूचनाएं एकत्र कर रहा है और ऐसे कई मामले उसके सामने आ चुके हैं। इस पर संबंधित कंपनियों से विभाग बात भी कर रहा है। अधिकारियों का दावा है कि यहां पर कंपनियों के साथ एमओयू का आंकड़ा एक लाख करोड़ से ऊपर का हो चुका है। पहली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के दौरान बताया गया था कि सरकार ने 96 हजार करोड़ के एमओयू कर लिए हैं, जिसके बाद से अब तक एक लाख करोड़ से ऊपर का आंकड़ा चला गया है। 

इसमें से 15 हजार करोड़ की डुप्लीकेसी को हटा दिया जाए तो यह आंकड़ा 85 हजार करोड़ रुपए तक का ही बनेगा, जिसका टारगेट खुद सरकार ने तय किया था। चूंकिसरकार का टारगेट ही 85 हजार करोड़ रुपए का था, लिहाजा इस डुप्लीकेसी को वह ज्यादा गंभीरता से नहीं लेती। इसलिए इस टारगेट को ही धरातल पर उतारने की कोशिशें विभाग की रहेंगी, जिस पर काम किया जा रहा है। सरकार की दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी मई या जून महीने में होनी है, जिसमें 10 हजार करोड़ का टारगेट रहेगा जोकि पहली सेरेमनी में भी था। इस पर 15 फरवरी को चर्चा की जानी है, जो बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी। देखना होगा कि कौन से विभाग कितने प्रस्ताव  इसमें लेकर आते हैं।

एमओयू एक लाख करोड़ से ऊपर के हो चुके हैं, जिनमें 15 हजार करोड़ की डुप्लीकेसी का अनुमान है। सरकार ने अपना टारगेट पूरा कर दिया है और अब उसे धरातल पर उतारने के लिए काम किया जा रहा है
मनोज कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग

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